Corona लॉकडाउन खत्म होते ही बदली उत्तराखंड पुलिस! महिला को पीटने, बच्ची से रेप के मामले से उठे सवाल
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Corona लॉकडाउन खत्म होते ही बदली उत्तराखंड पुलिस! महिला को पीटने, बच्ची से रेप के मामले से उठे सवाल
उत्तराखंड पुलिस के लिए जनता के बीच अपनी छवि दुरुस्त करना बड़ी चुनौती साबित होने वाला है.

पुलिसकर्मी ही नहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की हरकतें भी उत्तराखंड पुलिस के मित्रता, सेवा, सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा रही है.

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देहरादून. कोरोना काल में लोगों की मदद कर सबसे ज्यादा वाहवाही लूटने वाली उत्तराखंड की मित्र पुलिस इन दिनों गलत वजह से सुर्खियों में है. पुलिसकर्मी ही नहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की हरकतें भी उत्तराखंड पुलिस के मित्रता, सेवा, सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा रही है. पुलिस आईजी जेल पीवीके प्रसाद ने थाने में एक किशोर की पिटाई की तो एक दारोगा को 11 साल की बच्ची से रेप के मामले में गिरफ़्तार किया गया. लेकिन सबसे ज़्यादा फजीहत उस वीडियो से हो रही है जिसमें पुलिसकर्मी महिला को पीटता दिख रहा है और हेलमेट से हमला करता हुआ भी.

थाने में बुलाकर पीटा 

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मी लोगों की मदद करते दिखे थे और न्यूज़ 18 ने भी कोरोना वॉरियर्स पुलिसकर्मियों के अच्छे कामों को सलाम करते हुए कई ख़बरें छापी थीं. लेकिन लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद लगता है पुलिस अपने पुराने रंग में लौट आई है.



आईजी जेल पीवीके प्रसाद पर एक किशोर को देहरादून के एक थाने में बुलाकर पीटने का मामला सबसे पहले सामने आया. प्रसाद ने पुलिसकर्मियों को भेजकर किशोर को घर से बुलवाया और बिना कोई मामला दर्ज किए उसकी थाने में जमकर पिटाई की. इससे पहले रुद्रपुर में सीपीयू कर्मियों ने एक युवक को चाभी घोंप दी थी.
पुलिस से विश्वास उठा 

देहरादून में ही 11 साल की मासूम से एक दारोगा ने घर के बाहर के शौचालय में रेप किया. हालांकि इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया और पॉक्सो के तहत उस पर केस भी दर्ज कर लिए हैं. महिला की पिटाई के मामले में पुलिस का कहना है कि उसने भी ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से हाथापाई की थी लेकिन क्या इससे पुलिसकर्मियों के महिला पर हमले को जस्टीफाई किया जा सकता है?

हेलमेट से पीटी गई महिला कलावती कहती हैं कि उनका पुलिस से विश्वास उठ गया है. उनके परिजन भी यही कहते हैं और आरोप लगाते हैं कि उन पर लगातार केस को रफ़ा-दफ़ा करने का प्रेशर बन रहा है.

छवि पर सवाल 

देहरादून के पुलिस कप्तान डीआईजी अरुण मोहन जोशी कहते है कि हर मामले की जांच की जा रही है. गलत इरादे से किए गए काम को बिल्कुल बर्दाश्त नही किया जाएगा. जोशी दावा करते हैं कि अभी तक आए सभी मामलों में कार्रवाई की गई है.

पुलिस दारोगा द्वारा बच्ची से दुष्कर्म मामले में अब एक कांस्टेबल को बच्ची के घर के बाहर तैनात कर दिया गया है. जब तक मामला चल रहा है तब तक हफ्ते में एक दिन सीओ सिटी को गश्त के लिए भी आदेश दिए गए हैं. लेकिन उत्तराखंड पुलिस का अपने कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का रिकॉर्ड सही नहीं है. पुलिस किसी न किसी तरह पुलिसकर्मियों को बचाती ही है भले ही वह कितने ही संगीन मामले के आरोपी क्यों न हों.

ऐसे में अब पुलिस अपनी छवि जनता के बीच में दोबारा कैसे दुरुस्त कर पाएगी, यह मित्रता, सेवा, सुरक्षा का दम भरने वाली उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है.
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