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दिल्ली चुनाव परिणामों से यूकेडी उत्साहित... बीजेपी का झूठ समझने लगे हैं लोग: दिवाकर भट्ट
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: February 11, 2020, 6:15 PM IST
दिल्ली चुनाव परिणामों से यूकेडी उत्साहित... बीजेपी का झूठ समझने लगे हैं लोग: दिवाकर भट्ट
उत्तराखंड क्रांति दल के फ़ील्ड मार्शल कहे जाने वाले दिवाकर भट्ट कहते हैं कि पार्टी नई रणनीति के साथ फिर खड़े होने की कोशिशों में जुट गई है.

'आशा की जानी चाहिए कि दिल्ली और दूसरे राज्यों की तरह लोग उत्तराखंड के लिए काम करने वालों को मौका देंगे इस बार.'

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देहरादून. दिल्ली के चुनाव परिणामों से उत्तराखंड की रीजनल पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल में भी उत्साह नज़र आने लगा है. उत्तराखंड के अलग राज्य आंदोलन को लीड करने वाले इस दल को उम्मीद बंधी है कि अब देश की जनता बीजेपी के झूठ को समझने लगी है और इसलिए उत्तराखंड के लोग भी दिल्ली की तरह क्षेत्र के लिए काम करने वाले दल को मौका देंगे. उत्तराखंड क्रांति दल के फ़ील्ड मार्शल कहे जाने वाले दिवाकर भट्ट कहते हैं कि पार्टी नई रणनीति के साथ फिर खड़े होने की कोशिशों में जुट गई है.

क्षेत्रीय दलों की जीत 

दिल्ली से पहले भी बीजेपी को राज्यों में स्थानीय दलों ने ही पटखनी दी है. उत्तराखंड के साथ ही बने झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बाज़ी जीती और झामुमो के हेमंत सोरेन मुख्यंत्री बने. महाराष्ट्र में बीजेपी को झटका देकर शिवसेना ने सत्ता हथिया ली तो तेलंगाना में टीआरएस को जीत मिली.

नॉर्थ ईस्ट के राज्य मिजोरम में स्थानीय दल एमएनएफ़ सत्ता में आया तो हरियाणा में नई बनी पार्टी जेजीपी ने बीजेपी का रास्ता रोक दिया और दुष्यंत चौटाला धमक के साथ बीजेपी की सरकार में उपमुख्यमंत्री बने. ये चुनाव परिणाम साफ़ करते हैं कि बीजेपी को रीजनल पार्टी ही रोक सकती है.

अब यूकेडी की बारी

क्या उत्तराखंड में यूकेडी में भी यह दम है? पार्टी के वरिष्ठ नेता दिवाकर भट्ट को लगता है कि अब यूकेडी की वापसी का समय आ गया है. वह कहते हैं कि उक्रांद उन गलतियों को दूर कर रहा है जो पहले की थीं. पहली गलती यह थी कि हम सड़क पर चलते रहे और जो रास्ता विधानसभा में जाता है उसे नहीं अपनाया. यह रास्ता था गांव का. भट्ट कहते हैं कि अब सभी लोगों को समझा रहे हैं कि गांव के रास्ते से चलकर आगे आएं.

दूसरे हम यह काम कर रहे हैं कि जितने भी उत्तराखंड के पक्षधर थे, उन सपनों को अपनाने में सहायक बने थे... उन सभी बिखरे हुए लोगों को एक कर रहे हैं. उत्तराखंड के लिए सोचने वाले सभी लोगों को एक मंच पर लाकर तीसरा विकल्प पेश करेंगे.उत्तराखंड के लोगों ने देख लिया है कि दोनों दलों ने कुछ नहीं किया. 10 साल बीजेपी को दे दिए हैं, 10 साल कांग्रेस को अब वह एक मौका उत्तराखंड के लिए काम करने वाली पार्टी को भी देंगे.

उत्तराखंडियत पर ज़ोर

नई उम्मीद जगने की बात करते हुए भी यूकेडी के फ़ील्ड मार्शल का दर्द सामने आ ही जाता है. वह कहते हैं कि दुर्भाग्य है कि राज्य आंदोलन को लीड करने वाले, अपना सब-कुछ उत्तराखंड के नाम पर होम कर देने वालों को ही प्रदेश के लोगों ने दरकिनार कर दिया और ऐसे लोगों को सत्ता सौंप दी जो कहते थे, ‘मेरी लाश पर बनेगा उत्तराखंड’.

भट्ट कहते हैं कि अब तक तो सब राष्ट्र की बातें कर रहे थे लेकिन क्षेत्र के बारे में कोई सोच नहीं थी. आशा की जानी चाहिए कि दिल्ली और दूसरे राज्यों की तरह लोग उत्तराखंड के लिए काम करने वालों को मौका देंगे इस बार. उत्तराखंड में रहने वालों को खुद को गर्व से उत्तराखंडी कहना होगा, तभी इस राज्य का भला होगा.

लक्ष्मी की कृपा की ज़रूरत

आज चुनाव पैसे के बल पर लड़े जाते हैं और सभी जानते हैं कि चुनाव आयोग की कड़ी नज़र के बावजूद खर्च की सीमा से ज़्यादा पैसा खर्च करने के लिए राजनीतिक दल और उम्मीदवार कई तरीके निकालते हैं. इसके विपरीत हालत यह है कि यूकेडी के पास पार्टी को रैली, धरना-प्रदर्शन तक करने के लिए फंड की कमी रहती है.

दिवाकर भट्ट कहते हैं कि यह सच है कि लक्ष्मी जी की कृपा से हम हमेशा दूर ही रहे हैं लेकिन अगर हमारी तपस्या सच्ची है तो एक दिन ज़रूर लक्ष्मी जी हम पर कृपा करेंगी. यानी कि आर्थिक मोर्चे पर मजबूती के लिए पार्टी के पास अभी कोई ठोस योजना नहीं है और बिना आर्थिक मोर्चे को मजबूत किए यूकेडी बीजेपी-कांग्रेस के आगे खड़ी हो पाएगी इसमें गंभीर संदेह नज़र आता है.

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First published: February 11, 2020, 3:57 PM IST
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