उत्तराखंड: मुनस्यारी में देश का पहला ‘कवक उद्यान’ विकसित, यहां 80 से अधिक हैं प्रजातियां
Dehradun News in Hindi

उत्तराखंड: मुनस्यारी में देश का पहला ‘कवक उद्यान’ विकसित, यहां 80 से अधिक हैं प्रजातियां
उन्होंने कहा कि लगभग दो एकड़ भूमि पर फैले इस उद्यान में कवक की 80 से अधिक प्रजातियां हैं. (सांकेतिक फोटो)

दुनिया भर में कवक की 20,000 से ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं. भारत (India) में कवक की 2714 प्रजाति है.

  • Share this:
देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) के कुमाऊं क्षेत्र (Kumaon Region) के नयनाभिराम पर्वतीय इलाके मुनस्यारी में राज्य के वन विभाग के अनुसंधान प्रकोष्ठ ने देश का पहला ‘कवक उद्यान’ (Fungi Garden) विकसित किया है. कवक (लाइकेन) एक प्रकार की वनस्पति है. यह पेड़ों के तनों, दीवारों, चट्टानों और मिट्टी पर पनपता है. मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान प्रकोष्ठ) संजीव चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में इस उद्यान को विकसित किया गया है.

 कवक को स्थानीय भाषा में 'झूला' भी कहा जाता है
चतुर्वेदी ने रविवार को बताया कि बर्फ से ढंकी चोटियों से घिरे मुनस्यारी ( Munsiyari) को उद्यान विकसित करने के लिये इसलिये चुना गया क्योंकि इसे कवक के पनपने के लिये अनुकूल माना जाता है. कवक को स्थानीय भाषा में 'झूला' या 'पत्थर के फूल' भी कहा जाता है.

दो एकड़ भूमि पर फैले इस उद्यान में कवक की 80 से अधिक प्रजातियां हैं
उन्होंने कहा कि लगभग दो एकड़ भूमि पर फैले इस उद्यान में कवक की 80 से अधिक प्रजातियां हैं. इन्हें मशहूर हैदराबादी बिरयानी में भी डाला जाता है. यह पकवान को स्वादिष्ट बनाता है और इससे सुगंध भी आती है. उद्यान का शनिवार को उद्घाटन कर इसे आम लोगों के लिये खोल दिया गया है.



दुनिया भर में कवक की 20,000 से ज्यादा प्रजाति पायी जाती है
दुनिया भर में कवक की 20,000 से ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं. भारत में कवक की 2714 प्रजाति है. उत्तराखंड में इसकी करीब 600 प्रजाति है, जो कि मुनस्यारी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, रामनगर, और नैनीताल में पायी जाती है .
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading