उत्तराखंड: जल्द बंद हो जाएगा भूजल का अंधाधुंध दोहन, नए कानून का ड्राफ़्ट तैयार

बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी भूजल का दोहन नहीं कर पाएगा. घरेलू उपयोग के लिए 5,000 और कमर्शियल उपयोग के लिए 10,000 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा.

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: July 29, 2019, 8:07 PM IST
उत्तराखंड: जल्द बंद हो जाएगा भूजल का अंधाधुंध दोहन, नए कानून का ड्राफ़्ट तैयार
उत्तराखंड सरकार भूजल के अंधाधुंध दोहन पर पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने जा रही है.
satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: July 29, 2019, 8:07 PM IST
एक हज़ार से ज़्यादा छोटी-बड़ी नदियों के राज्य उत्तराखंड में भी आने वाले समय में पानी का भारी संकट होने की आशंका है. राज्य में भूजल का स्तर लगातार घट रहा है, जिसका बड़ा कारण भूजल का अनियंत्रित दोहन है. राहत की बात यह है कि राज्य सरकार आने वाले इस खतरे से निपटने के लिए कमर कस चुकी है और भूजल के अंधाधुंध दोहन पर पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने जा रही है. अगले विधानसभा सत्र में आने वाले विधयेक के तहत बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी भूजल का दोहन नहीं कर पाएगा.

गंभीर है स्थिति 

देश के कई राज्य भौगोलिक रूप से पानी की उपलब्धता के मामले में गरीब हैं लेकिन गंगा-यमुना का मायका उत्तराखंड नहीं. इसके बावजूद उत्तराखंड में भूजल दोहन से स्थिति गंभीर हो गई है. मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स हों या एक मंज़िला मकान पानी की आपूर्ति का सबसे आसान ज़रिया है बोरिंग कर ज़मीन से पानी खींचना. इस चलन के चलते अब स्थिति गंभीर हो गई है.

घटते भूजल लेवल को देखते सिंचाई विभाग ने एक सर्वे किया है और राज्य को चार हिस्सों में बांटा है. इनमें सेफ़ ज़ोन, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल, ओवर एक्सप्लोइटेड हैं. विभाग के अनुसार राज्य में 5 ब्लॉक ऐसे हैं जहां सेमी क्रिटिकल स्थिति है.

नए कानून में हैं ये प्रावधान 

उत्तराखंड राज्य में भी भूजल पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार कानून तैयार करने जा रही है. ग्राउंड वाटर रेगुलेशन, कंट्रोल, डेवलपमेंट एन्ड मैनेजमेंट कानून का  ड्राफ़्ट सिंचाई विभाग ने तैयार किया है. ड्राफ़्ट के अनुसार अब बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी भूजल का उपयोग नहीं कर सकता. भूजल दोहन के लिए एक फ़ीस भी निर्धारित की गई है. घरेलू उपयोग के लिए 5000 रुपये का और कमर्शियल उपयोग के लिए 10 हजार रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क होगा.

इसके अलावा सभी भूजल दोहन करने वालों पर पीजो मीटर लगेंगे जिनसे यह पता चल सकेगा कि कितना पानी निकाला जा रहा है. भूजल प्रयोग के लिए भी शुल्क लिया जाएगा. प्रस्तावित शुल्क प्रति एक हज़ार लीटर पर 1.50 रुपये है. ड्राफ्ट के अनुसार भूजल दोहन के लिए ये शर्तें 600 मीटर की ऊंचाई तक ही लागू होंगी. इसके अलावा किसानों को इससे छूट भी मिलेगी.
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रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर ध्यान देना ज़रूरी 

लेकिन हल सिर्फ़ फ़ीस वसूलना ही नहीं है. जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था पीपल्स साइंस इन्स्टीट्यूट से जुड़े इंजीनीयर राजेश कुमार कहते हैं कि कि राज्य में रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर भी ध्यान दिया जाना ज़रूरी है. अगर भूजल को रीचार्ज नहीं किया तो अंततः ये ख़त्म हो जाएगा.

नए प्रस्तावित कानून से राज्य सरकार को दोहरा लाभ होने जा रहा है. इससे भूजल के अंधाधुंधध दोहन पर तो रोक लगेगी ही राज्य को सालाना दो से तीन सौ करोड़ रुपये का राजस्व भी मिलेगा.

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First published: July 29, 2019, 7:01 PM IST
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