उत्तराखंड: श्रमिकों के कल्याण के लिए बना बोर्ड चर्चा में, सचिव-अध्यक्ष में ठनी

कर्मकार कल्याण बोर्ड सियासत का मैदान बन गया है.

बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को चार पेज का एक पत्र लिखकर सचिव मधु नेगी चौहान की शिकायत की है. शिकायत में कहा गया है कि सचिव उनके आदेशों का पालन नहीं कर रही हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड भवन संनिर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है. बोर्ड के अध्यक्ष दायित्व धारी शमशेर सिंह सत्याल और बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान की आपस में ठन गई है. बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को चार पेज का एक पत्र लिखकर सचिव मधु नेगी चौहान की शिकायत की है. शिकायत में कहा गया है कि सचिव उनके आदेशों का पालन नहीं कर रही हैं. शमशेर सिंह सत्याल का कहना है कि 14 मई को बोर्ड की वर्चुअल हुई मीटिंग में ये तय किया गया था कि बोर्ड में रजिस्टर्ड श्रमिकों को कोविडकाल में राशन किट बांटी जाएगी, लेकिन दो महीने बीतने के बावजूद भी सचिव द्वारा राशन किट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई.

सत्याल का आरोप है कि सचिव स्वयंभू होकर कार्य कर रही हैं, उनके लिए बोर्ड अध्यक्ष के आदेश कोई मायने नहीं रखते. पत्र में कहा गया है कि कर्मकार कल्याण बोर्ड का कार्यालय पूर्व में नेहरू कॉलोनी में था, जिसे वहां से हटाकर किसी सरकारी भवन में ट्रांसफर किए जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन सचिव ने फिर से नेहरू कॉलोनी में पूर्व जगह से ही कार्यालय का संचालन शुरू कर दिया है.

अध्यक्ष का कहना है कि यदि कार्यालय पुराने ऑफिस से ही संचालित किया जाता है, तो इस कार्यालय का किराया सचिव को स्वयं अपने वेतन से देना होगा, यदि सचिव ने बोर्ड फंड से ये पैसा दिया तो उनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराना उनकी मजबूरी होगी. सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि बोर्ड का डिस्पैच रजिस्टर से लेकर ऑफिस की चाबियां भी सचिव ने अपने पास रखी हुई हैं. शमशेर सिंह सत्याल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सचिव को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए.

इस संम्बंध में बोर्ड की सचिव मधु नेगी चौहान का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संम्पर्क नहीं हो पाया. दरअसल, कर्मकार कल्याण बोर्ड सियासत का मैदान बन गया है. कर्मकार कल्याण बोर्ड शर्म मंत्रालय के अधीन आता है और श्रम मंत्रालय कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के पास है. पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में मंत्री हरक सिंह रावत ही बोर्ड के अध्यक्ष भी हुआ करते थे . लेकिन बाद में हरक सिंह रावत को अचानक बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाकर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने करीबी और दायित्व धारी शमशेर सिंह सत्याल को कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी सौंप दिया. इसको लेकर तब सियासत खूब गर्म हुई थी. जिस तरीके से तब मंत्री हरक सिंह रावत को बोर्ड अध्यक्ष पद से हटाया गया. उससे हरक सिंह खासे नाराज थे. तब मंत्री हरक सिंह रावत ने पूरी कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा था कि बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाने से पूर्व इसकी सूचना भर तक उनको नहीं दी गई थी.

यही नहीं हरक सिंह को हटाने के तत्काल बाद मंत्री की करीबी और बोर्ड की सचिव दमयंती रावत की भी बोर्ड से छुट्टी कर दी गई और उनकी जगह नई सचिव पीसीएस अफसर दीप्ति सिंह की तैनाती कर दी गई. यहां तक की बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए इसकी जांच बैठा दी गई थी लेकिन इस बीच सत्ता परिवर्तन हुआ और तीरथ सिंह रावत नए मुख्यमंत्री बन गए. मुख्यमंत्री ने आते ही सभी दायित्व धारियों को पद मुक्त कर दिया था. लेकिन, शमशेर सिंह सत्याल को इसके कुछ दिन बाद ही फिर से बोर्ड अध्यक्ष पद पर बहाल कर दिया गया था. इस बीच श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने तत्काल सचिव दीप्ति सिंह को हटाकर उनकी जगह श्रमायुक्त हरिद्वार मधु नेगी चौहान को बोर्ड का सचिव बना दिया. मधु नेगी चौहान के बोर्ड का सचिव बनते ही एक बार फिर बोर्ड के बहाने राजनीति की जंग शुरू हो गई है.

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