उत्तराखंड में तबादलों को लेकर मचा बवाल, कर्मचारी संगठनों में आक्रोश

25 जून को ट्रांसफर सत्र समाप्त होने के बावजूद विभागों में अभी तक बैक डेट पर ट्रांसफर किए जा रहे हैं.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 3, 2019, 4:55 PM IST
उत्तराखंड में तबादलों को लेकर मचा बवाल, कर्मचारी संगठनों में आक्रोश
देहरादून - कर्मचारी यूनियनों ने बड़े पैमाने पर पैसे की लेन देन की आशंका भी जताई.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 3, 2019, 4:55 PM IST
उत्तराखंड में ट्रांसफर को लेकर एक बार फिर बवाल शुरू हो गया है. राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ समेत तमाम संगठनों ने कई विभागों में ट्रांसफर एक्ट को दरकिनार कर कार्मिकों के ट्रांसफर करने का आरोप लगाया है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी से नियमों को ताक पर रखकर कार्मिकों के ट्रांसफर किए हैं. 25 जून को ट्रांसफर सत्र समाप्त होने के बावजूद विभागों में अभी तक बैक डेट पर ट्रांसफर किए जा रहे हैं. विभागों में आपस में सामंजस्य नहीं है. कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि कोई स्थान अगर दुर्गम क्षेत्र की श्रेणी में आता है तो वो सभी विभागों के लिए दुर्गम ही होना चाहिए. लेकिन यहां विभाग अपने-अपने हिसाब से सुगम और दुर्गम दर्शा रहे हैं.

नहीं बनाई गई मॉनिटरिंग कमेटी 
नियमानुसार सुगम से दुर्गम और दुर्गम से सुगम में ट्रांसफर होने थे. लेकिन शिक्षा जैसे विभाग में सुगम वाले को सुगम में ही ट्रांसफर कर दिया गया. एक्ट के अनुसार सभी विभागों में 10 फीसदी ट्रांसफर होने हैं. लेकिन अधिकारी इसकी व्याख्या अपने हिसाब से कर रहे हैं. विभाग के कुल पदों के सापेक्ष 10 फीसदी ट्रांसफर किए जा रहे हैं जबकि ट्रांसफर की श्रेणी में आने वाले कार्मिकों के सापेक्ष 10 फीसदी ट्रांसफर होने थे. लेकिन राज्य में कोई भी ऐसी मॉनिटरिंग कमेटी बनाई ही नहीं गई है जो अनियमितताओं पर ध्यान दे. उन्होंने ट्रांसफर में बड़े पैमाने पर पैसे की लेन देन की आशंका भी जताई है.

एक नजर ट्रांसफर एक्ट के जिन मुख्य बिंदु पर कर्मचारी यूनियनों को आपत्ति है-

* विभागों में ट्रांसफर की जो 10 फ़ीसदी सीमा रखी गई है उसका अलग-अलग विभाग अलग-अलग तरीके से निर्धारण कर रहे हैं. कहीं जनपद स्तर पर कुल कर्मचारियों का 10 फ़ीसदी का मानक लिया जा रहा है तो कहीं प्रदेश स्तर पर कुल कर्मचारियों का 10 फ़ीसदी का मानक.

* एक्ट के अनुसार सीनियरिटी को परिभाषित नहीं किया जा रहा है. एक्ट कहता है कि जो दुर्गम में सबसे अधिक सेवाएं दे चुका हो उसको सुगम में सबसे पहले प्राथमिकता दी जाए और जो सालों से सुगम में रह रहा हो उसको सबसे पहले दुर्गम में ट्रांसफर किया जाए. लेकिन किसी भी विभाग में इसका पालन नहीं किया जा रहा है. चहेतों को सबसे पहले ट्रांसफर दिया जा रहा है.

* एक्ट के अनुसार ट्रांसफर के लिए प्रत्येक विभाग में कमेटियां बनेंगी. लेकिन वर्तमान समय में किसी भी विभाग में कमेटी नहीं बनाई गई है. कर्मचारी संघों का कहना है कि जिला, प्रांत स्तर पर कमेटियां बनाई जाए और उनमें कर्मचारी संघों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए ताकि समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण हो सके.
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* कर्मचारी संघों का कहना है कि ऑफिस की लोकेशन के आधार पर जगह को सुगम न माना जाए बल्कि कार्य स्थल के आधार पर सुगम और दुर्गम का निर्धारण किया जाए.

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First published: July 3, 2019, 4:55 PM IST
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