तकनीकी शिक्षा से मोहभंग! इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिर्फ़ 15% छात्रों ने लिया प्रवेश

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स रीजनल डायरेक्टर अनिल तनेजा कहते हैं कि राज्य में तकनीकी शिक्षा समय के साथ अपग्रेड नहीं हुई.

News18 Uttarakhand
Updated: September 13, 2018, 9:15 PM IST
तकनीकी शिक्षा से मोहभंग! इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिर्फ़ 15% छात्रों ने लिया प्रवेश
इस साल राज्य के 28 कॉलेजों में सिर्फ़ 15 फ़ीसदी छात्रों ने ही एडमिशन लिया.
News18 Uttarakhand
Updated: September 13, 2018, 9:15 PM IST
एक समय डॉक्टर और इंजीनियर सबसे शानदार करियर माने जाते थे लेकिन ये समय का फेर है या इंजीनियरिंग कॉलेजों की बदहाली उत्तराखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज खाली होते जा रहे हैं. इस साल राज्य के 28 कॉलेजों में सिर्फ़ 15 फ़ीसदी छात्रों ने ही एडमिशन लिया. एक्सपर्ट मानते हैं कि तकनीकी शिक्षा में उत्तराखंड पिछड़ रहा है और हालात नहीं सुधरे तो बेरोज़गारी के साथ शिक्षा क्षेत्र भी सिमटता जाएगा.

उत्तराखंड को शिक्षा का हब माना जाता है. शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों के लिए छात्र-छात्राएं उत्तराखंड आना पसंद करते हैं लेकिन तकनीकी शिक्षा के मामले में राज्य अब पिछड़ता जा रहा है. इस साल हुई इंजीनियरिंग काउंसलिंग के आंकड़े चौंकाने के साथ चिंता बढ़ाने वाले हैं.

2018 में राज्य के 28 इंजीनियरिंग कॉलेज की 8070 सीटों में से सिर्फ 1241 सीटों पर एडमिशन हुए, यानि कुल सीटों का सिर्फ 15 फ़ीसदी. इसका अर्थ यह हुआ कि ज़्यादातर कॉलेज खाली पड़े हैं तो सवाल है कि इतनी खराब हालात क्यों?

तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार डॉक्टर उदय सिंह रावत इसके लिए इंडस्ट्री में मंदी को ज़िम्मेदार बताते हैं. वह कहते हैं इसकी वजह से विद्यार्थियों का रुझान इंजीनियरिंग में कम हुआ है.

लेकिन इंडस्ट्री के लोग इससे सहमत नहीं हैं.

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स रीजनल डायरेक्टर अनिल तनेजा कहते हैं कि राज्य में तकनीकी शिक्षा समय के साथ अपग्रेड नहीं हुई. यहां के कॉलेज छात्रों को ऐसी शिक्षा देने में कामयाब नहीं रहे कि उन्हें कॉलेज से निकलते ही नौकरी मिल जाए और यही वजह है कि छात्रों का रुझान इनमें ख़त्म हो रहा है.

राज्य में साल 2002 में सिडकुल की स्थापना इस सोच के साथ की गई थी कि इंडस्ट्री के साथ उत्तराखंड के 70 फीसदी युवाओं को भी रोज़गार मिलेगा. लेकिन कॉलेजों में छात्रों को इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार नहीं किए जाने की वजह से इंडस्ट्री ने उन्हें मौका ही नहीं दिया. उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां रोज़गार की कमी से पलायन है, यह समस्या कई गुना हो जाती है. न सिर्फ़ युवाओं को प्रोफ़ेशनल क्वालिफ़िकेशन के बाद भी रोज़गार के लिए भटकना पड़ रहा है वहीं शिक्षा के क्षेत्र के भी सिमटने का ख़तरा पैदा हो गया है.
Loading...

(देहरादून से दीपांकर भट्ट की रिपोर्ट)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 13, 2018, 8:41 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...