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Uttarakhand: कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने टीम प्रीतम पर चलाया 'चाबुक', पूर्व अध्‍यक्ष ने कही ये बात

उत्तराखंड कांग्रेस में विवादों का दौर जारी है.

उत्तराखंड कांग्रेस में विवादों का दौर जारी है.

Uttarakhand Congress Crisis: गणेश गोदियाल (Ganesh Godiyal) के नये प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी उत्तराखंड कांग्रेस में विवादों को दौर थम नहीं रहा है. इस बार विवाद पूर्व अध्‍यक्ष प्रीतम सिंह (Pritam Singh) द्वारा ब्लॉक अध्यक्ष बनाए गये लोगों को हटाने के साथ शुरू हुआ है. हालांकि गोदियाल का कहना है कि किसी को हटाया नहीं जा रहा है बल्कि बदला जा रहा है.

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ऋषिकेश. उत्तराखंड कांग्रेस (Uttarakhand Congress Crisis) में विवाद थमने का नाम नहीं ने रहे हैं. ताजा मामला पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह (Pritam Singh) के फैसलों को पलटने से जुड़ा है. दरअसल, प्रीतम सिंह ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में जो ब्लॉक अध्यक्ष बनाए थे, उनको नये कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल (Ganesh Godiyal) ने कैंसिल कर दिया. हालांकि इस समय ऋषिकेश में कांग्रेस का मंथन शिविर चल रहा है.

ब्लॉक अध्यक्ष मामले पर प्रीतम सिंह ने कहा कि जब मैं अध्यक्ष बना, तो मैंने 2-3 साल तक किशोर उपाध्याय की टीम के साथ काम किया, लेकिन अब नये कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल मेरे साथ चले लोगों को हटाना चाहते हैं, ये उनका अधिकार है.

गणेश गोदियाल ने कही ये बात
वहीं, उत्तराखंड कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि किसी को हटाया नहीं जा रहा है बल्कि बदला जा रहा है. जबकि पौड़ी जिले के मामले में पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट मांगी गई है. कुल मिलाकर मंथन शिविर के बीच कांग्रेस के मौजूदा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष में विवाद शुरू हो गया है.

क्या नई कांग्रेस में थमेंगे विवाद?
उत्तराखंड कांग्रेस पर विवादों को थामना नये प्रदेश अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. बीते करीब 4 सालों में कांग्रेस अपने बड़े नेताओं के विवादों की वजह से बदनाम रही है. ऐसे में चुनाव से पहले विवादों को थामना कांग्रेस के बड़े नेताओं के लिए जरूरी है. वहीं, गणेश गोदियाल के ऊपर इस बात की भी जिम्मेदारी है कि वो सबको साथ कर चलें, लेकिन सीनियर लीडर इंद्रा हिरदेश के निधन के बाद कांग्रेस में फिलहाल दो बड़े गुट हैं. वो हैं हरीश रावत और प्रीतम सिंह गुट. बता दें कि इसी फॉर्मूले पर सबको साधते हुए प्रदेश अध्यक्ष के साथ 4 कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए, लेकिन ब्लॉक अध्यक्षों को हटाने एक नया विवाद खड़ा हो गया है.

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NCRB की रिपोर्ट में दावा: सीनियर सिटीजन के लिए सबसे सुरक्षित उत्तराखंड, MP को दूसरा स्थान

NCRB रिपोर्ट: सीनियर सिटीजन के लिए सबसे सुरक्षित है उत्तराखंड.

Uttarakhand News: NCRB की रिपोर्ट के अनुसार देश में सीनियर सिटीजन के साथ अपराध की बात करें तो महाराष्ट्र में 2020 में सर्वाधिक 4909 मामले दर्ज किए गए. मध्य प्रदेश 4602 मामलों के साथ दूसरे और गुजरात 2785 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है. उत्तराखंड में 4 मामले दर्ज किए गए.

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देहरादून. उत्तराखंड राज्य सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) के लिए एक सुरक्षित राज्य है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों से यह बात सामने आई है. अगर केवल साइबर अपराध के मामलों को छोड़ दिया जाए तो साल 2020 में अपराधिक मामलों में गिरावट देखने को मिली है.

कोरोना महामारी के चलते साल 2020 में पुरे देश में अपराध की घटनाओं में कुछ हद तक कमी देखी गई है. इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य लगातार तीसरे साल में भी सीनियर सिटीजन के रहने के लिए सुरक्षित राज्य बना हैं. इसका दावा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानि कि एनसीआरबी के द्वारा जारी किये आंकड़ों से किया गया है.

दरअसल, साल 2020 में देश में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े अपराध के 24,794 मामले दर्ज किये गये हैं. NCRB की रिपोर्ट के अनुसार देश में सीनियर सिटीजन के साथ अपराध की बात करें तो महाराष्ट्र में 2020 में सर्वाधिक 4909 मामले दर्ज किए गए. मध्य प्रदेश 4602 मामलों के साथ दूसरे और गुजरात 2785 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है. वरिष्ठ नागरिकों के साथ सबसे कम अपराध के हिसाब से देखें तो मणिपुर में सात, असम में छह, झारखंड में दो, मेघालय में तीन, सिक्किम में दो और उत्तराखंड में चार मामले दर्ज किए गए.

वहीं मामले में सीनियर सिटीजन नरेश दुआ का कहना है कि जिस प्रकार उत्तराखंड की आबो हवा है वह सीनियर सिटीजन के लिए अच्छी है. ये राज्य सीनियर सिटीजन के लिए सुरक्षित है. यहां पुलिस भी उनके साथ एक अच्छा बर्ताव करती है और किसी दिन थाने में भी जाना पड़े तो उनकी सिकायत को प्राथमिकता मिलती है.

प्रवक्ता पुलिस हेडक्वार्टर श्वेता चौबे का कहना है कि साल 2020 की रिपोर्ट में अगर अपराध को देखें तो उत्तराखंड में क्राइम घटा है और पुलिस का प्रदर्शन बढ़ा है. सीनियर सिटीजन में भी पुलिस ने अच्छा काम किया है, जिस पर सीनियर सिटीजन के मामलों में भी बहुत गिरावट आई है.

गोरखा लड़ाकों की अमर शौर्य गाथा, अंग्रेजों ने सम्मान में खुद बनवाया था 'खलंगा युद्ध स्मारक'

गोरखा सैनिकों ने खलंगा किले पर मोर्चा संभाला था.

गोरखा सैनिकों के पास अपनी पारंपरिक खुकुरी, तलवार और धनुष-बाण थे.

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अगर कोई ये कहता है कि वो मौत से नहीं डरता है, तो वह या तो झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है, इतना अटूट विश्वास था भारत के सबसे बड़े मिलिट्री कमांडर में से एक, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का‌ गोरखा रेजीमेंट के सैनिकों पर. अगर गोरखा सैनिकों के दमखम और युद्ध कौशल से आप वाकिफ होना चाहते हैं तो चले आइए देहरादून स्थित खलंगा युद्ध स्मारक पर, जो न केवल गोरखा लड़ाकों के पराक्रम की दास्तां को जगजाहिर करता है बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में गोरखा लड़ाकों के बलिदान को भी दर्शाता है.

