उत्तराखंडः जड़ी-बूटी उगाकर कमा सकते हैं लाखों रुपए, जानें कहां से मिल सकती है मदद

हिमालयी राज्य उत्तराखंड में बहुत सारी ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जो इन्युनिटी बढ़ाने में मददगार होसकती हैं और आर्थिक निर्भरता भी ला सकती हैं. (तस्वीर, साभार HRDI)

हिमालयी राज्य उत्तराखंड में बहुत सारी ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जो इन्युनिटी बढ़ाने में मददगार होसकती हैं और आर्थिक निर्भरता भी ला सकती हैं. (तस्वीर, साभार HRDI)

प्रदेश में हाई एल्टीट्यूड के प्लांट्स से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. भविष्य में भी इम्युनिटी बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों, दवाओं की मांग बनी रहेगी.

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देहरादून. लाखों की संख्या में उत्तराखंड लौटे प्रवासियों के कारण प्रदेश में बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या बन गई है. मजबूरी में वापस इन प्रवासियों में से बहुत से वापस जाना भी नहीं चाहते और यहीं रोज़गार करना चाहते हैं. विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की चलते नौकरियां अब यूं भी मुश्किल हैं लेकिन कोरोना से उत्तराखंड के लिए एक मौका भी पैदा हो गया है. इस हिमालयी राज्य में बहुत सारी ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जो इन्युनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं और आर्थिक निर्भरता भी ला सकती हैं. राज्य और केंद्र सरकार इसे बढ़ावा भी दे रही हैं और बहुत सी योजनाओं के तहत सब्सिडी भी मिल रही है.

चमोली के गोपेश्वर में स्थित उत्तराखंड में जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान (HRDI) वैज्ञानिक डॉक्टर विजय प्रसाद भट्ट ने न्यूज़ 18 को बताया कि उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों का काम क्यों करना चाहे और इसके क्या फ़ायदे हैं. डॉक्टर वीपी भट्ट की बात उन्हीं के शब्दों में...

हिमालय का फ़ायदा

मेडिसिनल प्लांट्स और फ़सलें दुनियाभर में होती हैं, लेकिन हमारे पास फ़ायदा है हिमालयी राज्य होने का. इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली जड़ी-बूटियों की मेडिसिनल वैल्यू बहुत अच्छी होती है. और ऐसा सिर्फ़ जड़ी-बूटियों के साथ नहीं है, फ़सलों के बारे में भी यह सच है.
मंडुवा तो पूरे देश में होता है लेकिन उत्तराखंड में होने वाले मंडुवे की साइंटिफ़िक प्रॉपर्टीज़ आप देखेंगे तो वह बाकी राज्यों से बहुत ऊंची मिलेंगी, मध्य हिमालयी राज्यों में भी. इसका हम फ़ायदा ले सकते हैं और लेना ही चाहिए. इसके अलावा हाई एल्टीट्यूड में होने वाली बहुत सारी जड़ी-बूटियों पर तो हमारी मोनोपॉली है क्योंकि वे यहीं होती हैं.

medicinal plants hrdi 4, इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली जड़ी-बूटियों की मेडिसिनल वैल्यू बहुत अच्छी होती है. (तस्वीर, साभार HRDI)
इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली जड़ी-बूटियों की मेडिसिनल वैल्यू बहुत अच्छी होती है. (तस्वीर, साभार HRDI)


इम्युनिटी बढ़ाने वाले प्लांट्स



कोरोना वायरस को लेकर बार-बार यह बात कही जा रही है कि अगर आपका इन्यून सिस्टम बेहतर होगा तो आप कोविड-19 वायरस से बेहतर ढंग से लड़ पाएंगे. वैसे यह बात सभी बीमारियों के बारे में सही है. राज्य का आयुष मंत्रालय तो इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कुछ ख़ास जड़ी-बूटियों का सेट भी कोरोना वॉरियर्स को बांट रही है.

