सरकार से रुख से निराश राज्य आंदोलनकारी, जवाबदेही से मुंह मोड़ना करार दिया

राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि शहीदों की बदौलत सत्ता सुख भोग रही सरकारें अब जनता के प्रति अपनी जवाबदेही से मुंह मोड़ रही हैं.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: December 4, 2018, 7:21 PM IST
सरकार से रुख से निराश राज्य आंदोलनकारी, जवाबदेही से मुंह मोड़ना करार दिया
राजधानी देहरादून स्थित राज्य आंदोलनकारी शहीद स्थल.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: December 4, 2018, 7:21 PM IST
नैनीताल हाईकोर्ट में रामपुर तिराहा कांड से जुड़ी याचिका में सरकार ने जो हलफ़नामा पेश किया है उसने एक बार फिर राज्य आंदोलनकारियों के घावों को हरा कर दिया है. हलफ़नामे में सरकार ने घटनास्थल उत्तर प्रदेश में होने के कारण शेष शिकायतों और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई से अपना पल्ला झाड़ दिया है. इससे आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि शहीदों की बदौलत सत्ता सुख भोग रही सरकारें अब जनता के प्रति अपनी जवाबदेही से मुंह मोड़ रही हैं.

उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आंदेालन के लिए दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों पर एक अक्तूबर 1994  को मुज्जफरनगर के रामपुर तिराहे पर यूपी पुलिस ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाही की थी. पुलिस फायरिंग में 28 आंदेालनकारी शहीद हो गए थे. सात महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म किया गया था और दर्जनों महिलाओं के साथ छेड़खानी की गई थी.

बाद में मामला हाईकोर्ट इलाहाबाद से लेकर सीबीआई और फिर नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. हाईकोर्ट ने इसी साल इस मामले का स्वत़ः संज्ञान लिया तो राज्य आंदेालनकारियों में एक बार फिर न्याय की उम्मीद जागी थी. लेकिन, सरकार के हलफ़नामे ने इस उम्मीद को तोड़ दिया.

सोमवार को आए कोर्ट के फैसले से एक बार फिर आंदेालनकारियों को भारी निराशा हाथ लगी है. आंदोलनकारियेां का कहना है कि सरकार ने हलफ़नामे में घटनास्थल उत्तर प्रदेश में होने के कारण  दोषियों पर कार्रवाई करने और पीड़ितों को मुआवज़े देने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश पर डालकर अपना पल्ला झाड़ लिया है.

सत्ताधारी दल भाजपा को इस मसले पर अब कुछ बोलते नहीं बन रहा है. जनभावनाओं से जुड़े इस मसले पर मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कुछ साफ़ नहीं कहा. हालांकि, राज्य आंदोलनकारियों को अब भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद है. आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान की मुज्जफरनगर कांड से जुडी एक याचिका पर सात दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है.

मुज्जफरनगर कांड को करीब 24 साल का समय हो चुका है. 18 साल का तो उत्तराखंड भी हो गया है. सत्ता की मारामारी और इस नए राज्य में मची संसाधनों की लूट में सरकारें वह सारे वादे भूल गई हैं जो इस राज्य की ज़हन पर लगी चोट पर मरहम लगाने के लिए किए गए थे.

'राज्य आंदोलनकारी आश्रित अध्यादेश पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे राज्यपाल'


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VIDEO: उत्तराखंड आंदोलन में खाई लाठियां, 23 साल से बिस्तर पर गुजार रहे हैं जिंदगी
First published: December 4, 2018, 7:14 PM IST
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