केंद्र की सख्‍ती के बाद जागी उत्‍तराखंड सरकार, अब करेगी ये खास काम

अंडर ग्राउंड वाटर कंजर्वेशन के साथ ही जैवविवधिता के संरक्षण में वेटलैंड का बड़ा योगदान होता है. उत्तराखंड में ऐसे 994 वेटलैंड चिन्हित किए गए हैं, जो एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में फैले हुए हैं.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 25, 2019, 11:14 AM IST
केंद्र की सख्‍ती के बाद जागी उत्‍तराखंड सरकार, अब करेगी ये खास काम
वेटलैंड कंजर्वेशन अथॉरिटी के अध्यक्ष एवं वन मंत्री हरक सिंह.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 25, 2019, 11:14 AM IST
भारत सरकार ने सितंबर 2017 को देश में वेटलैंड कंजर्वेशन एंड मैनजमेंट एक्ट बनाया, लेकिन इसका ठीक से इंप्लीमेंटेशन नहीं हो पाया. इस एक्ट के पीछे मकसद था कि वेटलैंड न सिर्फ भू-जल स्तर बढ़ाने में अधिक सहायक हैं बल्कि जैवविवधता के लिहाज से भी खासकर वाइल्ड लाइफ के लिए ये अच्‍छी भूमि मानी जाती है. हालांकि अब इस पर केंद्र ने राज्यों से सख्ती के साथ अमल करने को कहा है.

उत्तराखंड में हैं 994 छोटे-बड़े वेटलैंड
उत्तराखंड में 994 छोटे-बडे वेटलैंड चिन्हित कर लिए गए हैं, जो कि एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में फैले हैं. इनमें भी सवा दो हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में फैले करीब 178 वैटलैंड हैं. जबकि जिनमें से 97 वेटलैंड ऐसे हैं, जो फॉरेस्ट क्षेत्र से बाहर हैं. वेटलैंड कंजर्वेशन अथॉरिटी के सचिव डीजीके शर्मा कहते हैं कि सरकार इनका अधिग्रहण करेगी,क्योंकि फॉरेस्ट लैंड से बाहर के इन वेटलैंड पर सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है. ये या तो सूख गए हैं या फिर ये अतिक्रमण की जद में हैं.

उत्तराखंड में 994 छोटे-बडे वेटलैंड चिन्हित कर लिए गए हैं


आसान नहीं होगा वेटलैंड भूमि का अधिग्रहण
वेटलैंड का अधिग्रहण सरकार के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि अधिकांश ग्राम पंचायतों की भूमि पर हैं. अधिग्रहण के बाद इन पर फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट लागू हो जाएगा,लिहाजा ग्राम पंचायतें आसानी से अपन हक छोड देंगी, इसमें शंका है. वेटलैंड कंजर्वेशन अथॉरिटी के अध्यक्ष एवं वन मंत्री हरक सिंह कहते हैं कि इसके लिए अथॉरिटी के नीचे भी दो कमेटियां होंगी. तकनीकी कमेटी वेटलैंड के सीमांकन के साथ ही डाक्यूमेंटशन करेगी, तो ग्रेवांस कमेटी जन सुनवाई करेगी.

झिलमिल झील क्षेत्र में हिरणों की पांच प्रजातियां मौजूद हैं.

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झिलमिल झील से समझें वेटलैंड का महत्व
हरिद्वार वन प्रभाग के चिड़ियापुर क्षेत्र में स्थित है झिलमिल झील. यह झील लगभग 3783.5 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. ये कटोरीनुमा दलदली क्षेत्र है. जैव-विविधता से भरपूर इस क्षेत्र में हिरणों की पांच प्रजातियां चीतल, सांभर, काकड़, बारहसिंघा, हाथी, नीलगाय, लेपर्ड व टाइगर आसानी से देखे जा सकते हैं. सर्दी के मौसम में यहां प्रवासी पक्षी भी आते हैं और यहां लगभग 160 प्रकार के स्थायी व प्रवासी पक्षी पाये जाते हैं. बारहसिंघों की उत्तराखंड में यह एक मात्र शरण स्थली है. अगस्त 2005 में राज्य सरकार ने पारिस्थितिकी, प्राणि जगत, वनस्पति एवं भू-विविधता के आधार पर इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित किया.

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First published: July 25, 2019, 11:10 AM IST
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