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UJVNL को ‘मेड इन इंडिया’ स्वीकार नहीं... इटली में बनी महंगी मशीन के लिए भारत की बनी खारिज
Dehradun News in Hindi

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: February 17, 2020, 5:57 PM IST
UJVNL को ‘मेड इन इंडिया’ स्वीकार नहीं... इटली में बनी महंगी मशीन के लिए भारत की बनी खारिज
मुख्यमंत्री को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि इटैलियन कंपनी को काम देने लिए अफसरों ने सांठ-गांठ कर उनकी कंपनी को तकनीकी बिड में डिसक्वालिफाई कर दिया जबकि वह निवदा की सारी शर्तें पूरी कर रहे थे.

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देहरादून. उत्तराखंड जल विद्युत निगम में सिंगल बिड पर काम देने को लेकर बवाल शुरू हो गया है.  आरोप लगाया जा रहा है कि अपने चहेतों को टेंडर देने के लिए गलत ढंग से टेक्निकल बिड से अन्य कम्पनियों को बाहर किया गया है जबकि अन्य कम्पनियों के रेट 25 से 30 प्रतिशत कम थे. टेंडर प्रक्रिया से बाहर हुई एक कंपनी ने तो मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत कर जांच की मांग की है.

महंगा है तो अच्छा है!

बता दें कि यूजेवीएनएल ने साल 2019 में यमुना वैली की ढालीपुर जल विद्युत परियोजना और पशुलोक बैराज में कचरा सफ़ाई के लिए दो ट्रेस रैक क्लीनिंग मशीन खरीद के लिए टेंडर जारी किया है. टेंडर में सिर्फ़ दो कंपनियों ने भाग लिया. पहली थी दिल्ली की जीएमडब्ल्यू और दूसरी थी मल्टीटेक इंजीनियर्स लिमिटेड जिसके साथ जॉएंट वैंचर में इटैलियन कंपनी ब्ल्यू ऐरोवोन ऐरगॉन इनर्जी शामिल थी.

टेंडर में जिस मशीन की कीमत इटैलियन कंपनी ने 14.90 करोड़ रुपये कोट किए हैं उसे जीएमडब्ल्यू ने 11.60 करोड़ रुपये कोट किया है. अब कहा यह जा रहा है कि यूजेवीएनएल उस कम्पनी को टेंडर देने जा रहा है जिसके रेट ज़्यादा हैं यानी इंडियन-इटैलियन जॉएंट वेंचर को.



सीएम को शिकायत 

यह मामला इसलिए उठा क्योंकि इस रेस में पिछड़ गई जीएमडब्ल्यू ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत कर दी है. मुख्यमंत्री को दिए गए शिकायती पत्र में कंपनी के डायरेक्टर देवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि इटैलियन कंपनी को काम देने लिए अफसरों ने सांठ-गांठ कर  उनकी कंपनी को तकनीकी बिड में डिसक्वालिफाई कर दिया जबकि वह निविदा की सारी शर्तें पूरी कर रहे थे.

शिकायती पत्र में यह भी कहा गया कि उनकी दरें प्रतिद्वंदी कंपनी से काफी कम हैं. उनकी मशीन भारत में ही बनी है लेकिन जिस कंपनी से काफी अधिक दरों पर मशीनें खरीदी जा रही वह इटली की बनी हुई है. शिकायतकर्ता के अनुसार मिलीभगत कर इस मशीन को 6.60 फ़ीसदी अधिक दर पर खरीदा जा रहा है.

विवादित है कंपनी 

बता दें कि नियमानुसार सिंगल बिड में किसी भी कंपनी को काम नहीं दिया जा सकता. बताया जा रहा है कि जिस कंपनी मल्टीटेक को टेंडर देने की तैयारी है उसके काम पर पर असंतुष्टि जताकर हिमाचल के विद्युत विभाग ने भी नोटिस जारी किया है. इसके अलावा भी कंपनी पर कई आरोप हैं. ऐसे में बिना जांच पड़ताल के यदि उसे टेंडर दिया जाता है तो इस पर सवाल उठने ही हैं.

प्रबंधन की दलील 

इस आरोप को यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने खारिज किया है. न्यूज़ 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अभी टेंडर फाइनल नहीं किया गया है. सिंघल ने कहा कि जीएमडब्ल्यू दरअसल वर्ल्ड बैंक (प्रोजेक्ट फ़ाइनेंसर) की गाइड लाइन्स को पूरा नहीं करती है. उन्होंने यह भी कहा कि टेंडर देने में कहीं किसी का दबाव नहीं है और सिंगल बिड में टेंडर दिया जा सकता है.

इस बीच उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने इस टेंडर प्रक्रिया की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि कम्पनी कोई भी हो प्रदेश हित और निगम हित को देखते हुए काम होना चाहिए.

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First published: February 17, 2020, 5:54 PM IST
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