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कोरोना की दहशत से गांवों को लौटे हज़ारों प्रवासी उत्तराखंडी... ग्रामीणों में दहशत और गुस्सा
Dehradun News in Hindi

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: March 25, 2020, 5:10 PM IST

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पौड़ी गढ़वाल. राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जो गांव अपनों के पलायन के चलते वीरान हो चले थे वे आजकल उन्हीं अपनों के वापस लौटने के बाद भर गए हैं. लेकिन गांव में पहले से मौजूद लोग जैसे सामान्यतः इन प्रवासी ग्रामीणों के वापस लौटने पर स्वागत करते थे वह नहीं हुआ और कोरोना की दहशत के चलते ग्रामीण इन लोगों से दूरी बनाए हुए हैं. सिर्फ़ दूरी ही नहीं गांव लौटे प्रवासियों के प्रति ग्रामीणो में न सिर्फ़ संदेह और डर है बल्कि गुस्सा भी है.

वापस न आने दे सरकार

विभिन्न कारणों से हुए पलायन के कारण सूने और लगभग खंडहर हो चुके पर्वतीय क्षेत्रों के जिन गांवों में वहीं की मिट्टी में पले-बढ़े लोग सरकार के ढेरों प्रयासों के बावजूद वापस लौटने के लिए तैय्यार नहीं हुए उन्हें कोरोना के खौफ ने वापस लौटने को मजबूर कर दिया है. पहाड़ी जिलों के गांवों में कोरोना के कारण पहुंचे हज़ारों लोगों से पहले से मौजूद ग्रामीणों ने दूरी बना ली है, स्वागत करना तो दूर की बात है.

ग्रामीण तो यह भी मांग कर रहे हैं कि सरकार ऐसे लोगों के गांव आने पर रोक लगाए ताकि कोरोना की महामारी पहाड़ी क्षेत्रों में न फैले.



नज़र रखे हुए है पुलिस 

अकेले पौड़ी जिले में ही लगभग 7000 लोग हाल ही में वापस लौटे हैं. आसपास लगते दूसरे सटे जिलों को मिला दें तो यह आंकड़ा दोगुने से भी अधिक है. शहरों की अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं को छोड़ गांव पहुंचे प्रवासी ग्रामीण यदि कोरोना संक्रमित हुए तो स्थिति भयावह हो सकती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद अस्पतालों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और संसाधनों की बेहद कमी है.

स्वास्थ्य विभाग ऐसे हालात में मजबूरी ज़ाहिर कर रहा है और पुलिस संदिग्ध कोरोना पीड़ितों पर नज़र रखने की बात कह रही है.

ये हेल्थ सिस्टम कैसे संभालेगा बोझ 

खास बात यह है कि कोरोना की दहशत ने गांवों की संस्कृति के मेल मिलाप, सहयोग और एक दूसरे से प्यार के रिश्तों में भी दूरी ला दी है. गांवों में प्रवासी ग्रामीणों के पहुंचने के विरोध से अटूट रिश्तों में दरार भी पैदा हो गई है.

भले ही स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ऐसे लोगों को घरों में ही क्वारंटीन कर उन पर नज़र रखने की दुहाई दे रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे घर, दूरस्थ क्षेत्र और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के बीच फेल हैल्थ सिस्टम कब कोढ़ में खाज का काम कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता.

 

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First published: March 25, 2020, 5:10 PM IST
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