उत्तराखंड पुलिस को मिलीं 'सेक्सुअल एसॉल्ट एविडेंस कलेक्शन किट'... कन्विक्शन रेट बढ़ेगा?
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उत्तराखंड पुलिस को मिलीं 'सेक्सुअल एसॉल्ट एविडेंस कलेक्शन किट'... कन्विक्शन रेट बढ़ेगा?
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने देश भर की पुलिस को सेक्सुअल एसॉल्ट एविडेंस कलेक्ट किट SAECK उपलब्ध कराई है. उत्तराखंड पुलिस को ऐसी 117 किट मिली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

किट के सही इस्तेमाल के लिए अलग-अलग ज़िलों में थाने. चौकी स्तर पर चुनिंदा पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

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देहरादून. उत्तराखंड पुलिस को केंद्र सरकार से सेक्सुअल एसॉल्ट एविडेंस कलेक्टशन किट (SAECK) मिली हैं.. यौन हिंसा और दुष्कर्म जैसे अपराधों में मेडिकल जांच में देर होने से कई बार सबूत नष्ट हो जाते थे और इसकी वजह से ऐसे मामलों में अपराधी सज़ा से बच जाते थे. इस किट (SAECK) से दुष्कर्म और सेक्सुअल हैरेसमेंट जैसी घटनाओं में सबूत नष्ट होने से पहले वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र करने में मदद मिलेगी. हालांकि कानून के जानकारों का कहना है कि कि इससे पुलिस को केस मजबूत करने में तो सहायता मिलेगी लेकिन कोर्ट में डक्टर के द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र ही साक्ष्य के मान्य होगा.

उत्तराखंड को मिलीं 117 किट 

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने देश भर की पुलिस को सेक्सुअल एसॉल्ट एविडेंस कलेक्ट किट SAECK उपलब्ध कराई है. उत्तराखंड पुलिस को ऐसी 117 किट मिली हैं.



डीजी (कानून एवं व्यवस्था) अशोक कुमार का कहना है कि इस सुविधा को आधुनिक पुलिसिंग के बढ़ते कदम और दुष्कर्म जैसे अपराधों की सफलतापूर्वक जांच और अपराधियों को सज़ा दिलाने में मददगार के रूप में देखा जा रहा है. किट के सही इस्तेमाल के लिए अलग-अलग ज़िलों में थाने. चौकी स्तर पर चुनिंदा पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अभी राज्य के सर्किल स्तर पर ये किट मुहैया कराई गई हैं.
कन्विक्शन रेट बढ़ेगा?

पुलिस को दी गई इस 'सेक्सुअल एसॉल्ट एविडेंस कलेक्शन किट' में कुल 18 उपकरण हैं. इनके जरिए ब्लड सैंपल, सीमने जैसे सबूत वैज्ञानिक ढंग से एकत्र किए जा सकेंगे. माना जा रहा है कि इससे केस को मजबूत बनाने में पुलिस को मदद मिलेगी और कन्विक्शन रेट बढ़ेगा.

हालांकि कानून के जानकार पुलिस जितने आशावान नहीं हैं. देहरादून के क्रिमिनल लॉयर रजत दुआ कहते हैं कि इस तरह के टेस्ट्स से पुलिस को भले ही मदद मिलेगी लेकिन कोर्ट में इनकी कोई मान्यता नहीं है. उन्होंने बताया कि कोर्ट में पेश होने वाली मेडिकल रिपोर्ट को ही कोर्ट एविडेन्स के रूप में स्वीकार करता है.

SAECK की एक और सीमा है कि इससे दुष्कर्म के 30 मिनट से लेकर एक घण्टे के अंदर ही साक्ष्य एकत्र किए जा सकते हैं. अपराध होने के इतने कम समय के अंदर पुलिस पीड़ित तक पहुंच पाएगी इसकी संभावना बहुत कम होती है.
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