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उत्तराखंड के पुलिसकर्मियों के परिजनों ने आखिर क्यों किया जोरदार प्रदर्शन, जानें पूरा माजरा

प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के परिजनों ने कहा कि 27 जुलाई को कैबिनेट मीटिंग में उनके पक्ष में निर्णय नहीं किया गया तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे.

प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के परिजनों ने कहा कि 27 जुलाई को कैबिनेट मीटिंग में उनके पक्ष में निर्णय नहीं किया गया तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे.

family protest : पुलिस में 20 साल की नौकरी के बाद प्रमोशन मिलता है. पद खाली न होने पर उन्हें प्रमोशन के पद का ग्रेड पे दे दिया जाता था. लेकिन सातवें पे कमीशन के बाद उत्तराखंड में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई. इससे 2001-2002 में नियुक्त जवानों को लाभ नहीं मिल रहा.

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देहरादून. डीजीपी से लेकर तमाम अपीलों को दरकिनार करते हुए रविवार को पुलिस जवानों के ग्रेड पे की मांग को लेकर परिजनों ने जोरदार प्रदर्शन किया. उत्तराखंड में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब अनुशासित कहे जाने वाली पुलिस फोर्स से विरोध का स्वर खुलकर फूटा है.

यह है प्रदर्शन की वजह

पुलिस में 20 साल की नौकरी के बाद प्रमोशन मिलता है. पद खाली न होने पर उन्हें प्रमोशन के पद का ग्रेड पे दे दिया जाता था. जो कि साल 1996 और 98 वाले जवानों के बैच को भी मिला है. लेकिन सातवें पे कमीशन के बाद उत्तराखंड में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई. इससे 2001-2002 में नियुक्त जवानों को प्रमोशन के पद खाली न होने की दशा में अब न प्रमोशन मिल पा रहा है और न बढ़ा हुआ ग्रेड वेतन. इसको लेकर जवानों में आक्रोश है. आक्रोश इतना बढ़ा कि रविवार को रुद्रपुर और देहरादून में बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए इन पुलिसकर्मियों के परिजनों ने जोरदार प्रदर्शन किया ओर शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

परिजनों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

आपको बता दें कि उत्तराखंड में पुलिस के ऐसे करीब 4 हजार जवान हैं, जिन्हें प्रमोशन या प्रमोशन का पद खाली न होने की दशा में बढ़ा हुआ ग्रेड पे का लाभ मिलना था. प्रदर्शन को विभिन्न राजनैतिक दलों के साथ ही कई कर्मचारी संघों का भी समर्थन रहा. वहीं, प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट कुसुम चौहान को अपना ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें चेतावनी देते हुए परिजनों ने कहा कि 27 जुलाई की कैबिनेट बैठक में उनकी मांग के अनुरूप निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन उग्र होगा.

सरकार दुविधा में

ग्रेड पे का ये मसला सरकार के लिए गर्म दूध साबित हो रहा है. मामले के निस्तारण को लेकर कैबिनेट की एक सब कमेटी भी बनाई गई है. लेकिन मसला सिर्फ पुलिस का ही नहीं है. भविष्य में अन्य कर्मचारी संघों से भी यह मांग उठने लगेगी और इसी आशंका ने सरकार को दुविधा में डाल दिया है.

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