खलंगा युद्ध की कहानी

देहरादून की खूबसूरत पहाड़ियों मेंं से एक खलंगा पहाड़ी पर 31 अक्टूबर, 1814 को मात्र 600 गोरखा सैनिकों ने खलंगा किले पर मोर्चा संभाला था. उनके सामने थी 3500 सैनिकों की संख्या वाली ब्रिटिश सेना, जिनके पास उस समय की आधुनिक बंदूकें और तोपे थीं. गोरखा सैनिकों के पास अपनी पारंपरिक खुकुरी, तलवार और धनुष-बाण थे. गोरखा सैनिकों ने खुकुरी के दम पर अकेले 1000 अंग्रेज सैनिकों को मार डाला. इस लड़ाई में कई अंग्रेज अफसर भी मारे गए, जिनमें मेजर जनरल रॉबर्ट रोलो जिलेप्सी भी थे. इस युद्ध में गोरखा सेना का नेतृत्व कर रहे बलभद्र कुंंवर भी शहीद हो गए. ब्रिटिश सेना द्वारा कलिंगा किले का पानी रोक दिया गया, जिस वजह से बलभद्र कुंंवर अपने 70 सैनिकों के साथ किले से बाहर आ गए और अंग्रेजों से युद्ध के दौरान वह शहीद हो गए. कुछ लोगों का मानना है कि बलभद्र कुंवर वहां से भाग गए थे और अफगानिस्तान में सैनिक के रूप में 1835 में हुए युद्ध में शहीद हुए.

अंग्रेजों ने किया बहादुरी का सम्‍मान

इस युद्ध में गोरखा सैनिकों की बहादुरी को अंग्रेजों ने भी पूरा सम्‍मान दिया. उन्‍होंने 1815 में गोरखा रेजिमेंट की स्‍थापना की. भारत के साथ ही इंग्‍लैंड में भी गोरखा रेजिमेंट का होना गोरखा सैनिकों के महत्‍व को बताता है. इसके साथ ही अंग्रेजों ने देहरादून की सहस्‍त्रधारा रोड पर खलंगा शहीदों की याद में एक स्‍मारक बनवाया.
हर साल यहां मेला लगता है, जिसमें हजारों लोग जुटते हैं. खलंगा स्मारक ऐतिहासिक धरोहर है. यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं. इसके साथ ही गोरखाओं की वीरता को याद करने के लिए शहर के गढ़ीकैंट क्षेत्र में मेला भी आयोजित किया जाता है.

BJP में जाने वाले MLA राजकुमार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, कांग्रेस ने स्पीकर से एक्शन लेने को कहा

पार्टी बदलने वाले पुरोला विधायक राजकुमार. (File Image)

Uttarakhand Polls 2022 : उत्तराखंड विधानसभा की 70 सीटों के लिए करीब पांच महीनों में चुनाव होने हैं और इससे पहले दल बदलने की राजनीति चर्चा में है. प्रदेश कांग्रेस ने अपने बागी विधायक के खिलाफ निलंबन और चुनाव प्रतिबंध की मांग की है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 13:37 IST
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देहरादून. उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों से पहले चल रही सरगर्मियों में हाल में बड़ी खबर तब आई थी, जब कांग्रेस के टिकट पर पुरोला से विधायक रहे राजकुमार ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. अब कांग्रेस ने राजकुमार के खिलाफ धावा बोलते हुए उनके निलंबन की मांग की है. उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष को लिखा कि बीजेपी में गए एमएलए राजकुमार की विधानसभा से सदस्यता सस्पेंड की जाए. कांग्रेस ने राजकुमार पर दलबदल के आरोप लगाते हुए यह मांग की है.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पत्र में लिखा गया, ‘राजकुमार वर्तमान में ऐसे विधायक हैं, जो कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. लेकिन उन्होंने सत्र के दौरान ही पार्टी बदलकर भाजपा जॉइन कर ली और वह भी कांग्रेस पार्टी व विधानसभा से औपचारिक तौर पर इस्तीफा दिये बगैर. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए न केवल विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की जाना चाहिए बल्कि उनके आगामी चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.’

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गौरतलब है कि उत्तराखंड में 2022 के शुरुआती महीनों में ही विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनके मद्देनज़र राज्य में चुनावी हलचलें ज़ोरों पर हैं. पिछले ही दिनों भाजपा के उत्तराखंड चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के उत्तराखंड दौरे से ऐन पहले राजकुमार ने भाजपा का दामन सीएम पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुए एक कार्यक्रम में थामा था. राजकुमार को प्रदेश कांग्रेस में सचिव का पद भी मिला हुआ था.

जौली ग्रांट एयरपोर्ट टर्मिनल उद्घाटन के लिए आएंगे सिंधिया, उत्तराखंड को उड़ानों और हेलीकॉप्टर यात्रा की सौगात

देहरादून हवाई अड्डा. (File Photo : ANI)

Uttarakhand Aviation : सीएम धामी के ऑनलाइन बैठक में केंद्रीय मंत्री ​ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उत्तराखंड को उड़ानों और सात शहरों के लिए हेलीकॉप्टर के ज़रिये उड़ानों के रूप में तमाम सौगातें दीं, जिनके लिए सीएम धामी ने आभार माना.

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देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये केंद्रीय एविएशन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मंगलवार को बातचीत की. इस मीटिंग में दोनों नेताओं ने कई अहम प्रोजेक्ट को लेकर बात की. इस बातचीत के दौरान यह तय हुआ कि सिंधिया 7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री धामी के साथ देहरादून के जौलीग्रांट में बने नये टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे. हेली समिट के दौरान देहरादून-पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर-देहरादून हवाई सेवा का फ्लैग ऑफ भी किया जाएगा. यह सेवा पवनहंस द्वारा दी जाएगी तो देहरादून-पिथौरागढ़ हेली सेवा को भी जल्द मंज़ूरी दिए जाने की बात कही गई.

सिंधिया ने कहा कि उत्तराखंड में उड़ानों के तहत देहरादून-श्रीनगर-देहरादून, देहरादून-गौचर-देहरादून, हल्द्वानी-हरिद्वार-हल्द्वानी, पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर, चिन्यालीसौड़-सहस्त्रधारा-चिन्यालीयौड़, गौचर-सहस्त्रधारा-गौचर, हल्द्वानी-धारचूला-हल्द्वानी तथा गौचर-सहस्त्रधारा-गौचर हेली सेवाओं को स्वीकृति प्रदान की गई. उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए जो 13 हेलीपोर्ट चिह्नित किए गए हैं, उनमें से 11 की डीपीआर तैयार हो चुकी है. मसूरी हेलीपोर्ट की डीपीआर भी जल्द तैयार होगी.

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सीएम धामी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बातचीत की.

सिंधिया ने कहा, वैट घटाया जाए
जौलीग्रांट एयरपोर्ट से शहरों की कनेक्टिविटी और बढ़ाई जाएगी, वहीं पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की कार्यवाही में और तेजी लाए जाने की बात भी हुई. सिंधिया ने सुझाव दिया कि उत्तराखंड में वैट के चार्जेज़ एटीएफ पर अधिक हैं, इन्हें कम किया जाए तो राज्य में एयर कनेक्टिविटी और तेज़ी से बढ़ेगी. राजस्व में भी वृद्धि होगी. सीएम धामी ने इन सौगातों के लिए सिंधिया का आभार माना.

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सीएम ने हेली सेवा को बताया मील का पत्थर
सीएम धामी ने देहरादून-पिथौरागढ़ हेली सेवा की स्वीकृति पर कहा कि यह सेवा सीमान्त क्षेत्र पिथौरागढ़ के विकास के लिए यह मील का पत्थर साबित होगी. इस हेली सेवा की मांग मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से पहले भी की थी. धामी ने बताया कि राज्य में चिह्नित 13 हेलीपोर्ट में से 8 के लिए टेंडर प्रक्रिया गतिमान है, जो 20 अक्टूबर तक पूरी हो जाएगी.

