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उत्तराखंड: 23 दिन की जगह दो दिन में ही समाप्त हो गया झंडा मेला, श्रद्धालुओं से वापस लौटने की अपील

झंडे जी मेले का दो दिन में ही समापन, कोरोना ने सीमित किया धार्मिक आयोजन

झंडे जी मेले का दो दिन में ही समापन, कोरोना ने सीमित किया धार्मिक आयोजन

देहरादून का झंडा मेला होली के 5 वें दिन में शुरू होकर 23 दिन तक राम नवमी को समाप्त होता था, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते देहरादून का प्रसिद्ध झंडा मेला भी सीमित किया गया है.

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देहरादून. दो अप्रैल से प्रारम्भ होने वाले झंडा जी मेले (Jhanda ji Fair ) का रविवार को विधिवत समापन किया गया. कोरोना महामारी के चलते देहरादून ( Dehradun) में का झंडा मेला मात्र दो दिन ही चल पाया. रविवार को करीब साढ़े सात बजे शुरु हुई नगर परिक्रमा के बाद श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ( Devendra Das Maharaj) ने मेले में आए सभी श्रद्धालुओं के साथ संगतों को प्रसाद वितरित कर मेले के समापन की घोषणा की. इसके साथ ही सभी को अपने राज्यों में लौट जाने को कहा. रविवार की परिक्रमा को भी सीमित रखा गया.

दरअसल, देहरादून का झंडा मेला होली के 5 वें दिन में शुरू होकर 23 दिन तक राम नवमी को समाप्त होता था, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते देहरादून का प्रसिद्ध झंडा मेला भी सीमित किया गया है. रविवार को शुरू हुई नगर परिक्रमा को भी कोरोना महामारी के चलते सीमित कर दिया गया. नगर परिक्रमा को दरवार साहिब से भंडारी बाग, आड़त बाजार, दर्शनी गेट होते हुये गऊघाट से वापस दरबार पहुंची .इस बार कोरोना के बढ़ते मामलों औऱ बाहर से आने वालों पर सख्ती के चलते श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही. कई जगहों पर शहरवासियों ने ऐतिहासिक नगर परिक्रमा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया. फूलों के बिछावन पर नगर परिक्रमा गुजरती रही. रविवार को ऐतिहासिक नगर परिक्रमा के साथ ही श्री झंडेजी मेला भी संपन्न हो गया.

कोरोना के चलते इस बाद नगर परिक्रमा के रूट को छोटा किया गया है. वहीं, शनिवार सुबह से ही संगतों ने श्री झंडेजी में मत्था टेक सुख समृद्धि की कामना की. कोरोना के चलते 90 फीसदी संगतें एक दिन में ही लौट गईं. दरबार साहिब के सज्जादानशीन महंत देवेन्द्र दास महाराज ने संगतों से आदर्श जीवन जीने, पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने, नशा मुक्ति में सहभागी बनने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया. उन्होंने जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति व मोक्ष के रहस्य का ज्ञान भी दिया.
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