उत्तराखंड कांग्रेस लोकसभा चुनाव में हार की 18 जून को करेगी समीक्षा

उत्तराखंड के सभी पांच लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार क्यों पस्त हुए. इसकी समीक्षा 18 जून को देहरादून में कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में की जाएगी.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: June 17, 2019, 3:46 PM IST
उत्तराखंड कांग्रेस लोकसभा चुनाव में हार की 18 जून को करेगी समीक्षा
उत्तराखंड कांग्रेस के 2 दिग्गज हरीश रावत और प्रीतम सिंह
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: June 17, 2019, 3:46 PM IST
उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्ग्ज लोकसभा चुनाव में अपना दम नहीं दिखा पाए. 2 उम्मीदवार 2 लाख वोट से ज्यादा अंतर से हारे, वहीं 3 उम्मीदवार तो 3 लाख वोट से भी ज्यादा अंतर से चुनाव हार गए. आखिर पांच लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार क्यों पस्त हुए. इसकी समीक्षा 18 जून को देहरादून में कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में की जाएगी. मंगलवार को होने वाली बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह करेंगे. साथ ही नेता विपक्ष इंदिरा हृदयेश, पूर्व सीएम हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय मौजूद रहेंगे. चार बड़े चेहरों के अलावा बाकी 9 विधायक, 2017 में अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार, जिला अध्यक्ष और नगर अध्यक्ष भी इस बैठक में शामिल होंगे.

कार्यकर्ता असमंजस में, मानें किसे नेता
18 जून की बैठक में सबसे अहम मुद्दा लोकसभा चुनाव में हार का रहेगा कि आखिर पार्टी की बुरी हालत क्यों हुई. इस करारी हार के बाद कैसे फिर से पार्टी को तैयार किया जाए. उत्तराखंड में कांग्रेस की ज़मीन खिसकी हुई है. ऐसे में कार्यकर्ता को साथ जोड़ना प्रदेश कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है. लेकिन 4 अलग-अलग नेताओं में बंटी कांग्रेस के कार्यकर्ता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो नेता किसे माने ?

उत्तराखंड में 3 महीने बाद होने हैं पंचायत चुनाव

2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हौसले पस्त हैं. कार्यकर्ता भी मानते हैं कि बड़े नेताओं का ध्यान पार्टी को मजबूत करने से ज्यादा खुद की कुर्सी बचाने पर है. इसलिए सब नेता और उनके कार्यकर्ता बंटे हुए हैं. ऐसे में 18 जून की प्रदेश कांग्रेस की बैठक कोई बड़ा चमत्कार कर देगी, इसकी संभावना फिलहाल नहीं दिखती. उत्तराखंड में करीब 3 महीने बाद पंचायत चुनाव होने हैं. बूथ मैनेजमेंट की माहिर बीजेपी प्रधान के चुनाव को भी गंभीरता से ले रही है. वहीं कांग्रेस में पंचायत चुनाव को लेकर कोई हलचल नजर नहीं आ रही है. उत्तराखंड कांग्रेस किसी हार से सबक नहीं सीखती. पार्टी की हालत ऐसी है कि जितना ध्यान हार के बाद होने वाली बैठक पर दिया जाता है, उतना चुनाव से पहले नहीं दिया जाता.

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First published: June 17, 2019, 3:46 PM IST
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