Char Dham Yatra : क्यों लौटाये जा रहे हैं कुछ श्रद्धालु? क्या किसी फर्जीवाड़े की चल रही है कोशिश?

उत्तराखंड स्थित चार धाम.

चार धाम यात्रा के संचालन को लेकर हुई पुलिस विभाग की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में एसएसपी देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, चमोली मौजूद रहे. इसमें श्रद्धालुओं को मैनेज करने के बारे में चर्चा हुई.

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देहरादून. राज्य में चार धाम यात्रा शुरू हो चुकी है और मंगलवार तक करीब साढ़े 5 हजार श्रद्धालुओं ने चार धामों के दर्शन किए. आंकड़ों की मानें तो सबसे ज्यादा यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे हैं. दूसरी तरफ, चार धाम यात्रा में कई ऐसे भी श्रद्धालु हैं, जिनको उत्तराखंड पुलिस बिना दर्शन के बैरंग वापस लौटा रही है. अस्ल में, चार धाम यात्रा सुचारू ढंग से और नियमों के हिसाब से चल सके, इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने भारी पुलिस बल तैनात किया है. चाक चौबंद व्यवस्था का आलम यह है कि सिर्फ केदारनाथ धाम पर ही सेक्टर अधिकारियों के साथ ही पुलिस विभाग ने 450 कर्मचारियों को यात्रा पड़ावों पर तैनात किया है.

क्यों लौटाए जा रहे हैं श्रद्धालु?
बड़ा कारण ये है कि चार धाम में आने वाले कुछ श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन स्मार्ट सिटी पोर्टल पर कर रहे हैं, जबकि सभी चार धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है. जिन यात्रियों ने ठीक ढंग से रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है, उन्हें पुलिस और प्रशासन की टीम लौटा रही है. वहीं, कुछ श्रद्धालुओं के पास फर्ज़ी रजिस्ट्रेशन होना भी पाया गया. एक खबर के मुताबिक केदारनाथ से 24 किमी दूर सोनप्रयाग के एक चेकपोस्ट पर 18 लोगों को फर्ज़ी रजिस्ट्रेशन पास के साथ पकड़ा गया और उन्हें धाम में एंट्री नहीं दी गई.

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गढ़वाल अंचल की डीआईजी नीरू गर्ग ने कहा कि यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु भूलवश स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाकर आ रहे हैं. यह अब मान्य नहीं है और जो यात्री देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नही कर रहा है उसको लौटाया जा रहा है. साथ ही, फर्जी rtpcr रिपोर्ट वाले लोगों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है.

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चार धाम यात्रा संचालन के संबंध में न्यूज़18 से डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने बातचीत की.

यात्रा के लिए खास नियम लागू हैं
रजिस्ट्रेशन के अलावा और भी नियम हाई कोर्ट की गाइडलाइन के तहत लागू किए गए हैं. 18 सितम्बर से शुरू हुई चारधाम यात्रा में सभी धामों में दर्शन के लिए सीमित संख्या रखी गई है. प्रति दिन बद्रीनाथ में 1200, केदारनाथ में 800, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री धाम में 400 यात्रियों को ही दर्शन की परमिशन है. रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार ने देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल से ई पास अनिवार्य किया है. श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन के साथ ही rtpcr की नेगेटिव रिपोर्ट या फिर कोविड की डबल डोज वैक्सीन का प्रमाण पत्र भी रखना हेागा.

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डीआईजी ने कहा कि निर्धारित संख्या से अधिक यात्रियों को चार धाम यात्रा में अनुमति न दी जाए. यात्रियों को जागरूक करने के लिए उन्होंने हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनि की रेती, लक्ष्मणझूला आदि स्थानों पर फ्लेक्स आदि के ज़रिये व्यापक प्रचार-प्रसार करने की बात भी कही. टिहरी में भद्रकाली, तपोवन, सुवाखोली, केम्पटी, पौ​ड़ी कोटद्वार, श्रीनगर में सघन चेकिंग की जा रही है. उन्होंने जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री में सीओ बड़कोट, गंगोत्री में सीओ उत्तरकाशी, केदारनाथ में सीओ गुप्तकाशी व बद्रीनाथ में सीओ चमोली को नोडल अधिकारी नियुक्त किया.

Uttarakhand Election 2022 का मैदान: PM मोदी, अमित शाह व राजनाथ सिंह संभालेंगे मोर्चा, जानिए पूरा शेड्यूल

पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह. (File Photo)

Assembly Election 2022 : भाजपा को उम्मीद है कि राष्ट्रीय स्तर के इन नेताओं के राज्य में जनसभा और दौरों से उसे विधानसभा चुनाव में खासा माइलेज मिलेगा जैसा कि 2017 में मिला था. वहीं, कांग्रेस ने इस बार नतीजे पलटने का दावा किया है.

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देहरादून. उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव का मैदान अक्टूबर के महीने में राष्ट्रीय स्तर का हो जाएगा क्योंकि केंद्र सरकार के दिग्गज राज्य में चुनावी मोर्चा संभालेंगे. अक्टूबर से भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के दौरों का दौर शुरू होगा, जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उत्तराखंड आकर चुनाव प्रचार करेंगे. फिलहाल प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के दौरे तय किए जा रहे हैं. इनके चुनाव प्रचार कार्यक्रम को लेकर स्थान, दिन और समय के बारे में अंतिम रूपरेखा बनाई जा रही है.

बताया जा रहा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 1 अक्टूबर को उत्तराखंड आने का प्रोग्राम है, तो 16-17 अक्टूबर को अमित शाह के देहरादून और हरिद्वार के दौरे की तैयारी है. वहीं अक्टूबर में केदारनाथ के दौरे के साथ ही पीएम के चुनावी दौरे की भी चर्चा है. प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री के दौरे में सबसे अहम गृह मंत्री अमित शाह का दौरा माना जा रहा है, जो हरिद्वार में संतों से मुलाकात के साथ चुनावी मूड भी भांपकर जाएंगे.

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अक्टूबर महीने में भाजपा के शीर्ष राष्ट्रीय नेता उत्तराखंड दौरे पर आएंगे.

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हालांकि कांग्रेस का कहना है कि ‘काठ की हांडी’ बार बार नहीं चढ़ती और 2017 जैसी बात इस बार नहीं होने वाली. वहीं, बीजेपी को यकीन है कि राष्ट्रीय नेताओं की रैली, जनसभा और मौजूदगी 2022 से पहले माहौल बनाने में मददगार होगी. साल 2017 में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में जनसभा की थी, जिसका फायदा बीजेपी को कई सीटों पर मिलने का दावा किया जाता है. इसी तरह के समीकरण भाजपा दोहरा सकेगी, ऐसी भाजपा को उम्मीद है.

हरीश रावत का दावा- CM केजरीवाल ने दिल्ली में साढ़े 7 साल में सिर्फ 6 हजार ही नौकरियां दीं

रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा था कि उत्तराखंड में अगर आप की सरकार बनती है, तो सभी बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाएगा. (फाइल फोटो)

हरीश रावत (Harish Rawat) ने आम आदमी पार्टी के नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘उत्तराखंड का बजट छोटा, वादा बड़ा. न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी.''

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 06:10 IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) ने उत्तराखंड में छह महीने में एक लाख लोगों को नौकरी देने की घोषणा करने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर मंगलवार को निशाना साधा.  उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में केजरीवाल ने साढ़े सात वर्षों के दौरान सिर्फ छह हजार लोगों को नौकरियां दी हैं. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘बड़ा दावा किया गया कि 1 साल में एक लाख नौकरियां दी जाएंगी. सवाल है साढ़े सात साल इनको दिल्ली में सरकार चलाते हो गये हैं. साढे़ सात साल में केवल 6 हजार से कुछ ज्यादा पदों पर सरकारी नौकरियां (Jobs) निकाली व भर्तियां की हैं, जबकि दिल्ली का बजट उत्तराखंड से तीन गुना ज्यादा है.’’

उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘उत्तराखंड का बजट छोटा, वादा बड़ा. न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी. केवल चुनाव में बने रहने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं.’’ पिछले दिनों केजरीवाल ने कहा था कि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर छह माह में एक लाख नौकरी दी जाएंगी और सरकारी एवं निजी क्षेत्र में 80 प्रतिशत नौकरियां उत्तराखंड के युवाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी.

अजय कोठियाल भी मौजूद थे
बता दें कि रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा था कि उत्तराखंड में अगर आप की सरकार बनती है, तो सभी बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाएगा. जब तक रोजगार नहीं मिलता, तब तक उन्हें सरकार की तरफ से 5000 रुपए महीने दिया जाएगा. AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए कहा कि पहाड़ में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार बड़ा मुद्दा है, जिसकी तलाश में उन्हें मैदानी इलाकों में आना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी ने फ्री बिजली देने का वादा किया, 24 घंटे बिजली का वादा किया तो उसे करके दिखाएंगे. हमारी पार्टी ने दिल्ली में यह करके दिखाया है, इसलिए हम उत्तराखंड में भी यूं ही घोषणा नहीं कर रहे हैं. केजरीवाल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान AAP के सीएम पद के उम्मीदवार अजय कोठियाल भी मौजूद थे.

 80 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिलेंगी
केजरीवाल ने उत्तराखंड में छायी बेरोजगारी को लेकर भी बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के कारण ही पलायन यहां की समस्या बन गई है. उन्होंने कहा कि इसके मद्देनजर ही उनकी पार्टी ने इस पर विचार मंथन किया. इसलिए मैं आज 6 घोषणाएं कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि पहली घोषणा यह कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी तो उत्तराखंड के सभी बेरोजगार युवा को रोजगार मुहैया कराया जाएगा. दूसरी यह कि जब तक उस युवा को रोजगार नहीं मिल जाता, तब तक उस परिवार के एक युवा को हर महीने 5000 रुपए दिए जाएंगे. तीसरा ऐलान यह है कि सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में 80 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिलेंगी.

(इनपुट- भाषा)

Teachers Jobs : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती पर लगाई रोक

उत्तराखंड सरकार ने कला वर्ग के  लिए बीएड की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी.

Teachers Jobs : उत्तराखंड सरकार ने 13 अक्टूबर 2020 को 1431 एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती निकाली थी. इसके विज्ञापन में 25 फरवरी 2021 को बदलाव कर दिया था. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि इस तरह भर्ती प्रक्रिया के बीच में बदलाव गलत है.

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नैनीताल. UKSSSC LT Grade Teacher Recruitment : उत्तराखंड में चल रही एलटी ग्रेड टीचर्स की भर्ती पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. अदालत ने यह रोक कला वर्ग की भर्ती प्रक्रिया पर लगाई है. जस्टिस रविन्द्र मैठाणी की कोर्ट ने सरकार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पूछा कि क्यों भर्ती के दौरान नियमों में बदलाव किया और ऐसा करने वाले आयोग के सचिव पर क्या कार्रवाई होगी, रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें.
दरअसल प्रकाश गौड़ समेत अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर किया है.

याचिकर्ताओं की ओर से कहा गया है कि राज्य सरकार ने एलटी वर्ग में 1431 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन 13 अक्टूबर 2020 को निकाला था. जिसमें बीएड की डिग्री अनिवार्य की गई थी. सरकार ने 25 फरवरी 2021 को नियमों में बदलाव कर आर्ट्स यानी कला वर्ग में बीएड की बाध्यता को खत्म कर दिया. याचिका में कहा गया है कि बिना बीएड के अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल करना गलत है. इस पर रोक लगाई जाए.

भर्ती के बीच में नियम बदलना गलत

याचिका में कहा है कि जिन नियमावली के आधार पर भर्ती शुरू की उसी आधार पर हो. बीच मे भर्ती को बदलना गलत है. लिहाजा, 12 मार्च 2021 का आदेश निरस्त किया जाए. हाई कोर्ट में केस लड़ रहे वकील अभिलाष नैनवाल ने बताया कि जो भी नियमावली में बदलाव सरकर ने किया है वह असंवैधानिक है क्योंकि भर्ती के दौरान नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है इस बात को कोर्ट ने माना. जिसके बाद कोर्ट ने भर्ती पर रोक लगाई है. अब सरकार के जवाब का इंतजार है.

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उत्तराखंड चुनावः AAP के वादों पर पूर्व CM के सलाहकार ने केजरीवाल से पूछा- क्या है आपका इकोनॉमिक प्लान

Uttarakhand Election: दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने आप की सरकार बनने पर फ्री बिजली, सबको रोजगार देने का वादा किया है. (फाइल फोटो.)

Uttarakhand Politics: इस बार उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी की ओर से की जाने वाली तमाम घोषणाओं ने यहां का सियासी मिजाज गर्मा दिया है. पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रहे रमेश भट्ट ने दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को घोषणाओं पर इंटरव्यू की चुनौती दी है.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 18:18 IST
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देहरादून. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 (Uttarakhand Assembly Election 2022) को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. उत्तराखंड की सियासी पिच पर अभी तक भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा चुनावी घमासान होता रहा है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की ओर से की जाने वाली तमाम घोषणाओं ने यहां का माहौल गर्माना शुरू किया है. इसका असर ये है कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रहे रमेश भट्ट ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को उनकी ही घोषणाओं पर चुनौती दे दी है. उन्होंने कहा है कि वह अरविंद केजरीवाल का साक्षात्कार कर यह जानना चाहते हैं कि जनता को फ्री सुविधाएं देने के पीछे केजरीवाल का इकोनॉमिक प्लान क्या है?

रमेश भट्ट पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के मीडिया सलाहकार रहे हैं. हाल ही में आप की ओर से उत्तराखंड में चुनाव के पहले कई वादे कर जनता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. इसी को लेकर रमेश भट्ट ने दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को खुला पत्र भेजकर चुनौती दी है. उन्होंने केजरीवाल से साक्षात्कार के लिए समय देने का आग्रह किया है.

हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक भट्ट ने केजरीवाल को भेजे पत्र में लिखा कि आपने उत्तराखंड के युवाओं के लिए कई घोषणाओं के साथ तमाम चुनावी वादे किए हैं. रमेश भट्ट ने लिखा- राज्य का निवासी होने के नाते मैं जानना चाहता हूं कि उत्तराखंड के लिए केजरीवाल का इकोनॉमिक प्लान क्या है? अपनी घोषणाओं को पूरा करने के लिए वे बजट की व्यवस्था कहां से करेंगे? एक आम उत्तराखंडी होने के नाते यह जानना मेरा हक है कि प्रदेश से किए जा रहे वादों के बारे में जानकारी लूं.

उन्होंने कहा कि केजरीवाल समय और स्थान तय करें ताकि मैं इन वादों पर उनका साक्षात्कार कर सकूं. आप की ओर से फिलहाल इस पत्र पर कोई जवाब तो नहीं आया है, लेकिन इसना तो तय है कि आम आदमी पार्टी की ओर से किए जाने वाले वादे यहां के जमे जमाए नेताओं को परेशान करने लगे हैं.

