उत्तराखंडः ऑनलाइन क्लास के चक्कर में तनाव के शिकार हो रहे हैं टीचर्स, 11 घंटे तक करना पड़ रहा है काम

एक साथ छात्र-छात्राओ को ऑनलाइन कनेक्ट करना, ऑनलाइन सिलेबस पूरा करवाना, छोटी-छोटी विंडो में सब पर नज़र रखना टीचर्स का खूब पसीना बहा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एक साथ छात्र-छात्राओ को ऑनलाइन कनेक्ट करना, ऑनलाइन सिलेबस पूरा करवाना, छोटी-छोटी विंडो में सब पर नज़र रखना टीचर्स का खूब पसीना बहा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कई स्कूल तो सैलेरी भी 20 प्रतिशत तक कम दे रहे हैं.

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देहरादून. पिछले 6 महीने में ऑनलाइन क्लास और ट्यूशन फीस का तो खूब हंगामा हुआ. स्कूल, अभिभावकों, बच्चों की तो काफ़ी बातें हुईं लेकिन शिक्षा में सबसे ज़रूरी दो चीज़ों में से एक- शिक्षक या टीचर (दूसरा छात्र) को लेकर कोई बात नहीं हुई. ऑनलाइन क्लास के औचित्य, उसके फ़ायदे, फ़ीस वसूली, बच्चों की समझ पर भी चर्चा हुई लेकिन फिर शिक्षक को लोग भूल गए. इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षकों के सामने चुनौती शायद सबसे ज़्यादा रही है और वह मानसिक दबाव में भी हैं. न्यूज़ 18 ने कुछ शिक्षकों के बात की तो उनका दर्द सामने आया.

मानसिक तनाव 

दरअसल कहने को तो ऑनलाइन क्लास सुविधाजनक है, हालांकि मजबूरी है, लेकिन इसमें झंझट कम नहीं हैं. एक साथ छात्र-छात्राओ को ऑनलाइन कनेक्ट करना, ऑनलाइन सिलेबस पूरा करवाना, छोटी-छोटी विंडो में सब पर नज़र रखना टीचर्स का खूब पसीना बहा रहा है.



प्राइवेट स्कूलों के टीचर्स स्कूल के प्रेशर को लेकर खुलकर बोल भी नहीं पा रहे लेकिन इतना ज़रूर है कि एक्स्ट्रा आवर, होमवर्क और असाइनमेंट तैयार करवाना टीचर्स के लिए परेशानी खड़ा कर रहा है. निजी स्कूल में पढ़ा रही बायोलॉजी की टीचर संजू सिंह बताती है कि 11-11 घंटे तक बच्चों को पढ़ाने में लग जाते है, ऊपर से सैलेरी भी कम हो गयी है. वह कहती हैं कि इससे मानसिक तनाव भी घेरता जा रहा है.
अब परीक्षाएं करवाने की चिंता 

स्टूडेंट्स भी बताते है कि टीचर्स के सामने भी प्रेशर कम नहीं है. नेटवर्क जाने के बाद कैसे टीचर्स को भी मुश्किल होती है, किसी को कुछ पूछना हो तो वो 2-3 बार कनेक्ट होने के बाद समझ आता है. अब अक्टूबर में कई स्कूल बच्चों के एग्ज़ाम करवाने जा रहे हैं.

ऐसे में कैसे बच्चों को पेपर करवाए जाएं और असाइनमेंट सबमिट करवाने से लेकर पेपर चेकिंग तक को योजना बनाते टीचर्स अभी से परेशान हैं. ऊपर से कई स्कूल तो सैलेरी भी 20 प्रतिशत तक कम दे रहे हैं जो पहले ही मुश्किलें झेल रहे टीचर्स पर और दबाव बना रहा है.
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