उत्तराखंड: कोरोना काल में सरकारी नौकरियों की चाह, बीजेपी ने कही ये बात

उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की मांग की जा रही है.
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की मांग की जा रही है.

उत्तराखंड (Uttarakhand) में नौकरी चाहे संविदा से हो या उपनल के जरिये हर किसी की चाह सरकारी विभाग (Government Department) में फिट होना है.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में नौकरी चाहे संविदा से हो या उपनल के जरिये हर किसी की चाह सरकारी विभाग (Government Department) में फिट होना है. अब कोरोना (Corona) के चलते लोगों के कांट्रेक्चुअल नौकरी जाने लगी तो लोग भी सरकार से नौकरी की डिमांड कर रहे हैं, मगर मुश्किल ये है कि सरकार भी हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी दे तो कैसे दे. उत्तराखंड में कांट्रेक्चुअल बेसिस पर काम कर रहे कर्मचारी परमानेन्ट होने की आस में सालों से विभागों में काम करते है, लेकिन अब कोरोना काल में टेंडर निरस्त या बदलने से कई नौकरी जाने से मुश्किलें बढ़ गयी है.

लोग भी सरकार पर नौकरी जाने का ठीकरा फोड़ रहे है. जबकि असलियत ये है कि इन एजेंसी या संविदा पर काम कर रहे. कर्मचारियों को एजेंसी ही हायर करती है. ऐसे में ये लोग अपनी नौकरी जाने पर सरकार पर ही ठीकरा फोड़ते है. बीजेपी के प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि सभी का ख्याल रखना सरकार का काम है और वो कर रही है, जिन लोगों की नौकरी गई है उनको रोज़गार से जोड़ा जा सके यही सरकार की प्राथमिकता है. जबकि कांग्रेस की तरफ से प्रवक्ता आरपी रतूड़ी कहते हैं कि सरकार को नौकरी का झुंझना नही पकड़ाना चाहिए, प्लानिंग के तहत लोगों को नौकरी देनी चहिये.

सरकार की मजबूरी
वहीं जानकार मानते है कि सरकार की मजबूरी है. उन्हें वोट बैंक के लिए सबकी सुननी होती है. इसलिए हाथ बंधे होने के कारण भी वो जनता को आश्वासन ही देते हैं. दिनेश जुयाल, वरिष्ठ पत्रकार मानते हैं कि नौकरी उपनल के जरिये देने की बात तो की, लेकिन क्राइटिरिया तय नही हो पाया. वोटबैंक को ध्यान में रखते हुए पार्टी लोगों को उम्मीद ही बंधाती है. अब सरकार के लिए मुश्किल ये है कि सरकारी विभाग में संविदा और उपनल के जरिए काम करने वाले कर्मचारी भी खुद को विभाग में परमानेन्ट करने की मांग कर रहे हैं. जबकि ऐसा हर बार होना संभव नहीं है.
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