उत्तराखंड: कहीं Corona का एपिसेंटर न बन जाए महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम, ये है वजह

वहां मौजूद स्टॉफ के लोग भी मानते हैं कि व्यवस्थाएं उचित नहीं हैं.
वहां मौजूद स्टॉफ के लोग भी मानते हैं कि व्यवस्थाएं उचित नहीं हैं.

स्टेडियम (Stadium) के वॉशरूम में पूरे फर्श पर पानी बिखरा पड़ा रहता है. वॉश बेसिन इतने गंदे हैं, जिनको देखकर लगता है कि महीनों से इनकी सफाई नहीं हुई है.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में अभी तक करीब डेढ़ लाख प्रवासी वापसी कर चुके हैं. प्रवासियों की घर वापसी के साथ-साथ कोरोना संक्रमितों (COVID-19 Infected) की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है. इसके लिए सरकार ने कुछ व्यवस्थाओं को तो दुरुस्त किया, लेकिन कुछ व्यवस्थाएं अभी से ही डगमग होने लगी हैं. इसका एक उदाहरण है रायपुर स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम.

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम से राज्य में फंसे लोगों को उनके प्रदेशों के लिए भेजा जा रहा है, तो बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासियों को भी यहां इकट्ठा कर उनके जिलों को भेजा जा रहा है. यहां एक बड़े हॉल में क्‍वारंटाइन सेंटर बनाया गया है, जहां मेडिकल चेकअप होने से लेकर गाड़ी की व्यवस्था होने तक लोगों को ठहराया जा रहा है. लेकिन, इन सब व्यवस्थाओं में यहां भारी लापरवाही बरती जा रही है. लापरवाहियां इतनी कि भविष्य में अगर यह कोरोना का एपिक सेंटर निकल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. इस हॉल में दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात समेत विभिन्न राज्यों से आने वाले लोगों को ठहराया जा रहा है. यहां रुके लोगों का आरोप है कि सेंटर के अंदर गंदगी बिखरी पड़ी है. एक हीं गद्दो पर आने जाने वाले यात्री सो रहे हैं. इनके सैनेटाइजेशन की कोई व्यवस्था नहीं है. यहां ठहराए गए लोगों ने क्वारंटाइन सेंटर के वीडियो बनाकर भेजे हैं, जो हैरान कर देने वाले हैं.

वॉशरूम में पूरे फर्श पर पानी बिखरा पड़ा है



वॉशरूम में पूरे फर्श पर पानी बिखरा पड़ा है. वाॉश बेसिन इतने गंदे हैं, जिनको देखकर लगता है कि महीनों से इनकी सफाई नहीं हुई है. रविवार को अव्यवस्थाओं से तंग आकर यहां रोके गए लोगों ने जमकर हंगामा भी किया. लोगों की शिकायत है कि पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं हो रहा है. जो पानी मिल रहा है, उसमें क्लोरीन की इतनी तेज गंध है कि उसे पिया नहीं जा सकता. मेरठ से चमोली जाने के लिए आए एक परिवार का कहना था कि क्वारेंटिन सेंटर में एक साथ सबको ठूंस दिया जा रहा है. फिर चाहे वह महाराष्ट्र जैंसे रेड जोन एरिया से आया हो या किसी ग्रीन जोन एरिया से. लेागों को डर है कि वे अब कहीं इस क्वारंटाइन सेंटर में ही सबके बीच कहीं संक्रमित न हो जाएं.
 स्टाफ के लोग भी मानते हैं कि व्यवस्थाएं उचित नहीं हैं

वहां मौजूद स्टाफ के लोग भी मानते हैं कि व्यवस्थाएं उचित नहीं हैं. पुलिस पहले ही अन्य व्यवस्थाएं बनाने में व्यस्त है. प्रशासन का कोई आदमी मौके पर नहीं होता, जो क्वारेंटिन सेंटर की व्यवस्थाओं पर ध्यान दे सके. मौके पर मौजूद एक स्टॉफ नाम न छापने की शर्त पर कहता है कि हो न हो देर सबेर रायपुर का ये सेंटर कोरोना का एपिक सेंटर निकल जाए.

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