NHM भी नहीं सुधार पा रहा उत्तराखंड के हेल्थ डिपार्टमेंट का हाल, हर साल खर्च होते हैं इतने करोड़

नेशनल हेल्थ मिशन का भारी-भरकम बजट दिल्ली यानि केंद्र सरकार से मिलता है, लेकिन बावजूद इसके अस्पतालों की हालत खस्ता है.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 4:21 PM IST
NHM भी नहीं सुधार पा रहा उत्तराखंड के हेल्थ डिपार्टमेंट का हाल, हर साल खर्च होते हैं इतने करोड़
PPP मोड से नहीं सुधर रहे हालात.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 4:21 PM IST
हेल्थ सेक्टर को लेकर जून 2019 में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट से साफ हो गया था कि उत्तराखंड की सेहत खराब है. यूपी और बिहार के साथ उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां हेल्थ सेक्टर में काफी सुधार की गुंजाइश है. कहने को उत्तराखंड के लिए नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) हर साल बजट भी बढ़ा रहा है, लेकिन ज़मीन पर नेशनल हेल्थ मिशन का ठोस काम नजर नहीं आ रहा.

योजनाएं 50, लेकिन नहीं दिखता काम!
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत इस वक्त उत्तराखंड को करीब 600 करोड़ का सालाना बजट मिल रहा है, जिसका इस्तेमाल महामारी की रोकथाम, टीकाकरण, अस्पतालों में टेंपरेरी स्टाफ के पेमेंट और महंगी मशीनें खरीदने तक होता है. बावजूद इसके उत्तराखंड में कोई अभियान कारगर होता नहीं दिखता.
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के स्टेट डायेक्टर युगल किशोर पंत के मुताबिक,इस वक्त उत्तराखंड में मिशन के तहत 50 से ज्यादा योजनाएं चल रही हैं और एनएचएम लगातार स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी की दिशा में काम कर रहा है.

ये है सच्‍चाई
हालांकि सच्चाई ये है कि उत्तराखंड के शहरों के बड़े अस्पतालों में मरीज सुविधाओं के अभाव में अस्पतालों की चौखट में दम तोड़ देते हैं.जबकि पहाड़ के छोटे कस्बों और गांव का हाल क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

600 करोड़ के बजट का नहीं दिखता असर!
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नेशनल हेल्थ मिशन का भारी-भरकम बजट दिल्ली यानि केंद्र सरकार से मिलता है, लेकिन बावजूद इसके अस्पतालों की हालत खस्ता है. उत्तराखंड में एक भी सरकारी अस्पताल ऐसा नहीं,जिसकी अच्छी व्यवस्था की मिसाल दी जा सके बल्कि कहानी इसके उलट है. राजधानी देहरादून में चल रहा दून हॉस्पिटल ओवर लोडेड है और यहां रोजाना 3 हजार मरीज़ ओपीडी में आते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड से लेकर ऑपरेशन तक के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता है.

उत्तराखंड में हेल्थ डिपार्टमेंट का बजट करीब 2200 करोड़ रुपए है.


प्राइवेट हाथों में सौंपे जा रहे हैं अस्पताल
उत्तराखंड में हेल्थ डिपार्टमेंट का बजट करीब 2200 करोड़ रुपए है. वहीं करीब 600 करोड़ का बजट वाले नेशनल हेल्थ मिशन से भी हालात नहीं सुधर रहे. टिहरी जिला अस्पताल समेत 3 सरकारी अस्पताल इसी साल की शुरुआत में प्राइवेट पार्टनर के हाथों में सौंप दिए गए, तो अब राज्य के 6 और अस्पतालों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानि PPP मोड़ में देने की तैयारी है. हालांकि क्यों अस्पतालों को प्राइवेट हाथों में सौंपा जा रहा है. इस मुद्दे पर हेल्थ डिपार्टमेंट का कोई अफसर बात नहीं करना चाहता?

शहर से लेकर गांवों तक खुद अस्पताल बीमार पड़े हुए हैं.


सबसे बड़ा नुकसान जनता का...
कहने को हेल्थ डिपार्टमेंट और नेशनल हेल्थ मिशन का उत्तराखंड में अरबों रुपए खर्च हो रहा है, लेकिन उस खर्च का असर कहीं नहीं दिख रहा. शहर से लेकर गांवों तक खुद अस्पताल बीमार पड़े हुए हैं. ऐसे में बीमार मरीज का हाल कहां और कैसे सुधरेगा, यह बड़ा सवाल है.

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First published: July 31, 2019, 4:17 PM IST
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