कोरोना संकट से दुनिया के सामने इन्यून सिस्टम को मजबूत करने की ज़रूरत भी साफ़ हो गई है. इसलिए भविष्य में भी इम्मुनिटी बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों, दवाओं की मांग बनी रहेगी. हमारे हाई एल्टीट्यूड के प्लांट्स में ख़ासियत है कि इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और हम इसका फ़ायदा ले सकते हैं.

साथ मिलकर काम करना होगा

उत्तराखंड की खेती के पैटर्न को देखें तो यहां व्यक्तिगत रूप से खेती करने के बजाय सामूहिक रूप से या मिलकर खेती करना फ़ायदेमंद होगा. अव्वल तो पहाड़ों में छोटी-छोटी और बिखरी हुई जोत हैं और फिर सरकार भी सामूहिक खेती को ही बढ़ावा दे रही है.

medicinal plants hrdi 2, आजकल सरकार ने कृषि क्षेत्र और विशेषकर मेडिसिनल प्लांट्स को बढ़ावा देने के लिए बहुत अच्छा बजट दे रखा है.
आजकल सरकार ने कृषि क्षेत्र और विशेषकर मेडिसिनल प्लांट्स को बढ़ावा देने के लिए बहुत अच्छा बजट दे रखा है. (तस्वीर, साभार HRDI)


इसे लेकर सरकारी योजनाएं तो पहले से थीं लेकिन आजकल सरकार ने कृषि क्षेत्र और विशेषकर मेडिसिनल प्लांट्स को बढ़ावा देने के लिए बहुत अच्छा बजट दे रखा है. बेशक इसमें कुछ तकनीकी समझ की ज़रूरत होती है और इसमें मदद करने को एचआरडीआई हमेशा से तैयार रहता है. संस्थान की मदद से जिसने भी मेडिसिनल प्लांट्स की खेती शुरु की है, वह अच्छी फ़सल ले रहा है और अच्छा कमा रहा है.

उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल के प्लेन क्षेत्रों में सतावर, सर्वगंधा और तुलसी लगाई जा सकती है. इनके साथ ही ऐरोमैटिक प्लांट्स भी लगाए जा सकते हैं. 1000 मीटर से ऊपर बड़ी इलायची, तेज पत्ता के साथ ही तुलसी और कैरोमाइन को ऑफ़सीज़न में भी लगाया जा सकता है. हाई एल्टीट्यूड वाला क्षेत्र तो खजाना ही है मेडिसिनल प्लांट्स का. वहां जंबू, काला जीरा जैसी बहुत सारी हाई वैल्यू क्राप होती हैं.

medicinal plants hrdi 3, संस्थान की मदद से जिसने भी मेडिसिनल प्लांट्स की खेती शुरु की है, वह अच्छी फ़सल ले रहा है और अच्छा कमा रहा है.
संस्थान की मदद से जिसने भी मेडिसिनल प्लांट्स की खेती शुरु की है, वह अच्छी फ़सल ले रहा है और अच्छा कमा रहा है.(तस्वीर, साभार HRDI)


यहां से लें जानकारी...

उत्तराखंड का जड़ी बूटी और विकास संस्थान चमोली के गोपेश्वर में स्थित है लेकिन इनकी खेती से जुड़ी जानकारी आसानी से संस्थान की वेबसाइट http://hrdiuk.org/ से ली जा सकती है. इसके अलावा 01372-254210 नंबर पर फ़ोन करके और director_hrdi@yahoo.in, director_hrdi@yahoo.in और hrdi_ut@rediffmail.com  पर ईमेल करके भी जानकारी ली जा सकती है.

संस्थान के वैज्ञानिक डॉक्टर विजय प्रसाद भट्ट कहते हैं कि उन्हें सीधे फ़ोन करने के कोई भी जड़ी-बूटियों की खेती या और भी कोई जानकारी ले सकता है. डॉक्टर भट्ट को 9412082003 और 7579201846 नंबरों पर फ़ोन किया जा सकता है.

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