उत्तराखंड सरकार की वादाखिलाफी से गुस्साए बिजलीकर्मियों ने फिर बंद किया काम, 3 दिन परेशान होगी जनता

उत्तराखंड स्थित ऊर्जा भवन. (File Photo)

Uttarakhand News: लंबे समय से अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे ऊर्जा विभाग कर्मियों ने 'टूल एंड पेन डाउन' करते हुए कामबंदी कर दी है. आज से तीन दिनों तक जनता की बिजली संबंधी शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी.

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देहरादून. राज्य भर में आज मंगलवार से बिजली उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी. गुरुवार तक राज्य भर में अगर किसी भी इलाके में कोई बिजली फॉल्ट हुआ, तो दुरुस्तीकरण का काम नहीं होगा, नये मीटर लगने का काम बंद रहेगा, बिजली बिल बनने समेत कई तरह के काम प्रभावित रहेंगे.

इसका बड़ा कारण उत्तराखंड में तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों द्वारा मंगलवार से ‘टूल और पेन डाउन’ किया जाना है. उत्तराखंड में बिजली कर्मचारी अपनी मांगें पूरी न होने के चलते 21 से 23 सितंबर तक एक तरह से काम रोककर हड़ताल करने जा रहे हैं.

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14 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं ऊर्जाकर्मी

दरअसल ऊर्जाकर्मी लम्बे समय से अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन करते रहे हैं. इससे पहले ये कर्मचारी 26 जुलाई को भी हड़ताल पर गये थे, लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बाद मिले आश्वासनों के चलते कर्मचारियों ने सरकार को एक महीने का समय दिया था. महीना गुज़रने के बाद भी कर्मचारियों की मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो कर्मचारियों ने एक बार फिर नाराज़गी दिखाई है. अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर वे आन्दोलन कर रहे हैं.

3 दिन नहीं होगा कोई काम, अक्टूबर में हड़ताल की धमकी

इस कामबंदी के दौरान 21 से 23 तक कर्मचारी न तो दफ्तरों में पेन का प्रयोग करेंगे और न ही कोई टूल उठाएंगे. वहीं, जूनियर इंजीनियर संगठन के अध्यक्ष संदीप शर्मा का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को जल्द न मानी, तो कर्मचारी 6 अक्टूबर से हड़ताल पर रहेंगे. साथ ही, कहना है कि वेतन विसंगति, ग्रेड पे, समान कार्य समान वेतन, प्रमोशन जैसी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर ऊर्जा कर्मचारी संगठन लम्बे समय से आंदोलन कर रहा है. लेकिन अभी शासन और सरकार से वार्ता के बाद भी मांगों पर अमल न होने से अब कर्मचारी बेहद खफा नजर आ रहे हैं.

Uttarakhand Politics : कांग्रेस, BJP में 'अच्छे लोग' परेशान हैं, खुले हैं AAP के दरवाज़े : अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल. (File Photo)

उत्तराखंड पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि कई पार्टियों के नाराज़ नेता आम आदमी पार्टी में शामिल होना चाहें तो उनका स्वागत किया जाएगा. ​जानिए कैसे उत्तराखंड में दलबदल की राजनीति को हवा मिल रही है.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 13:45 IST
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देहरादून/हल्द्वानी. उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 के लिए पूरी शिद्दत से ताल ठोक चुकी आम आदमी पार्टी ने राज्य में विरोधी पार्टी के नेताओं के लिए एक विकल्प देने की राजनीति की है. हल्द्वानी में तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंचे आम आदमी पार्टी के समन्वयक अरविंद केजरीवाल ने बड़ा बयान देते हुए साफ इशारा कर दिया कि भाजपा और कांग्रेस के भीतर जो नाराज़ या बागी नेता हैं, उनके लिए आप में शामिल होने के रास्ते खुले हैं. केजरीवाल के इस ऐलान के बाद उत्तराखंड में दलबदल की सियासत तेज़ होने के आसार बढ़ गए हैं क्योंकि यह लहर तब चर्चा में आई थी, जब हाल में कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने भाजपा को जॉइन किया था.

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उत्तराखंड में तिरंगा यात्रा के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “भाजपा और कांग्रेस समेत कई पार्टियों में कुछ अच्छे लोग हैं, जो अपनी पार्टी के भीतर घुटन महसूस कर रहे हैं. ऐसे अच्छे लोगों का स्वागत करने के लिए आम आदमी पार्टी पूरी तरह तैयार है.” खबरों के मुताबिक केजरीवाल के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में एक नई करवट देखी जा सकती है.

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हल्द्वानी में आम आदमी पार्टी की तिरंगा यात्रा रैली की तस्वीर आप के विधायक ने ट्वीट की.

दलबदल को लेकर मची हुई है खलबली
उत्तराखंड की सियासत में दल बदलने के मामले में अगर 2017 से ही स्थिति देखी जाए, तो कई बातें साफ होती हैं. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल जैसे राज्य के कैबिनेट मंत्री पहले कांग्रेस में थे. पिछले ही दिनों कांग्रेस के पुरोला विधायक राजकुमार ने भाजपा का दामन थामा है. ऐसे नेताओं की फेहरिस्त राज्य में बहुत लंबी है, जिन्होंने पार्टियां बदली हैं और खुलकर ज़ाहिर किया है कि वो अपने साथ पार्टी में हो रहे बर्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. पिछले ही दिनों हरक सिंह रावत और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच विवाद की स्थिति बन चुकी है.

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प्रदेश की सियासत में आलम यह है कि सांसद अनिल बलूनी ने पिछले दिनों एक ट्वीट में लिखा था कि कांग्रेस के कुछ और बड़े नाम भाजपा में शामिल हो सकते हैं. वहीं, किसी का नाम लिये बगैर कांग्रेस के उत्तराखंड चुनाव प्रभारी हरीश रावत ने भी कहा था कि कुछ बीजेपी नेता उनके संपर्क में हैं, जो पार्टी बदलना चाहते हैं. इन हालात में केजरीवाल ने एक नई राजनीति का साफ संकेत दे दिया है.

उत्तराखंड में और दो हफ्ते बढ़ा कोविड कर्फ्यू, कैसा रहेगा 5 अक्टूबर तक माहौल, जानिए पूरे डिटेल्स

उत्तराखंड में कोविड कर्फ्यू 5 अक्टूबर तक बढ़ा. (File Photo)

Covid Curfew in Uttarakhand : उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के ज़ोर शोर से शुरू होने के बाद सरकार ने 5 अक्टूबर की सुबह तक के लिए कोरोना कर्फ्यू को बढ़ाते हुए बताया कि किस तरह प्रतिबंध और छूट जारी रहेगी.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 11:19 IST
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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में कोविड कर्फ्यू को दो हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया. सोमवार को दिशानिर्देश जारी करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि मंगलवार सुबह 6 बजे से 5 अक्टूबर की सुबह 6 बजे तक के लिए कोरोना कर्फ्यू को बढ़ाया गया है. इधर बीते शनिवार से शुरू हुई चार धाम यात्रा में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं को पहुंचना शुरू हो चुका है. एक खबर की मानें तो चार धाम यात्रा के सिलसिले में ही हरिद्वार में रोज़ाना 5000 से ज़्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. इस बीच कोविड कर्फ्यू को लेकर राज्य सरकार ने किस तरह निर्देश जारी किए हैं, जानिए.

