पीएम मोदी के साथ योग दिवस में शामिल नहीं होंगे मदरसे, सूर्य नमस्कार से ऐतराज़

सूर्य नमस्कार करना मुस्लिमों के लिए संभव ही नहीं है, इसलिए योग दिवस के सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी का सवाल ही नहीं उठता.

Asif | News18 Uttarakhand
Updated: June 14, 2018, 9:00 PM IST
पीएम मोदी के साथ योग दिवस में शामिल नहीं होंगे मदरसे, सूर्य नमस्कार से ऐतराज़
फ़ाइल फ़ोटो
Asif | News18 Uttarakhand
Updated: June 14, 2018, 9:00 PM IST
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग-दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून में 60,000 लोगों के साथ योग करेंगे. इस आयोजन को सफल बनाने में राज्य सरकार की पूरी मशीनरी लगी हुई है. देहरादून में मौजूद वन अनुसन्धान केंद्र यानि एफआरआई में ख़ास आयोजन किया जाएगा. लेकिन राज्य के मदरसों ने योग दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के सरकारी आदेश को मानने से इनकार कर दिया है.

इक्कीस जून को होने वाले योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने को लेकर राज्य सरकार बेहद उत्साहित है. खुद मुख्यमंत्री इसमें रुचि ले रहे हैं और सभी मंत्री, अधिकारी योग दिवस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'वॉक फ़ॉर योग' तक कर रहे हैं.

राज्य सरकार की पूरी कोशिश है कि यह आयोजन सफल हो और इसमें कोई कमी न रह जाए या कोई विवाद न जुड़े. लेकिन एक सरकारी आदेश इन मंशाओं के पूरे होने में खटास डाल सकता है.

राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को राज्य के मदरसा टीचर, मदरसा मैनेजमेन्ट और छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही है. मदरसा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अख़लाक़ अहमद इसे बड़ा आयोजन बताते हैं और कहते हैं कि मदरसों और इनसे जुड़े जिम्मेदार लोग इसे और शानदार बनाने में मदद करेंगे.

लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और है. मदरसा बोर्ड सभी मदरसों में 25 जून तक की छुट्टी का ऐलान कर चुका है और योग दिवस के लिए अभी तक मदरसों को कोई आदेश उन्हें नहीं मिला है. इसके अलावा सूर्य नमस्कार भी है जिससे इन लोगों को ऐतराज़ है.

मदरसा दार-ए-अरकम के प्रबंधक मोहम्मद अब्दुसत्तार कहते हैं कि योग से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, नमाज़ तो खुद ही योग के करीब है. लेकिन इसके साथ ही यह भी कहते हैं कि सूर्य नमस्कार करना मुस्लिमों के लिए संभव ही नहीं है, इसलिए योग दिवस के सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी का सवाल ही नहीं उठता.

मदरसा बोर्ड अगर इस योग दिवस में शामिल होने का आदेश जारी करता भी है तो यह बेमानी साबित होगा क्योंकि ईद की वजह से मदरसों के बच्चे अपने घर चले जाते हैं और अभी तक के आदेश के मुताबिक 25 जून तक सारे मदरसे बंद रहेंगे. इसलिए अगर सरकार की मंशा अगर 60,000 लोगों में मुस्लिम समुदाय को लोगों को भी दिखाने की है तो इसमें शायद उसे सफलता न मिले.
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