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Uttarakhand Disaster : कहीं पेट्रोल नहीं तो कहीं पेट्रोल से महंगा टमाटर, CM धामी का कुमाऊं दौरा और अंचल की चीखें

Uttarakhand Disaster : कहीं पेट्रोल नहीं तो कहीं पेट्रोल से महंगा टमाटर, CM धामी का कुमाऊं दौरा और अंचल की चीखें

चंपावत में पीड़ितों से मिले पुष्कर सिंह धामी. (Image : Twotter)

चंपावत में पीड़ितों से मिले पुष्कर सिंह धामी. (Image : Twotter)

CM Dhami in Kumaon : उत्तराखंड में अतिवृष्टि से हुए नुकसान और उसके बाद बने हालात का मुआयना करने पुष्कर सिंह धामी पहुंच रहे हैं, तो पूरे अंचल के लोग अपनी समस्याएं सुनाने को बेताब दिख रहे हैं, जहां जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है.

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    देहरादून. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज शनिवार को कुमाऊं के दौरे पर हैं, जो राज्य में हुई अतिवृष्टि से सबसे ज़्यादा प्रभावित हिस्सा है. यहां धामी पीड़ितों की समस्याएं सुनने और आपदा का जायज़ा लेने पहुंचे हैं और इसी बीच बड़ी खबर यह आ रही है कि उत्तराखंड में सब्ज़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं क्योंकि रास्ते बंद होने के कारण ईंधन की सप्लाई ठप हो गई और ट्रांसपोर्ट भी बुरी तरह प्रभावित है. एक हफ्ते पहले तक उत्तराखंड में 40 से 55 रुपये किलो तक बिक रहा टमाटर अब 100 रुपये प्रति किलो का दाम पार कर चुका है. पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में तो 200 रुपये किलो भी बिक रहा है.

    उत्तराखंड के सीएम धामी आज कुमाऊं के नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा का दौरा करने जा रहे हैं. चंपावत पहुंचकर आपदा का जायज़ा ले चुके धामी ने दावा किया कि सभी समस्याओं को सुलझाया जा रहा है. लोगों को खाने पीने की चीज़ें मुहैया करवाई जा रही हैं और अधिकांश बंद रास्तों को खोला जा चुका है. धामी के दावे के मुताबिक कुछ ही सड़कें बाकी हैं, जिनका खुलना बाकी है. धामी के दौरे और दावे के दूसरी तरफ, स्थानीय लोग अपनी समस्याएं बता रहे हैं.

    ये हैं कुमाऊं में महंगाई के हाल!
    कुमाऊं के छह ज़िलों में टमाटर, पेट्रोल और सेब के दामों से यहां महंगाई और सप्लाई का अंदाज़ा लग जाता है. टमाटर इस अंचल में 120 रुपये किलो तक बिक रहा है. खबरों की मानें तो चंपावत में पेट्रोल के दाम 100.46 रुपये प्रति लीटर हैं तो बागेश्वर में 119 रुपये. बागेश्वर में टमाटर सबसे सस्ता यानी 70 रुपये किलो बिक रहा है, तो अल्मोड़ा सबसे ज़्यादा प्रभावित है, जहां पेट्रोल और डीज़ल पंप सूख चुके हैं और यहां के दूरस्थ क्षेत्रों में तो टमाटर 200 रुपये किलो भी मिल जाए तो किस्मत.

    हिल्स पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के प्रमुख विक्रम सिंह चड्ढा के हवाले से एक खबर में कहा गया, ‘कुमाऊं के ज़िलों में पिछले चार दिनों से पेट्रोलियम टैंकर की सप्लाई नहीं पहुंची है. भारी बारिश और भूस्खलन के चलते रास्ते ठप होने से सब्ज़ियों की सप्लाई भी प्रभावित है. रास्ते खुलेंगे तब ही जाकर कुछ राहत मिलेगी.’

    चंपावत की तकलीफें क्या कहती हैं?
    कुमाऊं के इस ज़िले में 11 जानें अतिवृष्टि से गई हैं और अब भी कई लोग खतरे में हैं. चंपावत के गल्ला सहित ज़्यादातर गांवों में पानी सप्लाई की लाइनें ध्वस्त हो जाने से ग्रामीण नौले के भरोसे ही प्यास बुझा रहे हैं और उन्हें पानी ढोकर ले जाना पड़ रहा है. वहीं, गल्ला गांव में ज़मीन इस तरह धंस चुकी है कि मकानों की दीवारें और बुनियाद तक उखड़ चुकी है. यहां विस्थापन के लिए प्रशासन कागजी कार्यवाही कर रहा है.

    नैनीताल में सड़कें और पर्यटन ठप
    उत्तराखंड में अतिवृष्टि का सबसे ज़्यादा प्रकोप झेलने वाला ज़िला नैनीताल है, जहां 37 मौतों की खबर आ चुकी है. यहां झील के सड़क पर आ जाने के बाद रास्ते बुरी तरह ठप हैं और पर्यटकों से पूरा शहर खाली हो चुका है. ज़िला कलेक्टर का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि सड़कों को दोबारा ठीक कर लिया जाए और उम्मीद है कि नवंबर के महीने में पर्यटन यहां बहाल हो सकेगा.

    Tags: Heavy Rainfall, Kumaon, Pushkar Singh Dhami, Uttarakhand landslide, Uttarakhand news

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