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उत्तराखंड में अफसरशाही हावी? सरकार और विधायकों की बात नहीं सुनती पुलिस!

डीजीपी को जिलों में विधायकों के साथ प्रत्येक महीने कॉऑर्डिनेशन मीटिंग करने के भी निर्देश देने पड़े हैं.

डीजीपी को जिलों में विधायकों के साथ प्रत्येक महीने कॉऑर्डिनेशन मीटिंग करने के भी निर्देश देने पड़े हैं.

डीजीपी को अपने ऑफिसरर्स को सख्त निर्देश जारी करने पड़े कि जनप्रतिनिधियों की बातों को सम्मान के साथ सुना जाए. डीजीपी को ...अधिक पढ़ें

देहरादून. उत्तराखंड में अफसरशाही हावी रहने की खबरें जब तब सुर्खियां बनती रहती हैं, लेकिन अब पुलिस भी निशाने पर है. खुद सत्तापक्ष के विधायकों ने इस बात की शिकायत की है कि जिलों के पुलिस अधिकारी बात सुनना तो दूर कई बार फोन तक नहीं उठाते हैं.

दरसअल, जनता अपनी शिकायतों को लेकर विधायकों के पास जाती है, लेकिन जब विधायक ही खुद पीड़ित हो तो इसे क्या कहा जाए. सत्तारूढ़ बीजेपी के एक दो नहीं कई विधायक इस बात से परेशान हैं कि पब्लिक जब उनके पास आती है और उन्हें कई मामलों में जब एसएसपी या एसपी को फोन करना होता है तो पुलिस ऑफिसर्स उनका फोन नहीं उठाते या उनकी बात को तव्वजो नहीं देते हैं. विधायक खजानदास ने देहरादून एसएसपी की शिकायत की तो अन्य विधायकों को भी कुछ इसी तरह की शिकायतें हैं. खजानदास, विधायक, राजपुर ने कहा कि पुलिस के अधिकारी हमारी बात नहीं सुनते हैं.  राजकुमार पोरी, विधायक, पौड़ी का भी कुछ ऐसा ही कहना है. विपक्षी विधायकों का कहना है कि हमने विधानसभा सेशन में भी ये मामला उठाया है.

पुलिस पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं पुलिस अपना काम छोड़कर अन्य कामों में ज्यादा एक्टिव दिखाई देती है. विधायक भुवन कापड़ी का कहना है कि लॉ इन ऑर्डर में मजबूत कदम उठाए जाने की जरूरत है.  हालांकि, सत्तारूढ़ बीजेपी विधायकों की इस शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रूख दिखाया है. नतीजा, डीजीपी को अपने ऑफिसरर्स को सख्त निर्देश जारी करने पड़े कि जनप्रतिनिधियों की बातों को सम्मान के साथ सुना जाए. डीजीपी को जिलों में विधायकों के साथ प्रत्येक महीने कॉऑर्डिनेशन मीटिंग करने के भी निर्देश देने पड़े हैं.

Tags: BJP Uttarakhand, Uttarakhand Police

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