क्या है कर्फ्यू बढ़ाए जाने का मतलब?
दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिए गए कोविड कर्फ्यू का अर्थ यही है कि पिछले आदेश को इस अवधि तक के लिए जारी रखा जाएगा. पिछले आदेश के तहत वैवाहिक समारोहों को इजाज़त मिली थी, जो कार्यक्रम स्थल की क्षमता से 50 फीसदी मेहमानों की मौजूदगी में किए जा सकते हैं. वहीं, कार्यक्रमों या राज्य में आने वाले लोगों को अगर वैक्सीन के दोनों डोज़ लग चुके हैं तो उन्हें निगेटिव रिपोर्ट दिखाने की ज़रूरत भी नहीं होगी. सरकारी दफ्तर 100 फीसदी क्षमता के साथ खुल चुके हैं. अन्य स्थान भी पहले के आदेश के मुताबिक ही जारी रहेंगे.

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उत्तराखंड में कोविड कर्फ्यू के संबंध में एएनआई ने ट्वीट किया.

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धूमधाम से शुरू हो चुकी चार धाम यात्रा
चार धाम यात्रा के लिए देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन चल रहा है. खबरों में कहा जा रहा है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ सभी चारों धामों पर यात्री बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. पिछले करीब एक साल से इस यात्रा पर रोक लगी हुई थी, जिसे पिछले हफ्ते हाई कोर्ट ने खत्म करते हुए इस यात्रा को मंज़ूरी दी थी. इसके बाद से यहां के स्थानीय लोगों ने रोज़गार को लेकर राहत महसूस की.

UKPSC Recruitment 2021: सहायक इंजीनियर के पदों पर नौकरियां, आवेदन का अंतिम मौका आज

UKPSC Recruitment 2021:सहायक इंजीनियरों के पदों पर आवेदन की अंतिम तिथि आज है.

UKPSC AE Recruitment 2021: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने सहायक इंजीनियरों के पदों पर भर्तियां निकाली हैं. इन पदों के लिए अभ्यर्थी 21 सितंबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा और इंंटरव्यू के जरिए किया जाएगा.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 09:51 IST
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नई दिल्ली (UKPSC AE Recruitment 2021).  उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से सहायक इंजीनियर के पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. इन पदों के लिए 1 सितंबर 2021 से आवेदन की प्रक्रिया जारी. आवेदन की अंतिम तिथि आज है. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक इन पदों के लिए आवेदन नहीं किया है. वह आज यानी 21 सितंबर 2021 रात 12 बजे से पहले तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.gov.in के जरिए आवेदन कर सकते हैं.

कुल 154 रिक्त पदों पर भर्तियां की जाएगी. जारी नोटिफिकेशन के अनुसार ग्रामीण निर्माण विभाग, सिचाईं विभाग, लघु सिचाईं विभाग, लोक निर्माण विभाग, पेय जल एवं स्वच्छता विभाग और ऊर्चा विभाग में सहायक इंजीनियर के पदों पर भर्तियां की जाएगी.

UKPSC AE Recruitment 2021: शैक्षणिक योग्यता
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधि स्ट्रीम में इंजीनियरिंग की डिग्री होनी चाहिए.

UKPSC AE Recruitment 2021: आयु सीमा
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी की उम्र 21 वर्ष से 42 वर्ष के बीच होनी चाहिए. एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट दी गई है.

UKPSC AE Recruitment 2021:चयन प्रक्रिया
इन पदों पर अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिया बुलाया जाएगा. अंतिम चयन इंटरव्यू में प्राप्त नंबरों के जरिए किया जाएगा.

आवेदन फीस
सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 276.55 रुपए और एससी व एसटी वर्ग के लिए 126.55 रुपए आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है.

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UKPSC AE Recruitment 2021:इन तिथियों का रखें ध्यान
आवेदन शुरू होने की तिथि –  1 सितंबर 2021
आवेदन की अंतिम तिथि – 21 सितंबर 2021
आधिकारिक वेबसाइट – ukpsc.gov.in

यहां देखें नोटिफिकेशन

Schools Reopening : पहली से पांचवी के लिए उत्तराखंड में आज से खुलेंगे स्कूल, ये होंगे नियम और शर्तें

उत्तराखंड में आज से शुरू होंगी प्राथमिक कक्षाएं.

महीनों बाद प्राइमरी के बच्चे स्कूल का मुंह देखने जा रहे हैं तो उत्तराखंड के शिक्षा विभाग ने दिशानिर्देशों में बताया है कि क्लासेज़ कैसे लगेंगी, बच्चे स्कूल कैसे पहुंचेंगे, परिसर और मेन गेट पर किन बातों का ध्यान रखना होगा.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 09:22 IST
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देहरादून. उत्तराखंड में मंगलवार से सभी स्कूलों में पहली से पांचवी तक की कक्षाओं को खुलने की अनुमति मिली है. राज्य सरकार के निर्देशों के तहत आज से बच्चे स्कूल पहुंचेंगे, हालांकि स्कूलों में कोविड संक्रमण को लेकर गाइडलाइन का पालन करवाया जाना अनिवार्य है. पिछले करीब डेढ़ साल से कोरोना संक्रमण के चलते बच्चे स्कूल न जाकर घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे. महीनों बाद स्कूल लौटे बच्चों की कक्षाओं को लेकर राज्य सरकार ने तमाम नियम व शर्तें जारी कर दी हैं और बताया है कि किस तरह कक्षाओं का संचालन हो सकेगा. जानिए कैसे शुरू हो रहे हैं राज्य के प्राइमरी स्कूल और कक्षाएं.

एक दिन में तीन घंटे की क्लास
राज्य के शिक्षा विभाग ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसके तहत स्कूलों को मानक आचार संहिता का पालन करने के लिए कहा गया है. पहली से पांचवी तक के लिए कहा गया है कि रोज़ तीन घंटे की ऑफलाइन क्लासेज़ होंगी और बच्चों को खाना घर से नहीं लाना होगा. इसके साथ ही, बच्चों के स्कूल आने के साथ ही यह​ विकल्प दिया गया है कि वो चाहें तो ऑनलाइन पढ़ाई जारी रख सकते हैं. स्कूल आकर ऑफलाइन क्लास अटेंड करने के लिए अभिभावकों की सहमति का पत्र ज़रूरी होगा.

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स्कूल में एंट्री और एग्ज़िट के लिए भी नियम
बच्चों के स्कूल में आने और जाने के समय के हिसाब से विभिन्न कक्षाओं के लिए ​अलग समय तय करने को कहा गया है, वहीं स्कूल में प्रवेश और स्कूल से जाने के दौरान मेन गेट पर सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य होगी. निर्देशों में कहा गया है कि अगर कोई बच्चा किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ज़रिये स्कूल पहुंचता है तो स्कूल की ज़िम्मेदारी होगी कि उस वाहन की साफ सफाई का ध्यान रखा जाए. यही नहीं, पूरे स्कूल परिसर और कक्षाओं में भी सैनिटैशन के लिए शिक्षा विभाग ने स्कूलों को हिदायतें दी हैं.

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स्कूलों से कहा गया है कि एक नोडल अफसर बनाया जाए, जो सुनिश्चित करवाए कि शासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य ढंग से करवाया जा रहा है. गौरतलब है कि इससे पहले 1 अगस्त से उत्तराखंड में कक्षा छठवीं से 12वीं तक के लिए स्कूल खोले गए थे.

