आखिर क्या है उत्तराखंड में कोरोना से हो रही मौतों की बड़ी वजह?

राजे खेमे के बीजेपी के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल का कहना है कि गहलोत सरकार ने गांव और गरीब को उनके हाल पर छोड़ दिया है.

राजे खेमे के बीजेपी के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल का कहना है कि गहलोत सरकार ने गांव और गरीब को उनके हाल पर छोड़ दिया है.

Coronavirus in Uttarakhand : आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले 40 दिनों और पिछले 10 दिनों में स्थिति किस तरह गंभीर ही नहीं चिंताजनक हो चुकी है. जानिए आंकड़े क्या कह रहे हैं और सरकार क्या कह रही है.

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उत्तराखंड. कोविड-19 के मरीज़ों से जुड़े आंकड़े दिन ब दिन सनसनीखेज़ होते जा रहे हैं. एक विश्लेषण यह कह रहा है कि राज्य में कुल केसों और कुल कोरोना मौतों का 50 फीसदी आंकड़ा सिर्फ पिछले 40 दिनों में सामने आया है, तो दूसरी तरफ, राज्य ने ताज़ा बयान में बताया है कि वास्तव में उत्तराखंड में कोरोना से होने वाली मौतों का ग्राफ बढ़ने की बड़ी वजह क्या है. प्रशासन के मुताबिक मरीज़ों का समय से अस्पताल न पहुंचना अहम कारण है.

राज्य के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश के मुताबिक कोविड-19 के मरीज़ों की मौत के बढ़ते आंकड़ों की वजह यही है कि मरीज़ स्थिति गंभीर होने पर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. एएनआई की मानें तो ओमप्रकाश ने सभी को सलाह दी है कि सामान्य लक्षण दिखने पर ही डॉक्टरी सलाह लें, हालत बिगड़ने का इंतज़ार न करें.

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जानकारों ने कुंभ के आयोजन को कोरोना संक्रमण के लिहाज़ से सुपर स्प्रेडर माना है.

76% मौतें अस्पतालों में, चौंकाते आंकड़े

ओमप्रकाश के मुताबिक अब तक राज्य में कोविड से जितनी मौतें हुई हैं, उनमें से तीन चौथाई से ज़्यादा अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीज़ों के मामले हैं. यही नहीं, उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के और भी आंकड़े कम गंभीर नहीं हैं. आधिकारिक डेटा कह रहा है कि उत्तराखंड में अब तक 3896 कोविड मौतों में से 30 फीसदी मई महीने के ही पहले दस दिनों में हुईं.

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इसी महीने में स्थिति कितनी खराब हुई है, इसकी एक और बानगी यह है कि पिछले साल से अब तक राज्य में 2.49 लाख केस सामने आए हैं, लेकिन 2 मई से 10 मई के बीच आए केसों की संख्या कुल केसों की 25 फीसदी है. 32 फीसदी केस अप्रैल महीने में आए जबकि कुल केसों के 57 फीसदी पिछले 40 दिनों में.

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उत्तराखंड के प्रमुख सचिव के बयान संबंधी ट्वीट.

एक्टिव केसों का आंकड़ा भी राज्य के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. 1 अप्रैल को जहां उत्तराखंड में 2236 एक्टिव केस थे, वहीं 10 मई को 74,480 केस हैं. गौरतलब है कि राज्य में हरिद्वार महाकुंभ का आयोजन अप्रैल के महीने में हुआ, जिसे सभी जानकार सुपर स्प्रेडर मान रहे हैं.

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