वेलनेस इंवेस्‍टर्स समिट से बदलेगी उत्तराखंड की किस्‍मत! ये है वजह

Uttarakhand News-उत्तराखंड अपनी साफ आबो-हवा के दुनियाभर में मशहूर है. इसी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार इस बार वेलनेस समिट प्लान कर रही है.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 12, 2019, 4:44 PM IST
वेलनेस इंवेस्‍टर्स समिट से बदलेगी उत्तराखंड की किस्‍मत! ये है वजह
पिछली इंवेस्‍टर्स समिट में 1 लाख 24 करोड़ के एमओयू साइन हुए थे.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 12, 2019, 4:44 PM IST
साल 2018 में उत्तराखंड सरकार ने इंवेस्टर्स समिट का आयोजन किया, जिसमें देश भर के अलग-अलग सेक्टर के इंवेस्टर्स उत्तराखंड आए. इस इंवेस्टर्स समिट में उत्तराखंड सरकार और इंवेस्टर्स के बीच 1 लाख 24 करोड़ के एमओयू साइन हुए, जिसमें अब तक सिर्फ 20 करोड़ के एमओयू पर जमीन पर काम हुआ. हालांकि ज्यादातर एमओयू उत्तराखंड में जमीन की कमी की वजह से लटके हुए हैं और जिन पर काम हुआ है, उनमें से ज्यादातर पुराने प्रोजेक्ट्स का एक्सपेंशन है.

इस बार वेलनेस पर होगा फोकस
उत्तराखंड अपनी साफ आबो-हवा के दुनियाभर में मशहूर है. इसी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार इस बार वेलनेस समिट प्लान कर रही है. वेलनेस समिट में सरकार का फोकस खास तौर पर 4 सेक्टर पर है जिनमें हेल्थ, योग, आयुर्वेद और टूरिज्म है. सरकार मानती है कि चारों सेक्टर का आपस में जुड़े हुए हैं और इसलिए सर्विस सेक्टर पर फोकस किया जाए. उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत कह चुके हैं कि सरकार हेल्थ, योग, आयुर्वेद और टूरिज्म का बिजनेस बढ़ाना चाहती है, क्योंकि उत्तराखंड में इसका बड़ा स्कोप है. यही वजह है कि इस बार वेलनेस समिट प्लान की जा रही है. जबकि केदारनाथ गुफा में योग और कॉर्बेट में शूटिंग से प्रधानमंत्री इस सेक्टर में अच्छा संदेश दे चुके हैं.

क्या इंवेस्टर्स दिखाएंगे इंटरेस्ट ?

उत्तराखंड में योग, आयुर्वेद, हेल्थ और टूरिज्म सेक्टर में बड़ा स्कोप है, लेकिन सवाल है कि क्या इंडिया के अलग-अलग स्टेट के इंवेस्टर्स देवभूमि में इंटरेस्ट दिखाएंगे.

पिछली बार की इंवेस्‍टर्स समिट में से सिर्फ 20 करोड़ के एमओयू पर जमीन पर काम हुआ है. जबकि एक लाख 24 करोड़ के एमओयू साइन हुए थे.


सीनियर जर्नलिस्ट नीरज कोहली मानते हैं कि स्कोप बहुत ज्यादा है, लेकिन गर्वमेंट को काम बेहद फोकस तरीके से करना होगा, तभी इन चारों सेक्टर में इंवेस्टर आएगा. उत्तराखंड में टूरिज्म को लेकर बड़ा काम हो सकता है, जिससे ना सिर्फ बिजनेस बढ़ेगा बल्कि यूथ को जॉब भी मिलेगी. हालांकि क्लीन एंड क्लीयर पॉलिसी ना होने का नुकसान पूरे स्टेट का उठाना पड़ा है.
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कर्ज से मिल सकती है राहत?
साल 2019-20 में उत्तराखंड का बजट 48663 करोड़ का है. जबकि कर्ज करीब 50 हजार करोड़ है. ऐसे में अगर सरकार चाहे तो निवेश के मौके खोलकर स्टेट की इनकम बढ़ा सकती है. वहीं खास बात ये रहेगी कि सर्विस सेक्टर से आने वाली जीसीटी का बड़ा हिस्सा स्टेट जीएसटी में आएगा, क्योंकि मैन्युफेक्चरिंग गुड्स के बाहर सप्लाई होने से इंटिग्रेटेड जीएसटी उत्तराखंड से बाहर जा रहा है और जीएसटी में नुकसान हो रहा है. ऐसे में सर्विस सेक्टर से स्टेट अच्छी इनकम कमा सकता है, लेकिन शर्त यही है कि इंडिया का इंवेस्टर उत्तराखंड में इंटरेस्ट दिखाए.

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First published: August 12, 2019, 4:34 PM IST
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