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बाल आयोग का शिक्षा विभाग को रिमाइंडर... 'गुड टच, बैड टच' के बारे में अब तक कितना बताया?

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: January 14, 2019, 5:12 PM IST
बाल आयोग का शिक्षा विभाग को रिमाइंडर... 'गुड टच, बैड टच' के बारे में अब तक कितना बताया?
प्रतीकात्मक तस्वीर

आयोग ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को नोटिस जारी पूछा है कि उन्होंने इस मामले में अब तक क्या किया है.

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देहरादून और हल्द्वानी में एक ही दिन में दो नाबालिग लड़कियों के बलात्कार के बाद गर्भवती हो जाने के मामले सामने आने के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग सक्रिय हो गया है. आयोग ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को नोटिस जारी पूछा है कि उन्होंने इस मामले में अब तक क्या किया है. इसके अलावा शिक्षा विभाग को तीन महीने पहले बच्चों को यौन हिंसा के प्रति जागरूक करने के लिए जारी किए गए नोटिस के बाद अब रिमाइंडर जारी किया है.

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने देहरादून और हल्द्वानी के मामलों को बेहद गंभीर बताते हुए देहरादून और नैनीताल पुलिस को पत्र लिखकर पूछा है कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है.

इसके साथ ही आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को भी एक पत्र लिखकर पूछा है कि क्या दोनों बच्चियों की काउंसिलिंग की गई है. नेगी कहती हैं कि स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारी है कि वह बलात्कार और यौन शोषण की शिकार लड़कियों, महिलाओं की काउंसिलिंग करे ताकि वह उस मानसिक आघात से उबर सकें जो उन्होंने झेला है.

इसके साथ ही आयोग ने शिक्षा विभाग को भी एक रिमाइंडर भेजा है. नेगी के अनुसार तीन महीने पहले आयोग ने शिक्षा विभाग को एक पत्र लिखकर कहा था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को यौन शोषण के प्रति जागरूक किया जाए. बच्चों को ‘गुड टच, बैड टच’ के बारे में बताया जाए.

अब इन दोनों मामलों में बच्चियों के गर्भ धारण करने के मामले सामने आने के बाद यह तय है कि दोनों ही पीड़िताओं ने समय पर अपने परिजनों को अपने साथ हो रहे यौन दुर्व्यवहार के बारे में नहीं बताया. इसका अर्थ यह हुआ कि खुद पढ़ने-खेलने की उम्र में उन्हें बच्चों को पालना होगा.

नेगी कहती हैं कि शिक्षा विभाग से आयोग ने पूछा है कि तीन महीने पहले जारी पत्र पर उन्होंने अब तक क्या कार्रवाई की है? सरकारी स्कूलों के बच्चों को यौन शोषण प्रति जागरूक करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है? आयोग ने शिक्षा विभाग को जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया है.

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First published: January 14, 2019, 5:02 PM IST
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