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Uttarakhand Election: कांग्रेस की जन आक्रोश रैली में जुटने वाली भीड़ से तय होगा किस नेता में कितना दम?

उत्तराखंड में आगामी 14 मार्च से कांग्रेस पार्टी जन आक्रोश रैलियों का आयोजन करेगी.

उत्तराखंड में आगामी 14 मार्च से कांग्रेस पार्टी जन आक्रोश रैलियों का आयोजन करेगी.

उत्तराखंड के अलग-अलग स्थानों पर आगामी 14 मार्च से कांग्रेस जन आक्रोश रैली की तैयारी कर रही है. हर रैली उन नेताओं के दम-खम का भी इम्तिहान है, जो 2022 चुनाव में दावेदारी की तैयारी में हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस, अब अपने नेताओं के 'दम-खम का इम्तिहान' लेने वाली है. पार्टी ने इसके लिए व्यापक योजना बनाई है. आगामी 14 मार्च से कांग्रेस पूरे प्रदेश में जन आक्रोश रैली की शुरुआत करने वाली है, जिसमें आने वाली भीड़ ही अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट के दावेदारों की 'ताकत' का पहचान होगी.

कांग्रेस पार्टी ने 14 मार्च से लेकर अगले 10 दिन के अंतर में राज्य के 8 जिलों में रैली का प्रोग्राम बनाया है. हर रैली कांग्रेस के लोकल नेताओं और चुनावी टिकट के उम्मीदवारों का इम्तिहान होगी. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लोगों ने अब तक प्रदेश की राजधानी देहरादून में धरने और प्रदर्शन देखे हैं, लेकिन जिलों में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के दावेदार नेता कितने तैयार हैं, इसका अंदाज़ा जन आक्रोश रैली में जुटने वाली भीड़ से लगेगा.

कांग्रेस के स्टेट कॉर्डिनेटर सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि ज़िले के नेताओं, पूर्व विधायकों, ब्लॉक लेवल के नेताओं, जो टिकट के दावेदार हैं, उनसे कहा गया है कि वो बड़ी से बड़ी संख्या में जनता को लेकर पहुंचें. कांग्रेस की पहली जन आक्रोश रैली श्रीनगर में होगी, जहां 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रैली ने कई सीटों का माहौल बदल दिया था. ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी और कांग्रेस के दावेदारों के सामने यह चुनौती है कि 2022 के लिए वह किस हद तक अपने पक्ष में माहौल बना पाते हैं. कांग्रेस नेता जनता को कितनी बात समझा पाते हैं, ये तो वक्त ही बताएगा, मगर फिलहाल नेताओं का फोकस दम दिखाने पर है.



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श्रीनगर से कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक गणेश गोदियाल का कहना है कि रैली में बड़ी संख्या में लोग आएंगे. प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार ने क्या नहीं किया है, ये जनता को बताया जाएगा. गौरतलब है कि उत्तराखंड में कांग्रेस नेताओं को 10 महीने के बाद सबसे बड़े इम्तिहान से गुजरना है. यह इम्तिहान विधानसभा का चुनाव होगा. जनता का मूड, नेता का चेहरा और कांग्रेस की तैयारी तय करेगी कि उसके नेता इन परीक्षाओं में पास होते हैं या नहीं.
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