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Dehradun में हैं तो सावधान! हरियाली में हो सकता है हरे रंग का खतरनाक पिट वाइपर, खुद भी खतरे में है यह सांप!

Dehradun में हैं तो सावधान! हरियाली में हो सकता है हरे रंग का खतरनाक पिट वाइपर, खुद भी खतरे में है यह सांप!

खतरनाक सांप को रेस्क्यू करते हुए विशेषज्ञ वनकर्मी.

खतरनाक सांप को रेस्क्यू करते हुए विशेषज्ञ वनकर्मी.

यूं तो देहरादून में सांपों का मिलना नयी बात नहीं है, लेकिन व्हाइट लिप्ड पिट वाइपर पहली बार मिला है. इस सांप की यहां मौजूदगी कई मायनों में खास है. जानिए IUCN की रेड लिस्ट में शामिल इस सांप के डसने से आपको किस तरह खतरा होता है और यह सांप ही खुद क्यों खतरे में है.

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देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी में पहली बार व्हाइट लिप्ड पिट वाइपर सांप को रेस्क्यू किया गया है. यह सांप प्रकृति संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय संघ यानी आईयूसीएन की रेड लिस्ट में शामिल है. रेड लिस्ट में शामिल होने का मतलब यह है कि सांप की यह प्रजाति अस्तित्व के खतरे से जूझ रही है. पिट वाइपर सांप हरे रंग का होता है. आंखों के नीचे का भाग पीला या सफेद होता है या फिर शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में हल्का हरा होता है. ये हरी घास या पेड़ों पर छिपकर अपने शिकार पर हमला करता है. हरे रंग का होने के कारण ये आसानी से नजर नहीं आता.

वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सहस्रधारा से एक व्यक्ति ने कॉल करके इस सांप की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी थी. डीएफओ नीतीश मणि त्रिपाठी ने रेस्क्यू टीम को मौके पर जाने को कहा. रेस्क्यूअर जितेंद्र बिष्ट के नेतृत्व के मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने घर के आंगन में पेड़ में लिपटे पिट वाइपर को रेस्क्यू किया. बिष्ट ने बताया कि IUCN की रेड लिस्ट में शामिल इन सांपों को कई देशों में लोग भोजन और दवाइयों के रूप में प्रयोग करते हैं. तस्करी के चलते पिट वाइपर के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है.

सांपों के लिए जाना जाता है यह इलाका

देहरादून और इसके आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सांप पाए जाते हैं. यहां कोबरा जैसे जहरीले सांप भी पाए जाते हैं. कई बार पायथन जैसे बड़े सांपों को भी रेस्क्यू किया जा चुका है. यही कारण है कि उत्तराखंड में सांप के डसने से मौतों का आंकड़ा भी अच्छा खासा है. 2021 में सांप के डसने से 21 लोगों की मौत रिकॉर्ड की गई. उत्तराखंड में सांप के डसने से मौत पर जंगली जानवरों की तरह मुआवज़े का भी प्रावधान है. सांप के डसने से मौत पर तीन लाख का मुआवजा दिया जाता है.

यह भी गौरतलब है कि उत्तराखंड में अभी तक सांपों की 37 प्रजातियां रिकॉर्ड की गई हैं, लेकिन पिट वाइपर पहली बार मिला है. यह जहरीला सांप है, जिसके काटने के बाद काटे गए स्थान पर सूजन शुरू हो जाती है. व्यक्ति को यदि समय पर उपचार न मिले तो खून का थक्का बनना शुरू हो जाता है और मौत हो जाती है.

Tags: Snake Rescue, Uttarakhand Forest Department

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