उत्तराखंडः मसूरी, चकराता के रास्ते कैसे पता चलेंगे दून में... साइन बोर्डों पर तो चिपके हैं मेयर को बधाई संदेश

भाजपा कार्यकर्ताओं ने मेयर को जन्मदिन की बधाई देने के चक्कर में कानून की कोई  परवाह नहीं की.
भाजपा कार्यकर्ताओं ने मेयर को जन्मदिन की बधाई देने के चक्कर में कानून की कोई परवाह नहीं की.

स्थानीय नीलम कह रहे हैं जब साइन बोर्ड पर नेताओं के पोस्टर दिखेंगे और पता ही नहीं चलेगा कि जाना कहां है तो पर्यटक देवभूमि के बारे में क्या सोचेंगे?

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देहरादून. कहावत है जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का. ऐसा ही कुछ  देखने को मिल रहा है आजकल देहरादून की सड़कों पर. बीजेपी के अनुसार यहां विकास का ट्रिपल इंजन लगा हुआ है यानी कि केंद्र और राज्य में पार्टी की सरकार के साथ ही नगर निगम पर भी बीजेपी ही काबिज़ है. शहर में दो साल में विकास तो क्या हुआ यह दूनवासियों से पूछें लेकिन हां देहरादून के मेयर ने अपने तेवरों से सुर्खियां ज़रूर बटोरी हैं. अब उनके समर्थक भी ऐसे ही सुर्खियां बटोर रहे हैं. सुनील उनियाल गामा के समर्थकों उन्हें बधाई देने के लिए साइन बोर्डों पर ही पोस्टर ऐसे चिपका दिए हैं कि बाहर से आने वालों को पता ही न चले कि उन्हें जाना कहां है.

बदरंग कर दिया शहर 

प्लास्टिक के ख़िलाफ़ मानव श्रृंखला में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो, हाउस टैक्स माफ़ करवाने पहुंचे लोगों को धमकाने का वायरल वीडियो हो या लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते दिखना हो... देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा सही कामों से सुर्खियों में शायद ही रहते हैं. उनके समर्थक उन्हीं की दिखाई राह पर बढ़ते दिख रहे हैं.



देहरादून की सड़कें नेताओं को शुभकामनाओं देने के पोस्टर-बैनरों से अटी पड़ी हैं. आलम यह है कि दिशानिर्देश देने वाले साइन बोर्डों पर भी नेताओं को शुभकानाएं और बधाई संदेश के प्सोटर चिपका दिए गए हैं. देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा और मंत्री हरक सिंह रावत के जन्मदिन को शुभकामना के सन्देशों ने पूरा शहर को बदरंग कर दिया है.
स्थानीय लोग नाखुश 

दिशा निर्देश देने वाले साइन बोर्डों पर पोस्टर लगाना अवैध है लेकिन उत्साही भाजपा कार्यकर्ताओं को इससे क्या मतलब... दून में भाजपा का ट्रिपल इंजन कानून को रौंदता जो चल रहा है. भाजपा की तीन सरकारें बनवाने वाले लोग लेकिन इससे खुश नहीं दिख रहे.

स्थानीय नीलम बोहरा कहती हैं कि कोरोना महामारी के बाद बड़ी मुश्किल से पर्यटकों को राज्य में आने का मौका मिला है लेकिन जब साइन बोर्ड पर नेताओं को शुभकामनाएं के पोस्टर दिखेंगे और यह पता नहीं चलेगा कि जाना कहां है तो पर्यटक देवभूमि के बारे में क्या सोचेंगे?

बीजेपी नेताओं के सौ खून माफ़ 

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजकुमार कहते हैं कि यह सरकार की हनक है जिसके चलते बीजेपी के नेताओ ने शहर को बदरंग किया है. वह कहते हैं कि शहर के साइन बोर्ड पर तो पोस्टर-बैनर नहीं लगने चाहिए, यह तो क़ानून का उल्लंघन है, अपराध है लेकिन बीजेपी की सरकार में उसके नेताओ के सौ खून माफ़ हैं.

दून की स्वच्छता के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी देहरादून के नगरायुक्त विनय शंकर पाण्डेय भी मानते हैं कि यह गलत है. वह कहते हैं कि जल्द ही अभियान चलाकर इन सभी पोस्टरों को हटवाया जाएगा और साइन बोर्ड्स को साफ़ करवाया जाएगा.

भले ही नगर निगम अब कार्रवाई की दुहाई दे रहा है लेकिन यह सवाल उठना लाज़मी है जब सत्तारूढ़ पार्टी के नेता कानून को ताक पर रख ऐसे पोस्टरों से शहर को बदरंग करते हैं तो निगम उसी समय सही कार्रवाई क्यों नही करता. क्या अब नेताजी से अनुमति मिल गई है कि पार्टी खत्म हो गई है अब सफ़ाई कर सकते हो?
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