दिल्‍ली का कन्‍फ्यूजन उत्‍तराखंड के लिए बना मुसीबत! पंचायत चुनावों में होगा सकता है नुकसान

जब पार्टी राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के चयन को लेकर असमंजस में है तो राज्‍य में पार्टी के बड़े नेता भी संगठन स्तर के बड़े निर्णय नहीं ले रहे हैं. जबकि पंचायत चुनाव के अलावा पिथौरागढ़ विधानसभा चुनाव सामने है.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 28, 2019, 4:31 PM IST
दिल्‍ली का कन्‍फ्यूजन उत्‍तराखंड के लिए बना मुसीबत! पंचायत चुनावों में होगा सकता है नुकसान
उत्‍तराखंड कांग्रेस के लिए पंचायत चुनाव सबसे बड़ी चुनौती है.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 28, 2019, 4:31 PM IST
कांग्रेस को अभी भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का इंतजार है. अब तक सीडब्ल्यूसी की कई बैठक हो चुकी हैं, लेकिन राष्‍ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर मुहर नहीं लग पाई. ऐसे में उत्तराखंड कांग्रेस में भी कार्याकर्ताओं के बीच असमंजस के हालात हैं.

कांग्रेस में अभी सेनापति तय नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से उत्तराखंड की प्रदेश ईकाई में भी कई तरह का कन्‍फ्यूजन है. कार्यकर्ता एक्टिव मोड़ में आने से पहले दिल्ली का मुंह ताक रहे हैं. यकीनन उनके जेहन में नए हालातों में खुद को ढालने की चुनौती है इसलिए संगठन में एक ठहराव सा आ गया है.

बड़े नेता नहीं कर पा रहे हैं ये काम
जब पार्टी राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के चयन को लेकर असमंजस में है तो राज्‍य में पार्टी के बड़े नेता भी संगठन स्तर के बड़े निर्णय नहीं ले रहे हैं. यही वजहहै कि प्रदेश कार्यकराणी अभी तय नहीं हो पाई है और एक लंबा वक्त गुजर गया है. जबकि प्रदेश में निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव पुरानी कार्यकारणी ने ही निपटा दिए. हालांकि पुरानी कार्यकारणी के पदाधिकारियों में से कई की ट्यूनिंग मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष से ठीक नहीं है. ऐसे में आगे पंचायत चुनाव और एक विधानसभा का उपचुनाव भी है. साथ ही प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी भी आलाकमान की तस्वीर साफ होने का इंतजार कर रहे हैं. लोकसभा चुनावों के बाद वो भी एक बैठक के लिए प्रदेश में आए थे और उसके बाद वो भी केंद्रीय नेतृत्व से कोहरा छटने का इंतजार कर रहे हैं.

दिल्‍ली में बदलाव से बनेगी बात
छोटा कार्यकर्ता भी इस बात की बाट देख रहा है कि दिल्ली में अगर बदलाव होता है तो प्रदेश में क्या नए समीकरण बनेंगे. कोई परिवर्तन संगठन स्तर पर होना है तो आगे की राह देखी जाए. पार्टी के लोग भी मान रहे हैं कि थोड़ा बहुत कन्फयूजन ऐसे हालातों में रहता है. जबकि पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आरपी रतूड़ी का कहना है कि संगठन अपने स्तर पर धरने प्रदर्शन तो कर रहा है, लेकिन ऐसे हालातों में थोड़ कन्फ्यूजन तो रहता ही है.

क्‍या ये कन्‍फयूजन ठीक है?
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वैसे राजनीति के जानकार लोग मानते है कि कांग्रेस के सामने अभी पंचायत चुनावों और पिथौरागढ़ के विधानसभा उपचुनाव की चुनौती है. ऐसे में किसी तरह के कन्फयूजन की गुंजाईश नहीं होनी चाहिए. इसको लेकर वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट का कहना है कि पार्टी में गुटबाजी भी चरम पर है. हर नेता प्रदेश के मसलों को निपटाने के लिए दिल्ली की दौड़ लगाता है, लेकिन अब हाल ये है कि राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे बड़े पद की कुर्सी खाली है. ऐसे में हाईकमान की अनुपस्थति से राज्‍य में हालात बिगड़ सकते हैं.
बहरहाल, लोकसभा चुनावों मे मिली हार के बाद प्रदेश में पार्टी में को किस लाईन पर चलना है और किन मुद्दों पर हमलावर होना है इसमें किसी तरह का कोई कन्‍फ्यूजन नहीं होना चाहिए.

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First published: July 28, 2019, 3:53 PM IST
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