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Politics of Uttarakhand : BJP में टिकट की राजनीति, हरक​ सिंह और त्रिवेंद्र रावत के चुनाव पर क्या है सस्पेंस?

Politics of Uttarakhand : BJP में टिकट की राजनीति, हरक​ सिंह और त्रिवेंद्र रावत के चुनाव पर क्या है सस्पेंस?

पूर्व ​मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत.

पूर्व ​मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत.

Uttarakhand Election : 12 जनवरी को देहरादून में बीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम पुष्कर धामी (Pushkar Singh Dhami) के साथ ही दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ​तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) और त्रिवेंद्र सिंह रावत को एक मंच पर साथ रखा. इनके साथ ही केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी कॉन्फ्रेंस में नज़र आए. कुल मिलाकर भाजपा ने यह संदेश ​देने का प्रयास किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों (Former CMs) के बीच कोई कलह नहीं है, पार्टी में सब एकजुट हैं, लेकिन क्या कहानी वही है, जो दिख रही है? इधर, ये भी जानें कि टिकट को लेकर हरक सिंह रावत की क्या राजनीति है.

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देहरादून. उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों पर किसे टिकट दिया जाए? इसके लिए बीजेपी के कोर ग्रुप की मीटिंग शनिवार 11 बजे से और चुनाव समिति की बैठक दोपहर 1 बजे से होने जा रही है. हर सीट से 3 दावेदारों का पैनल बनाकर रिपोर्ट केंद्रीय चुनाव समिति को भेजी जाएगी, जहां से प्रत्याशी के नाम पर फाइनल मुहर लगेगी. माना जा रहा है कि बीजेपी अपने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट 16 से 18 जनवरी के बीच जारी कर सकती है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मौजूदा उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के चुनाव व विधानसभा सीट को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है.

पुष्कर सिंह धामी का खटीमा विधानसभा सीट से इस बार भी चुनाव लड़ना जहां तय माना जा रहा है, वहीं भाजपा सरकार के इस कार्यकाल में सबसे ज़्यादा करीब चार साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत के चुनाव पर सस्पेंस बन गया है. रावत डोईवाला सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां से वह तीन बार 2002, 2007 और 2017 का चुनाव जीते लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के सामने रावत को इस बार टिकट दिए जाने को लेकर असमंजस है क्योंकि उन्हें बीच कार्यकाल में ही सीएम पद से हटाया गया था. यही नहीं, रावत के कई फैसले धामी और तीरथ सिंह सरकार में बदले भी गए थे.

हरक सिंह रावत चुनाव लड़ेंगे या नहीं?
इस सवाल के जवाब में भी अभी अटकलबाज़ी ही हो रही है, लेकिन माना जा रहा है कि हरक सिंह की असंतुष्टि मोल लेने का जोखिम भाजपा नहीं उठाएगी. वास्तव में, हरक अपनी बहू अनुकृति के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं और पहले एक बयान दे चुके हैं कि वह खुद चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं रखते. दूसरी खबर यह भी रही कि वह अपनी कोटद्वार सीट छोड़कर किसी और सीट से चुनाव लड़ने के बारे में रणनीति बना रहे हैं. कुल मिलाकर भाजपा के सामने ‘एक परिवार एक टिकट’ जैसी नीति तय करने की बड़ी चुनौती है.

‘मेरी एक ही पत्नी है और एक ही पार्टी’
इधर, लैंसडाउन से बीजेपी विधायक दिलीप सिंह रावत ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि भाजपा ही उनकी पार्टी है और उनके पास जैसे एक पत्नी का दूसरा विकल्प नहीं है, वैसे ही अपनी पार्टी और सीट का भी कोई विकल्प नहीं है. वास्तव में, इस सीट पर भी हरक सिंह और उनके परिवार को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. इसके साथ ही, अन्य दावेदार भी यहां से टिकट के लिए जुगत भिड़ा रहे हैं.

क्यों कटने वाले हैं दर्जन से ज़्यादा विधायकों के टिकट?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक चर्चा यह भी है कि इस बार सरकार विरोधी लहर को काबू में करने के लिए भाजपा अपने 57 विधायकों में से एक दर्जन से ज़्यादा के टिकट छीनने वाली है. एक खबर में एक भाजपा नेता के हवाले से कहा गया कि जिस तरह मुख्यमंत्री बदलकर पार्टी ने छवि बदली, उसी तरह इस फैसले से भी वोटरों के ​बीच पार्टी का एक अलग संदेश जाएगा.

Tags: Assembly elections, Harak singh rawat, Trivendra Singh Rawat, Uttarakhand Assembly Election

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