UP की तर्ज पर उत्तराखंड में भी 'नकारा' कर्मचारियों पर गिरेगी गाज, CM ने दिया सचिव को आदेश

यूपी की तर्ज पर अब उत्तराखंड सरकार भी ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने वाली है जो या तो काम करने में अक्षम हैं या फिर उनका ट्रैक रिकार्ड ठीक नहीं है.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 3, 2019, 9:04 PM IST
UP की तर्ज पर उत्तराखंड में भी 'नकारा' कर्मचारियों पर गिरेगी गाज, CM ने दिया सचिव को आदेश
त्रिवेंद्र सिंह रावत, सीएम, उत्तराखंड
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 3, 2019, 9:04 PM IST
यूपी की तर्ज पर अब उत्तराखंड सरकार भी ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने वाली है, जो या तो काम करने में अक्षम हैं या फिर उनका ट्रैक रिकॉर्ड ठीक नहीं है. सरकार इसे सख्ती से अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव को आदेश जारी कर दिए हैं.

मुख्य सचिव की ओर से भी कार्मिक विभाग को विभागवार ऐसे सभी अधिकारी कर्मचारियों को चिह्नित करने को कहा गया है. उत्तराखंड में करीब साढ़े तीन लाख से अधिक अधिकारी राज्य कर्मचारी हैं. इनमें से खराब ट्रैक रिकॉर्ड और अक्षम कार्मिकों का चिह्निकरण बहुत ही मुश्किल काम होगा. साथ ही कर्मचारी संगठनों को भी इसके लिए तैयार करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है. ऐसा इसलिए, क्योंकि, कर्मचारी नेता सरकार की इस मंशा को लेकर अभी से आशंकित हो गए हैं.

इस बारे में प्रदेश के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि निश्चितरूप से ऐसे लोग जो अक्षम हैं या फिर ऐसे लोग जो अपने काम में लापरवाही बरतते हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा. सीएम ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ऐसे लोगों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिया जा सकता है.

यूकेडी ने कहा- व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को दूर करे सरकार

दूसरी ओर आंदोलनों से उपजी उत्तराखंड की सबसे पुरानी पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल का कहना है कि सरकार के ऐसे प्रयोगों से कुछ नहीं होने वाला है. सरकार चंद कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने से अच्छा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को दूर करे. यूकेडी के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि कोई
भी पैमाना बना लीजिए, लेकिन जबतक सरकारें ईमानदार नहीं होंगी, जबतक जनप्रतिनिधि ईमानदार नहीं होंगे, जबतक प्रदेश का मुखिया और उसके मंत्री ईमानदार नहीं होंगे, कुछ नहीं होगा.

अधिकतर विधायक हैं ठेकेदार
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज तीसरी ऐसी सरकार है जिसके अधिकतर विधायक ठेकेदार हैं. ये वे हैं जो खनन में ठेकेदारी ढूंढ़ते हैं, जो पीएमजीएसवाई की सड़कों में ठेकेदारी कर रहे हैं, जो सारे ठेकों को अपने नाम से, अपनी पत्नी के नाम से और अपने बाल बच्चों के नाम से कर ठेकेदारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में किसी कर्मचारी को वीआरएस दिए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

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First published: July 3, 2019, 7:52 PM IST
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