जब कृषि मंत्री ने Chief Secretary से पूछा- उत्तराखंड में कितने मुख्य सचिव हैं!
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जब कृषि मंत्री ने Chief Secretary से पूछा- उत्तराखंड में कितने मुख्य सचिव हैं!
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल

उत्तराखंड सरकार ने इकोनॉमिक रिवाइवल कमेटी का गठन किया है. मुख्य सचिव ने यह पत्र जारी किया और उसकी प्रतिलिपि खुद को भेज दी. कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल (Subodh Uniyal) ने इस पर मुख्य सचिव को व्हाट्सएप से वही पत्र वापस भेजकर पूछा है कि राज्य में कितने मुख्य सचिव हैं?

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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने कोरोना संकट (Corona Crises)के चलते उत्पन्न हुए आर्थिक संकट (Economic Crises) से उबरने के लिए रिटायर्ड आईएएस अफसर एवं राज्य के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे (Indu Kumar Pande) की अध्यक्षता में एक इकोनॉमिक रिवाइवल कमेटी का गठन किया है. इसके साथ ही कृषि मंत्री सुबोध उनियाल (Agriculture Minister Subodh Uniyal) की अध्यक्षता में किसानों के मसले देखने के लिए पांच सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी का भी गठन किया गया है. दोनों कमेटियों की घोषणा एक साथ की गई. इनमें से इंदु कुमार पांडे वाली कमेटी तो अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सरकार को सौंप चुकी है, लेकिन कैबिनेट कमेटी के सदस्यों को कमेटी गठन की विधिवत सूचना ही मंगलवार यानि पांच मई को मिली. इस कमेटी में राज्य मंत्री रेखा आर्य, धन सिंह रावत, चीफ सेक्रेटरी उत्पल कुमार सिंह और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ओम प्रकाश को रखा गया है.

मुख्य सचिव ने जारी किया पत्र, फिर ऐसा क्यों किया?

पांच मई को जारी यह आदेश पत्र स्वयं मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी हुआ है. लेकिन, इसमें प्रतिलिपि सूचनार्थ भेजी गई हैं. उसमें पहले नंबर पर भी मुख्य सचिव उत्तराखंड लिखा गया है यानि की जिस पत्र को मुख्य सचिव जारी कर रहे हैं, वे खुद अपने को ही उसी पत्र की सूचनार्थ प्रतिलिपि भी भेज रहे हैं. कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने इस पर चुटकी ली है. उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को व्हाट्सएप से वही पत्र वापस भेजकर पूछा है कि राज्य में कितने मुख्य सचिव हैं?



कृषि मंत्री कई बार अधिकारियों को लगा चुके हैं झाड़
हालांकि इस संवाददाता के समाचार लिखे जाने तक मुख्य सचिव की ओर से व्हाट्सएप मैसेज पर कोई रिएक्सन नहीं आया था. ये बात अलग है कि ये मुख्य सचिव कार्यालय की एक टाइपिंग भूल भर हो सकती है. वहीं दूसरी ओर अपनी बेबाकी के लिए पहचाने जाने वाले कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल पहले भी कार्यालयों में स्टाफ के कामकाज के तौर तरीकों आदि में प्रोटोकॉल का पालन किए जाने के हिमायती रहे हैं. वे कई बार अपने बेबाक अंदाज में अफसरों को डांट भी लगा चुके हैं.

दूसरी तरफ कोरोना के मददेनजर हाल ही में सरकार ने प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम बनाकर जिले के प्रभारी मंत्री को प्रवासियों को लाने ले जाने के मददेनर कॉर्डिनेशन और मॉनि​टरिंग के लिए जिले का प्रभारी भी बनाया.

'कंट्रोल रूम में मं​त्रियों के नंबर जारी करने से हुई परेशानी'

कृषि मंत्री का कहना है कि शासन के अफसरों ने इसके बाद जिला कंट्रोल रूम के जो नंबर जारी किए, उनमें प्रभारी मंत्रियों के व्यक्तिगत मोबाइल नंबर दे दिए. कंट्रोल रूम के नंबरों की लिस्ट जैसे ही जारी हुई तो इन नंबरों पर देश-विदेश में फंसे लोग धड़ाधड़ फोन करने लगे. फोन की घंटी बजते ही कॉलर सीधे पूछता है कि क्या आप कंट्रोल रूम से बोल रहे हैं. अनौपचारिक बातचीत में मंत्री ने कहा कि कई बार तो उन्होंने कहा कि कि हाँ मैं कंट्रोल रूम से बोल रहा हूं.सुबोध उनियाल का कहना है कि बिना मंत्रियों के पूछे उनके नंबर अफसरों ने कंट्रोल रूम में जोड़कर सार्वजनिक कर दिए, जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन है और इससे उन्हें परेशानियां उठानी पड़ रही हैं.

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