उत्तराखंड: बिजली की दरों को लेकर नियामक आयोग ने ली जनता की राय

उत्तराखण्ड नियामक आयोग अप्रैल महीने के अंत तक बिजली की नई दरों का प्रस्ताव पारित करने की तैयारियां कर रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)

उत्तराखण्ड नियामक आयोग अप्रैल महीने के अंत तक बिजली की नई दरों का प्रस्ताव पारित करने की तैयारियां कर रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)

इन उपभोगताओं का कहना था कि कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के चलते उद्योगों में बड़ा ही नुक्सान झेलने को मिला है और अब बिजली की मार बड़ेगी तो कहीं उद्योग बंद होने की कगार पर न पहुंच जाएं.

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देहरादून. राज्य में बिजली (Electricity) की नई दरों के लिए नियामक आयोग (Regulatory commission) ने शनिवार को देहरादून स्थित उत्तराखंड नियामक आयोग के मुख्यालय में जन सुनवाई की. सबेरे 10 बजे से शुरू हुयी जन सुनवाई में पहले उद्योग से जुड़े  प्रस्तावों को आयोग ने सूना और दूसरी पाली में 3 बजे से आम उप-उपभोगताओं के प्रस्तावों पर आयोग ने सुनवाई की. सभी उपभोगताओं ने बिजली टैरिफ में बढोतरी के विरोध में अपना पक्ष रखा, जहां एक और उद्योगों से जुड़े उपभोगताओं ने कोरोना महामारी में हुए हानियों पर अपना प्रस्ताव आयोग के सामने रखा. इन उपभोगताओं का कहना था कि कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के चलते उद्योगों में बड़ा ही नुक्सान झेलने को मिला है और अब बिजली की मार बड़ेगी तो कहीं उद्योग बंद होने की कगार पर न पहुंच जाएं.

वहीं, दूसरी पाली में शुरू हुयी जनसुनवाई में आये लोगों ने आयोग के सामने सरचार्ज को खत्म करने की बात रखी. जिसमें उपभोगताओं का कहना था कि सरकार ने उन उपभोगताओं का सरचार्ज समाप्त किया है जो लम्बे समय से बिजली का बिल जमा नहीं कर रहे थे. जो कि आने वाले समय में अन्य बिजली के उपभोगताओं को झेलना पड़ेगा.

खामियाजा आम जनता को उठना पड़ता है

दरअसल, उत्तराखण्ड नियामक आयोग अप्रैल महीने के अंत तक बिजली की नई दरों का प्रस्ताव पारित करने की तैयारियां कर रहा है. लेकिन राज्य में बिजली की नई दरें 1 अप्रेल से ही लागू की जाएंगी. जिसके लिए आयोग ने कसरत तेज कर ली है. जिसके लिए आयोग ने राज्य में दो जन सुनवाई की है. पहली जनसुनवाई 6 अप्रेल को नैनीताल जिले में की गयी तो दूसरी जनसुनवाई देहरादून मुख्यालय में रही. देहरादून में करीब 24 उपभोगता ही आज जनसुनवाई में पहुंचे, जिन्होंने बिजली के दाम न बढ़ने को लेकर आयोग के सामने प्रस्ताव रखा. साथ ही कहीं उपभोगताओं ने ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों में हुए घोटालों को लेकर भी आयोग के सामने अपना पक्ष रखा. जिसमें केबिल घोटला, मीटर घोटाला बिजली खरीद में हुए घोटाले सहित कई अन्य घोटालों की जनकारी नियामक आयोग को दी. उपभोगताओं का कहना है कि हर बार निगमों में हुए घोटालों से निगम लोस में रहते हैं और जिसका खामियाजा आम जनता को उठना पड़ता है.
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