फ़िल्म शूटिंग से पहले बॉंड भरवाएगी सरकार.... लेकिन क्या भरेंगे फ़िल्मकार?

फ़िल्म रिलीज़ न होने देने के फ़ैसले से सिनेमाघर मालिक परेशान हैं क्योंकि इससे उन्हें भारी आर्थिक नुक़सान हुआ है.

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: December 7, 2018, 5:05 PM IST
फ़िल्म शूटिंग से पहले बॉंड भरवाएगी सरकार.... लेकिन क्या भरेंगे फ़िल्मकार?
जिन सिनेमाघरों में 'केदारनाथ' फ़िल्म रिलीज़ होनी थी वहां सन्नाटा पसरा है.
Bharti Saklani
Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: December 7, 2018, 5:05 PM IST
केदारनाथ’ फिल्म के उत्तराखण्ड में रिलीज़ न होने से उन लोगों को झटका लगा है जो लम्बे समय से बड़े पर्दे पर फ़िल्म देखने का इंतज़ार कर रहे थे. यही नहीं इस फ़िल्म के बाद सरकार राज्य में फिल्म शूटिंग को लेकर निर्माताओं से बॉंड भरवाने पर भी विचार कर रही है ताकि फिल्म में तथ्यों से छेड़छाड़ करने वालों से हर्जाना लिया जा सके.

केदारनाथ आज उत्तराखंड के अलावा सभी जगह रिलीज़ हो गई. रिलीज़ के साथ ही फिल्म ने कई विवादों को जन्म दे दिया है. पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद माना कि फिल्म की शूटिंग के वक्त निर्माता फिल्म की सच्चाई को छिपाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों को उत्तराखण्ड में नहीं रिलीज़ किया जाएगा जो हिन्दू भावनाओं को भड़काने का काम करेंगी. उत्तराखण्ड में अब ऐसा नहीं होगा सरकार जल्द ही सख्त कानून बनायेगी जिसमें शूटिंग से पहले फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़कर निर्माताओं से बान्ड भरवाया जायेगा और अगर फिल्म स्क्रिप्ट के अनुरूप नहीं होती है तो निर्माताओं से हर्जाना तक वसूला जाएगा.

पिछले कुछ सालों में उत्तराखण्ड में कृष्णा कॉटेज, स्टूडेन्ट ऑफ द इयर, बत्ती गुल मीटर चालू, दक्षिण भारत की महेश बाबू और पूजा हेगड़े स्टारर फिल्म की शूटिंग हुई है. उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग के लिए मुबंई में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने निर्माता-निर्देशकों को आंमत्रित भी किया था. इसके अलावा इन्वेस्टर समिट में भी फिल्म निर्माण के लिए सब्सिडी और अन्य प्रकार की छूट और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सहयोग देने की बात कही गई थी.

उत्तराखण्ड में केदारनाथ रिलीज़ न होने से सिनेमाघर मालिकों को झटका लगा है और वह कुछ संगठनों द्वारा किए गए फिल्म के विरोध के बाद फ़िल्म रिलीज़ न होने देने के फ़ैसले से परेशान हैं क्योंकि इससे उन्हें भारी आर्थिक नुक़सान हुआ है.

लेकिन धर्मस्व मंत्री सतपाल महराज हिंदूवादी संगठनों के विरोध से सहमति जताते हैं और कहते हैं लोगों को जागरूक होना चाहिए. धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली किसी भी चीज़ को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, सहना नहीं चाहिए.

खैर केदारनाथ फिल्म पर बैन के बाद अब एक नई बहस छिड़ सकती है कि सरकार की प्राथमिकता क्या है? सरकार की पूरी कोशिश है कि फिल्म शूटिंग के लिए निर्माता उत्तराखंड आएं और इसके लिए वह रेड कार्पेट बिछा रही है और बॉलीवुड से लेकर दक्षिण भारत की कई फिल्म निर्माता यहां शूटिंग कर रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या वह कहानी शेयर करने और बॉंड भरने जैसी शर्तें भी मानेंगे या किसी दूसरे राज्य का रुख कर लेंगे?

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