उत्तराखंड: कोरोना संक्रमण के डर से बाॅर्डर पर सख्ती, जांच के बाद ही मिलेगी एंट्री

कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहा है.
कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहा है.

उत्तराखंड (Uttarakhand) में कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके तहत सरकार ने महामारी एक्ट के तहत सख्ती के निर्देश दिए हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके तहत सरकार ने महामारी एक्ट के तहत सख्ती के निर्देश दिए हैं. खासकर लोगों की आवाजाही पर विशेष नजर रखने कहा गया है. इसको लेकर दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं. उत्तराखंड में बार्डर व चेक पोस्ट इलाकों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश पुलिस व प्रशासन को दिए गए हैं. इसके तहत बगैर जांच के किसी की भी एंट्री बैन की गई है. हर व्यक्ति की थर्मल जांच के बाद ही उसे एंट्री देने कहा गया है. लक्षण वाले व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है.

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक जिला प्रशासन बॉर्डर चेक पोस्ट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट बस स्टैंड पर आने वाले सभी व्यक्तियों की थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है. यदि किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण मिलते हैं तो उसे जिला प्रशासन की देखरेख में संचालि कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया जा रहा है. उत्तराखंड सरकार का दावा है कि इससे कोरोना वायरस के संक्रमण पर रोक लग सकेगी.


कोरोना वायरस से परिवहन विभाग को नुकसान
बता दें कि उत्तराखंड में भी कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. उत्तराखंड में इस साल परिवहन विभाग को 174 करोड़ रुपयों का घाटा हुआ है. इसके अलावा तकरीबन 250 करोड़ की देनदारी बची है. ऐसे परिवहन निगम, अब कैसे इस घाटे से उबरे इसपर कसरत कर रहा है. इसमें निगम अपनी उस ज़मीन को इस्तेमाल भी करेगा जो निगम के काम की ही नहीं है. उत्तराखंड परिवहन निगम की बस पिछले 6 महीने से दूसरे राज्यों में नहीं चल रही हैं, जिस वजह से निगम की कमाई शून्य हो गयी है. इंटरस्टेट बस ही निगम की डोर थामें हैं. ऐसे में अब इस घाटे की भरपाई परिवहन निगम अपनी बस की रिटायरमेंट सीमा बढ़ाने के साथी ही ड्रोन होटल के पास की ज़मीन और वर्कशॉप में इस्तेमाल ना होने वाली जमीनों को एमडीडीए और पर्यटन विभाग के साथ मिलकर इस्तेमाल करने की प्लानिंग में है.
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