Dehradun: आखिर उत्तराखंड में सियासी दलों को क्यों सताने लगी है बेरोजगारों की चिंता ? ये रही वजह

प्रतीकात्मक तस्वीर (News18 creative by Mir Suhail)

Uttarakhand Unemployment: उत्तराखंड में अचानक सियासी दलों को बेरोजगारों की चिंता सताने लगी है. वे चुनाव के पहले नौकरी के वादे कर रहे हैं. इसी महीने सांख्यिकी मंत्रालय की नेशनल सेंपल सर्वे रिपोर्ट जारी हुई. उसके मुताबिक उत्तराखंड देश के उन दस राज्यों में शामिल है, जहां बेरोजगारी की दर 11 फीसदी से अधिक पहुंच गई है.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेरोजगारी का मुद्दा खूब छाया हुआ है. जुलाई में जब विधायक पुष्कर धामी ने बतौर सीएम राज्य की कमान संभाली तो चंद घण्टों के भीतर ही उन्होंने विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े करीब 24 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की. इसी 19 सितम्बर को सीएम ने बताया कि करीब 6,000 पदों के लिए भर्ती का अधियाचन भेजा जा चुका है. अगले एक दो महीने में ये संख्या दुगुनी हो जाएगी.

इधर, हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने राज्य में बढ़ती बेरोजगारी पर तंज कसा और घोषणा की कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. इसके बाद आम आदमी पार्टी भी मैदान में कूद पड़ी. रविवार को दिल्ली से उत्तराखंड पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने तो इससे भी दो कदम आगे बढ़कर घोषणा कर डाली कि अगर आप सत्ता में आई तो छह महीने के भीतर एक लाख नौकरियों का सृजन किया जाएगा. नौकरी लगने तक बेरोजगारों को पांच हजार रुपए प्रति माह बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा.

अब सवाल उठता है कि अचानक सियासी पार्टियों को बेरोजगारों की चिंता क्यों सताने लगी है. इसके पीछे भी एक बड़ा गणित है. इससे पहले जान लेते हैं राज्य में बेरोजगारी की स्थिति क्या है. इसी महीने जारी सांख्यिकी मंत्रालय की नेशनल सेंपल सर्वे रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड देश के उन दस राज्यों में शामिल है, जहां बेरोजगारी की दर 11 फीसदी से अधिक पहुंच गई है. 15 से 29 ऐज ग्रुप में तो बेरोजगारी का ये आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भी नौ गुना अधिक बढ़कर 27 फीसदी पहुंच गया. इस एज ग्रुप में बेरोजगारी नेशनल औसत 3.2 फीसदी है. इन आंकड़ों ने सियासी दलों को जैसे संजीवनी दे दी है.

दरअसल, उत्तराखंड में मौजूद करीब अस्सी लाख वोटर्स में करीब 57 फीसदी वोटर्स युवा वर्ग से हैं. करीब 44 लाख के आसपास युवा वोटर्स का आंकड़ा है. ऐसे में इतने बड़े वोट बैंक को कोई भी नजरअंदाज नहीं करना चाहता. यही कारण है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अचानक बेरोजगार और बेरोजगारी सियासत का केंद्र बन गया.

UKSSSC Exam : सचिवालय सिक्योरिटी गार्ड भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, जानिए क्या होंगे क्वॉलिफाइंग मार्क्स

UKSSSC Exam : सचिवालय सिक्योरिटी गार्ड पद के लिए आवेदन फरवरी में हुए थे.

UKSSSC Exam : उत्तराखंड सचिवालय सिक्योरिटी गार्ड भर्ती परीक्षा 26 सितंबर को आयोजित की जाएगी. परीक्षा का आयोजन कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए होगा.

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  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 22:05 IST
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नई दिल्ली. UKSSSC Exam : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने सचिवालय सुरक्षा संवर्ग (सिक्योरिटी गार्ड) भर्ती परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. इसके लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी अपने एडमिट कार्ड यूकेएसएसएससी की वेबसाइट uksssc.in पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं. यूकेएसएसएससी ने एडमिट कार्ड अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं. अभ्यर्थियों के लिए सलाह है कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उस पर दी गई जानकारियां जांच लें. साथ ही दिए गए निर्देशों को भी अच्छी तरह पढ़ लें.

उत्तराखंड सचिवालय सुरक्षा संवर्ग भर्ती परीक्षा का आयोजन 26 सितंबर 2021 को किया जाएगा. इसके लिए आवेदन प्रक्रिया फरवरी में हुई थी. उत्तराखंड सचिवालय सुरक्षा संवर्ग के अंतर्गत सिक्योरिटी गार्ड के 33 पदों पर भर्ती होनी है. सिक्योरिटी गार्ड पद के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 10वीं पास मांगी गई थी.

ऐसे डाउनलोड करें सचिवालय सिक्योरिटी गार्ड भर्ती परीखा का एडमिट कार्ड

– सबसे पहले उत्तराखंड एसएसएससी की वेबसाइट uksssc.in पर जाएं
– अब पदनाम-रक्षक(सचिवालय सुरक्षा संवर्ग)के प्रवेश पत्र(ADMIT CARD) हेतु क्लिक करें’ लिंक पर क्लिक करें
– अब एक नया विंडो ओपन होगा
– यहां अपना मोबाइल नंबर या नाम और जन्मतिथि एंटर करें
– अब एडमिट कार्ड ओपन हो जाएगा, इसे प्रिंट कर लें

सिक्योरिटी गार्ड भर्ती परीक्षा में क्वॉलिफाइंग मार्क्स

जनरल- 45%
ओबीसी – 45%
एससी – 35%
एसटी- 35%

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ऑटो में डॉक्टर्स लगा रहे कोरोना का टीका, देहरादून में तेज़ हुआ टीकाकरण अभियान!

कोरोना संक्रमण से जंग में एकमात्र हथियार वैक्सीनेशन द्वारा  लड़ रही तमाम सरकारें

देहरादून में ऑटो से टीका लगाने के लिए सीएमओ ने जनपद में आठ टीमें बनाई है। जो विभिन्न इलाकों में जाकर ऑन द स्पॉट टीका लगा रही है

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कोरोना संक्रमण से जंग में एकमात्र हथियार वैक्सीनेशन द्वारा  लड़ रही तमाम सरकारें व प्रशाशन अब नए तरह के प्रयोगों को अख्तियार कर संक्रमण को देश में जड़ से मिटाने में लगी हुई है तो वहीं अब देहरादून स्वास्थ्य विभाग ने भी राजधानी के विभिन्न जगहों में ऑटो वैक्सीनशन ड्राइव शुरू कर टीकाकरण अभियान को अधिक से अधिक जनता तक पहुचाने का बीड़ा उठा लिया है.

बतादे देहरादून में ऑटो से टीका लगाने के लिए सीएमओ ने जनपद में आठ टीमें बनाई है। जो विभिन्न इलाकों में जाकर ऑन द स्पॉट टीका लगा रही है जिस तरह आप मोबाइल स्क्रीन में देख सकते है. वही जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. दिनेश चौहान खुद इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। तमाम जगहों पर  आज सैकड़ों लोगों को रोककर टीका लगाया गया।  साथ ही अफसर एवं डाक्टरों ने लोगों को जागरूक भी किया। इस टीकाकरण अभियान के द्वारा डॉक्टर्स उन नागरिकों तक पहुँच रहे है जो लोग किन्ही वजहों के कारण वैक्सीनेशन से अब तक वंचित है.

डॉ दिनेश चौहान ने बताया \”हमारा लक्ष्य देहरादून की पूरी आबादी को जल्द से जल्द वेक्सीनेट करने का हैं ताकि जनपद वासी संक्रमण व तीसरी लहर से सुरक्षित रहे. हमारे इस ऑटो वैक्सीनेशन ड्राइव में गठित टीमें प्रतिदिन विभिन जगहों पर वैक्सीनेशन ड्राइव चला रही है जिनमे लोग भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे है जो किन्ही करणों से अब तक छूटे हुए है . नागरिकों में प्रसन्नता है कि वैक्सीनेशन अभियान ऑटो के माध्यम से उनके द्वार तक स्वयं चलकर आया है और हम भी अन्य नागरिको की तरह अब सुरक्षित है\”

रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए यहां आए थे भगवान लक्ष्मण!

