उत्तराखंड में आम लोगों को लग सकता है बिजली बिल का झटका, 16% तक दाम बढ़ाने की तैयारी!

(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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Uttarakhand News: उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन समेत अन्य निगमों ने साल 2021-22 के लिए 16 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ नई दरों का प्रस्ताव सौंपा. नियामक आयोग के फैसले के बाद लागू हो सकती है बिजली की नई दरें.

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देहरादून. उत्तराखंड की जनता को साल 2021-22 में बिजली के बिल का झटका लग सकता है. यूपीसीएल (उत्तराखंड पावर कारपोरेशन), यूजेवीएनेल (जल विद्युत निगम) और पिट्कुल (पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड) ने राज्य के नियामक आयोग में खर्चों का टैरिफ पिटिशन दाखिल कर दी है. इस पर जल्द ही नियामक आयोग सुनवाई कर 2021-22 के लिए बिजली की दरें निर्धारित कर सकता है. दरअसल, आम तौर पर मार्च महीने में उत्तराखंड नियामक आयोग बिजली की दरों का टैरिफ जारी कर देता था. लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस बार बिजली की दरें अप्रैल माह में घोषित होंगी, जो 1 अप्रेल से लागू की जाएंगी.

बिजली के दामों की घोषणा करने से पहले नियामक आयोग तीनों निगमों द्वारा दी गई पिटिशन पर जनता से राय लेगा, जिसके लिये इस साल दो जिलों में जनसुनवाई की जाएगी. पहली सुनवाई 6 अप्रैल को नैनीताल में और दूसरी जनसुनवाई देहरादून के उत्तराखंड नियामक आयोग के दफ्तर में होगी.

इन जनसुनवाई के बाद ही टैरिफ को अंतिम रूप दिया जाएगा . राज्य के तीनों निगमों ने आयोग को करीब 16 फीसदी बिजली बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है.

बिजली दर का निर्धारण
हालांकि राज्य में होने वाली दोनों जनसुनवाई के बाद, इसकी समीक्षा की जाएगी, जिसके आधार पर नई दर निर्धारण किया जाएगा. वहीं नियामक आयोग के टेक्निकल मेम्बर एमके जैन का कहना है कि बीते सालों में राज्य में 4 जन सुनवाई की जाती थी, जिनमें 2 कुमायूं मंडल और 2 सुनवाई गढ़वाल मंडल में होती थी. लेकिन इस बार दो ही जन सुनवाई की जाएगी, जिसमे नैनीताल और देहरादून को चुना गया है.

उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के मद्देनजर जनसुनवाई को दो हिस्सों में रखा गया है. इसमें पहली पाली में इंडस्ट्रियल से जुड़े लोगों को रखा गया है और दूसरी पाली में आम जनता के साथ कोमर्शियल उपभोगताओं को रखा गया है. बता दें कि इस समय यूपीसीएल ने आयोग से 13.25 % की बढ़ोतरी की मांग की है. युजेवीएनेल ने 1.96% और पिटकुल ने आयोग से 0.82 की बढ़ोतरी की मांग की है. इस हिसाब से टोटल 16.20% बढोरी का प्रस्ताव तीनों निगमों से राज्य के नियामक आयोग के पास पहुंचा है.
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