एसडीआरएफ की मदद से बिहार के युवक को 13 साल बाद मिला अपना परिवार

भाषा
Updated: August 26, 2019, 9:31 AM IST
एसडीआरएफ की मदद से बिहार के युवक को 13 साल बाद मिला अपना परिवार
एसडीआरएफ की प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड पुलिस के प्रयासों की बदौलत 22 वर्षीय एक युवक को 13 साल बाद अपना परिवार मिल गया. वह 13 वर्ष पहले बिहार के गया जिले से उत्तरकाशी के किराणु गांव आया था.

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उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक के किराणु में हाल में आई प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) के बाद बचाव और राहत अभियान के दौरान एक युवक ने राज्य आपदा मोचन बल यानी State Disaster Response Force (SDRF) के एक जवान कुलदीप सिंह से अपना घर ढूंढने में मदद मांगी. कुलदीप ने उसे निराश नहीं किया. एसडीआरएफ के प्रवक्ता आलोक सिंह ने बताया कि 21 अगस्त को आराकोट गांव के पास हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की सीमा पर स्थित आपदाग्रस्त किराणु गांव में जब एसडीआरएफ के कुलदीप और अन्य लोगों की टीम बचाव (Rescue) व राहत कार्य में लगी थी, तभी  22 वर्षीय शिवाजन उनके संपर्क में आया और उनसे मदद मांगी. कुलदीप के हवाले से आलोक सिंह ने बताया कि मदद मांगते समय युवक की आंखों में आंसू थे और उसने कहा कि मुझे अपने घर जाना है. हालांकि, उसे यह नहीं पता कि उसे जाना कहां है.

एसडीआरएफ की प्रतीकात्मक तस्वीर


सेबों की पैकिंग का काम करने वालों के साथ आया था यहां 

कुलदीप ने जब विस्तृत जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि 13 वर्ष पूर्व शिवाजन बिहार के कुछ मजदूरों के साथ इस क्षेत्र में काम करने आया था और सेबों की पैकिंग का काम करता था. उसी दौरान एक दिन मजदूरों का मालिक से झगड़ा हो गया और वे उसे छोड़ कर रात को ही गांव से चले गए. शिवाजन की उम्र उस समय नौ वर्ष थी और उसे अपने गांव या पिता का नाम आदि कुछ भी याद नहीं था. सिर्फ इतनी जानकारी थी कि उसके घर के पास से हवाई जहाज उड़ा करते थे.

गया जिले के बड़ेजी गांव का रहने वाला है शिवाजन 

इसी आधार पर कुलदीप सिंह ने इंटरनेट पर बिहार के बड़े हवाई अड्डे के पास बसे गांवों को ढूंढना शुरू किया. उनकी मेहनत रंग लाई और शिवाजन के बताए गांव की तरह 'बड़ेजी' गांव गया हवाई अड्डे के करीब दिखा. इस पर कुलदीप ने निकटवर्ती पुलिस थाने मगध और मुफस्सिल थाने से संपर्क किया पर उधर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला. इसके बाद भी कुलदीप ने प्रयास करना नहीं छोड़ा और गया के एसपी को फोन करके घटना से अवगत कराया, जिसके बाद शिवाजन के परिवार की जानकारी मिल गई. शिवाजन की अपने परिवार से फोन पर बातें भी हुई हैं और अब 13 साल के बाद उसे अपना परिवार मिल गया है. शिवाजन से मिलने की आस छोड़ चुकी उसकी मां फूलादेवी भी उससे मिलने को आतुर हैं और अपने दूसरे बेटे रोहित के साथ देहरादून आ रही हैं. एसडीआरएफ के कमांडेंट ने कुलदीप को इस मेहनत पर शाबाशी देते हुए कुलदीप को 2500 रुपए इनाम की घोषणा की है.

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First published: August 26, 2019, 9:11 AM IST
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