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून के 4 सिद्ध मंदिरों में से एक है.

देहरादून का लक्ष्मण सिद्ध मंदिर ऋषि दत्तात्रेय के चौरासी सिद्धों में से एक है.

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हिंदू धार्मिक मान्यताओं के लिए देवभूमि उत्तराखंड रहस्यमयी पौराणिक कथाओं के लिए भी विख्यात है. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि यहां के कण-कण में ईश्वर का वास है. राजधानी देहरादून में 4 सिद्ध मंदिर या पीठ हैं और यह शहर के 4 कोनों में स्थापित हैं. देहरादून के 4 सिद्धों में लक्ष्मण सिद्ध, कालू सिद्ध, मानक सिद्ध और मांडु सिद्ध हैं.

देहरादून का लक्ष्मण सिद्ध मंदिर ऋषि दत्तात्रेय के चौरासी सिद्धों में से एक है. लोक मान्यता के अनुसार, रावण का वध करने के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान पर तपस्या की थी.

एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय ने लोककल्याण के लिए 84 शिष्य बनाए थे और उन्हें अपनी सभी शक्तियां प्रदान की थीं. कालांतर में ये चौरासी शिष्य 84 सिद्ध के नाम से जाने गए और इनके समाधि स्थल सिद्धपीठ या सिद्ध मंदिर बन गए. इन्हीं 84 सिद्धों में देहरादून के चार सिद्ध भी हैं. इन चारों में लक्ष्मण बाबा भी हैं, इसलिए इस मंदिर का नाम लक्ष्मण सिद्धपीठ मंदिर रखा गया क्योंकि उन्होंने यहीं पर समाधि ली थी.

तपस्या स्थल पर प्राचीन काल से निरंतर अखंड धूनी जल रही है. बताया जाता है कि इस अखंड धुनी में कभी मुंह से फूंक नहीं मारी जाती है. यहां पर बनाए गए भोजन का ही भोग मंदिर में लगाया जाता है. धुनी की राख को प्रसाद के तौर पर श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है.

इस मंदिर में भगवान को गुड़, घी, दही आदि भेंट के रूप में चढ़ाया जाता है क्योंकि पुराने समय में गुड़ एवं अन्य सामग्री मिठाई होती थी, इसलिए प्राचीन काल से गुड़ का प्रसाद इस मंदिर में चढ़ाया जाता है.

देहरादून : मंडुआ से बना रहे मोमो-बर्गर, युवाओं को खूब पसंद आ रहा पहाड़ का स्वाद

रेस्टोरेंट में ज्यादातर फास्टफूड मंडुआ से बनाए जा रहे हैं.

सुभाष रतूड़ी मोमो ही नहीं बल्कि कई तरह के फास्टफूड मंडुआ से बना रहे हैं.

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फास्टफूड की बात हो और मोमो, बर्गर, पिज्जा आदि का जिक्र न हो तो यह तो सरासर बेईमानी होगा. हालांकि तमाम डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट अक्सर जंक फूड से बचने की सलाह देते हैं मगर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंडुआ (Mandua Fast food Dehradun) से बने फास्टफूड हर किसी की जुबान पर छाए हुए हैं.

देहरादून में अब आपको पौष्टिक फास्टफूड का भी विकल्प मिल गया है. यह फास्टफूड मैदे से नहीं बल्कि मंडुआ से बने हैं. शेफ सुभाष रतूड़ी मोमो ही नहीं बल्कि कई तरह के फास्टफूड मंडुआ से बना रहे हैं. लोगों द्वारा सभी लजीज पकवानों को काफी पसंद किया जा रहा है.

सुभाष रतूड़ी ने कहा कि उनका मकसद न केवल स्वरोजगार के जरिए अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करना है बल्कि मंडुआ का फास्टफूड में इस्तेमाल कर युवा पीढ़ी तक अपनी संस्कृति को भी आगे ले जाना है. वह चाहते हैं कि अन्य राज्यों के लोग भी पहाड़ी उत्पादों को जानें, जिससे उत्तराखंड की पहचान और मजबूत हो.

बता दें कि सुभाष न केवल मोमो बल्कि अपने रेस्टोरेंट में बनने वाले बर्गर, चाय, कॉफी आदि सभी प्रोडक्ट में मंडुआ का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इन सभी फास्टफूड का स्वाद दोगुना हो जाता है.

उत्तराखंड चुनावः जांच-परख कर किसी को बनाएं कांग्रेस का मेंबर, सदस्यता अभियान में 'घुसपैठ' से डरी पार्टी

Uttarakhand Assembly Election 2022: विधानसभा चुनाव से पहले सदस्यता अभियान चला रही कांग्रेस को पार्टी में विपक्षी एजेंटों की घुसपैठ का डर.

Uttarakhand Election 2022: विधानसभा चुनाव से पहले सदस्यता अभियान चला रही उत्तराखंड कांग्रेस को पार्टी में विपक्षियों के घुसपैठ करने का डर है. सदस्यता अभियान समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भंडारी ने कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों को सदस्य बनाने में सतर्कता बरतने की नसीहत दी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 12:12 IST
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देहरादून. उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं. इसके मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सरीखे बड़े दल समेत छोटी पार्टियां भी सक्रिय हैं. प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस अगले साल सत्ता परिवर्तन के दावों के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर हमले के साथ-साथ कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत कर रही है. इसके लिए राज्य में जोर-शोर से सदस्यता अभियान चल रहा है. लेकिन इस अभियान के दौरान कहीं कोई विपक्षी दल का समर्थक या कार्यकर्ता, पार्टी में घुसपैठ न कर ले, कांग्रेस को इसका भी डर सता रहा है. इसलिए बीते दिनों देहरादून महानगर कमेटी की बैठक में कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की नसीहत दी गई.

उत्तराखंड कांग्रेस के सदस्यता अभियान समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भंडारी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को विपक्षी दलों के एजेंटों से बचने की नसीहत दी. देहरादून कांग्रेस कमेटी की बैठक के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जिस किसी शख्स को भी पार्टी का मेंबर बनाएं, उसका फोटो और मोबाइल नंबर जरूर लें. सदस्यता पर्ची पर उस शख्स की तस्वीर और नंबर दर्ज करें, ताकि कांग्रेस में कोई भितरघात नहीं कर सके. देहरादून से प्रकाशित दैनिक अखबार हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, भंडारी ने इस बैठक में शामिल कांग्रेस के सभी पार्षदों, पूर्व प्रत्याशियों, ब्लॉक अध्यक्षों से कहा कि जिन लोगों की कांग्रेस में निष्ठा हो, उन्हें ही पार्टी का सदस्य बनाएं.

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से कई महीने पहले से ही उत्तराखंड में सियासत चरम पर है. खासकर, इस बार चुनाव मैदान में आम आदमी पार्टी के आने और उसके ताबड़तोड़ घोषणाएं करने से इस माहौल को और गर्माहट मिल रही है. यही वजह है कि प्रदेश में सक्रिय दोनों पुराने दल कांग्रेस और बीजेपी, लगातार अपनी जमीन और संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं को उम्मीद है कि अगले साल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो सकता है, जिसके लिए पार्टी जी-जान से प्रदेशभर में अपनी पकड़ को और मजबूत कर रही है. इस अभियान में विपक्षी दल घुसपैठ न करें, इसलिए ही सदस्यता अभियान समिति के अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जांच-परख कर लोगों को कांग्रेस में शामिल करने और भितरघात से बचने की सलाह दी है.

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