उत्तराखंडः क्‍या अब पंजाब पर फोकस करेंगे हरीश रावत? 2022 में चुनाव लड़ने पर दे रहे गोल-मोल जवाब
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उत्तराखंडः क्‍या अब पंजाब पर फोकस करेंगे हरीश रावत? 2022 में चुनाव लड़ने पर दे रहे गोल-मोल जवाब
हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता हैं.

हाल ही में जब हरीश रावत (Harish Rawat) से पूछा गया कि 2022 में वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगे? तो उन्होंने जवाब दिया चुनाव लड़ना नहीं, लड़वाना जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 16, 2020, 5:41 PM IST
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देहरादून. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सीएम हरीश रावत (Harish Rawat) सुर्खियों में रहना जानते हैं. हाल ही में जब उनसे पूछा गया कि 2022 में वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगे? तो हरीश रावत ने फिर ऐसा जवाब दिया जिसके कई निहितार्थ निकाले जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना नहीं, लड़वाना जरूरी है. अब सियासी पंडित इस बात पर मगज खपा रहे हैं कि क्या हरीश रावत का पूरा फ़ोकस अब पंजाब पर होगा. हालांकि उत्तराखंड में रावत से चाहत रखने वाले चाहते हैं कि वह अपना ध्यान उत्तराखंड में केंद्रित करें.

बयान के मायने 

साल 2017 में पूर्व सीएम हरीश रावत किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण दो सीट से चुनाव लड़े थे और दोनों ही हार गए थे. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2022 में हरीश रावत किस सीट से चुनाव लड़ेंगे और क्या उन्होंने कोई सीट तय की है? हालांकि हरीश रावत ने इस सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय यह कह दिया कि चुनाव लड़ने से ज़रूरी, लड़वाना है.



राजनीति में बयानों के मायने निकाले जाते हैं और इस बार भी यही हो रहा है. तो क्या हरीश रावत का अब पूरा फ़ोकस पंजाब में चुनाव लड़वाने पर होगा? जहां कांग्रेस में सिर-फुटव्वल के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें प्रभारी बनाया है.
यहां हरदा की ही चाहत

पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2022 में होने हैं. ऐसे में दो राज्यों में ध्यान लगाना हरीश रावत के लिए आसान नहीं होगा लेकिन 2017 की हार के बाद भी कई कांग्रेस नेता ऐसे हैं जो चाहते हैं कि हरीश रावत ही पार्टी को लीड करें. पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का कहना है कि 2002 और 2012 में हरीश रावत सीएम नहीं बन पाए. लेकिन संगठन की ताकत हरदा ही थे. इसलिए 2022 में वो मेहनत की बात कर रहे हैं, मुख्यमंत्री बनने की नहीं.

हरीश रावत को हाई कमान ने पंजाब का प्रभारी बनाकर पार्टी में उनका कद भी बढ़ाया है और पद भी. साफ़ है कि पार्टी पंजाब में हरीश रावत के राजनीतिक अनुभव से फ़ायदा लेना चाहती है. ऐसे में सवाल है कि क्या उत्तराखंड में हरीश रावत अब संरक्षक बन कर रहेंगे, विधायक बनकर नहीं? क्योंकि वह खुद कह चुके हैं कि लड़ने से ज़्यादा ज़रूरी, चुनाव लड़वाना है.
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