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श्राइन बोर्ड में सिर्फ चारधाम के 51 मंदिर क्यों? नेताओं के मंदिरों, ट्रस्टों को क्यों छोड़ा गया?

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: December 9, 2019, 6:13 PM IST
श्राइन बोर्ड में सिर्फ चारधाम के 51 मंदिर क्यों? नेताओं के मंदिरों, ट्रस्टों को क्यों छोड़ा गया?
चार धाम के तीर्थ-पुरोहित श्राइन बोर्ड का कड़ा विरोध कर रहे हैं.

बीजेपी विधायकों (BJP MLA) के ही इस विधेयक की मंशा और दायरे पर सवाल उठाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो सकता है.

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देहरादून. चार धाम श्राइन बोर्ड पर विवाद छिड़ा हुआ है और तीर्थ पुरोहित सवाल पूछ रहे हैं कि श्राइन बोर्ड में सिर्फ चारधाम ही क्यों? राज्य के बाकी मंदिर और ट्रस्ट क्यों नहीं? कांग्रेस के साथ बीजेपी विधायकों ने भी बड़े मंदिरों को बोर्ड के दायरे में लेने की मांग कर दी है. दरअसल चारधाम श्राइन बोर्ड में असल लड़ाई मंदिरों की कमाई की है. तीर्थपुरोहितों का सवाल है कि श्राइन बोर्ड में सिर्फ चारधाम के 51 मंदिरों को ही क्यों शामिल किया गया? हरिद्वार के मंदिर, धार्मिक ट्रस्ट और राज्य के बाकी बड़े मंदिर क्यों नहीं लाए गए जिनमें सरकार के मंत्री और विधायकों के ट्रस्ट शामिल हैं.

मंत्री-विधायकों के आश्रम, मंदिर क्यों बाहर 

तीर्थपुरोहित-हकूकधारी महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी का कहना है कि चाहे मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम हों या फिर कोटद्वार सिद्धबली मंदिर के महंत दलीप रावत अगला नंबर इन्हीं का आएगा. वह पूछते हैं कि श्राइन बोर्ड में अभी सिर्फ 51 मंदिर ही क्यों शामिल किए गए? इनमें हरिद्वार का चंडी देवी, मनसा देवी और गंगा महासभा को क्यों नहीं लिया गया?

तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि सरकार भले ही विधानसभा से बिल पास करवाने में कामयाब रहे लेकिन कोर्ट जाने का रास्ता खुला है और कोर्ट से उन्हें न्याय मिलेगा. हक-हकूकधारियों का कहना है कि हल्ला-हंगामा थमने वाला नहीं है इसलिए 18 दिसंबर को उत्तरकाशी में धरना-प्रदर्शन होगा तो 20 सितंबर को श्रीनगर में प्रदर्शन किया जाएगा. तब भी अगर सरकार नहीं चेती तो तीर्थ-पुरोहित परिवार समेत सीएम हाउस के बाहर आमरण अनशन करेंगे.

जल्दबाज़ी में करवाना चाहती है पास सरकार 

कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार को लगता है कि मंदिर कमाई का अड्डा बन गए हैं इसलिए सरकार जल्दबाजी में चारधाम श्राइन बोर्ड जल्दबाज़ी में पास कराना चाहती है. केदारनाथ से कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने कहते हैं कि धार्मिक ट्रस्टों और मंदिरों की आड़ वाले नेताओं के ठिकाने बने मंदिर भी कानून के दायरे में आने चाहिएं.

लैंसडाऊन से बीजेपी विधायक और कोटद्वार के सिद्धबली मंदिर के महंत दलीप रावत का कहना है कि हर मंदिर बोर्ड और कानून का दायरे में आना चाहिए फिर चाहे कोटद्वार का सिद्धबली मंदिर ही क्यों ना हो.नया विवाद खड़ा 

चार धाम श्राइन प्रबंधन बोर्ड विधेयक विधानसभा के पटल पर रखा जा चुका है और सरकार की मंशा साफ हो चुकी है कि श्राइन बोर्ड पर फैसला टलने वाला नहीं है. लेकिन बीजेपी विधायकों के ही इस विधेयक की मंशा और दायरे पर सवाल उठाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो सकता है.

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First published: December 9, 2019, 6:06 PM IST
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