उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री की पेरेंट्स को दो टूक... स्कूल की ट्यूशन फ़ीस तो देनी ही पड़ेगी

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब ऑनलाइन क्लास और फ़ीस की स्थिति स्पष्ट है तो विरोध नहीं होना चाहिए.
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब ऑनलाइन क्लास और फ़ीस की स्थिति स्पष्ट है तो विरोध नहीं होना चाहिए.

स्वास्थ्य विभाग से स्थितियों को समझने, मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद ही तय होगा कि 30 सितम्बर के बाद स्कूल खुलेंगे या नहीं.

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देहरादून. शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में फिलहाल स्कूल नहीं खुलने जा रहे हैं. इस बारे में फ़ैसला करने से पहले स्वास्थ्य विभाग से भी बात की जाएगी. इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने यह भी कह दिया कि जो स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं उन्हें तो ट्यूशन फ़ीस देनी ही पड़ेगी. इससे उन अभिभावकों को झटका लग सकता है जो स्कूलों के जबरन फ़ीस वसूलने की बात कह रहे थे और इसका विरोध कर रहे थे.

स्कूलों को भी देनी है सैलेरी

गुरुवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने हाल ही में संसद से पारित 3 किसान बिल के समर्थन में प्रेस कांफ्रेंस की. इसमें ऑनलाइन पढ़ाई और स्कूल द्वारा ली जा रही ट्यूशन फीस को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने साफ़ कर दिया है कि पेरेंट्स को ट्यूशन फीस देनी ही होगी क्योंकि प्राइवेट स्कूलों को भी अपने स्टाफ को सैलेरी देनी है.



उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से अभी हम स्कूल के कर्मचारियों और दूसरे स्टाफ़ के लिए कोई फैसला नहीं ले पाए हैं इसलिए स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं और ट्यूशन फीस ले रहे है. यह पहले ही साफ़ कर दिया गया था कि स्कूल पेरेंट्स से कोई दूसरा चार्ज नहीं ले सकते. जब ऑनलाइन क्लास और फ़ीस की स्थिति स्पष्ट है तो विरोध नहीं होना चाहिए.
अभी नहीं खुलेंगे स्कूल

स्कूल खुलने को लेकर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिलहाल उत्तराखंड में स्कूल नहीं खुलेंगे.  इसके लिए पहले स्वास्थ्य विभाग स्थितियों को समझा जाएगा और फिर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी. उसके बाद ही तय होगा कि उत्तराखंड में 30 सितम्बर के बाद स्कूल खुलेंगे या नहीं. फिलहाल प्रदेश में कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है इसलिए अभी स्कूल खोलने का फैसला नहीं लिया जा सकता.

प्रेस कांफ्रेंस कर शिक्षा मंत्री ने किसान बिल को लेकर केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस बेवजह किसान विधेयकों को मुद्दा बना रही है. कांग्रेस सरकार के समय में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार सामने आते थे, इन विधेयकों के कानून बनने से बाद ऐसा नहीं होगा. ये विधेयक किसानों के हित में केंद्र सरकार का क्रांतिकारी फैसला साबित होंगे.
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