उत्तराखंड: प्रवासियों का पलायन रोकने में सरकार नाकाम, एक-तिहाई लौटे महानगर

लॉकडाउन के दौरान राज्य में 3.5 लाख प्रवासी वापस लौटे. (फाइल फोटो)
लॉकडाउन के दौरान राज्य में 3.5 लाख प्रवासी वापस लौटे. (फाइल फोटो)

पलायन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन में 3 लाख 57 हज़ार प्रवासी (Migrant laborers) उत्तराखंड वापस लौटे, लेकिन 7 महीने पूरे होते-होते 1 लाख प्रवासी वापस महानगरों की ओर रूख कर चुके हैं.

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रिपोर्ट- दीपक भट्ट

देहरादून. उत्तराखंड में पलायन (Migration) सबसे बड़ी समस्या रही है. हालांकि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान उत्तराखंड में लाखों प्रवासियों (Migrant laborers) की वापसी हुई. लेकिन 7 महीने बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वो हैरान करने वाले हैं. पलायन आयोग की तरफ से मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी गई. उसके मुताबिक लॉकडाउन में 3 लाख 57 हज़ार प्रवासी उत्तराखंड वापस लौटे, लेकिन 7 महीने पूरे होते-होते 1 लाख प्रवासी वापस महानगरों की ओर लौट गए. यानि राज्य में अब सिर्फ 2 लाख 57 हज़ार प्रवासी रह गए हैं. कुल प्रवासियों में से 29 प्रतिशत का पलायन हो चुका है. जबकि 71 परसेंट को राज्य में रोक कर रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य में लौटे 3.57 लाख प्रवासियों में से एक लाख प्रवासी पलायन कर चुके हैं. सितम्बर, 2020 के अंत तक कोविड-19 महामारी के कारण राज्य में लौटे प्रवासियों में से लगभग 29 प्रतिशत महानगरों का रूख कर चुके हैं. राज्य में लौटे प्रवासियों में से लगभग 71 प्रतिशत अपने मूल निवास या उसके पास के क्षेत्रों में चले गए हैं. इनमें से लगभग 33 प्रतिशत कृषि और पशुपालन, 38 प्रतिशत मनरेगा, 12 प्रतिशत स्वरोजगार तथा 17 प्रतिशत अन्य आजीविका के साधन पर निर्भर हैं.



उन्होंने बताया कि जनपद अल्मोड़ा में लगभग 39 प्रतिशत लौटे प्रवासी स्वरोजगार पर निर्भर हैं जो कि अन्य जनपदों से काफी अधिक है. जनपद नैनीताल, ऊधमसिंह नगर तथा टिहरी में भी अधिक संख्या में लौटे प्रवासी स्वरोजगार पर अपनी निर्भरता दिखा रहे हैं. काफी संख्या में लौटे प्रवासी कृषि, बागवानी, पशुपालन आदि पर आजीविका के लिए निर्भर हैं. इनमें से सबसे अधिक जनपद नैनीताल 59 प्रतिशत, पिथौरागढ़ 57 प्रतिशत, बागेश्वर 53 प्रतिशत चम्पावत 40 प्रतिशत तथा उत्तरकाशी 45 प्रतिशत में है. जबकि मनरेगा पर सबसे अधिक जनपद हरिद्वार 75 प्रतिशत, पौड़ी 53 प्रतिशत, टिहरी 51 प्रतिशत तथा चमोली 43 प्रतिशत में लौटे प्रवासी आजीविका के लिए निर्भर हैं. उन्होंने इस सम्बन्ध में राज्य और जिले स्तर पर प्रवासियों के आर्थिक पुनर्वास हेतु प्रभावी सेल बनाने का सुझाव दिया गया.
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