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हाथी ने साधु को पटक-पटक कर मार डाला, उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक के आंकड़े क्या कह रहे हैं?

हाथी ने साधु को पटक-पटक कर मार डाला, उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक के आंकड़े क्या कह रहे हैं?

उत्तराखंड में वन्य जीवों का आतंक सिरदर्द बना हुआ है.

उत्तराखंड में वन्य जीवों का आतंक सिरदर्द बना हुआ है.

Uttarakhand Wildlife : उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमलों (Wildlife Attack) को लेकर अगर पिछले 8 साल का रिकॉर्ड देखा जाए तो रोंगटे खड़े हो सकते हैं. आम तौर पर माना जाता है कि पर्यावरणीय असंतुलन (Eco-Imbalance) के कारण ऐसा होता है, लेकिन सिर्फ इतना कहकर पल्ला कैसे झाड़ा जा सकता है क्योंकि पहाड़ में यह रोज़मर्रा की समस्या हो गई है और मनुष्यों का जीवन (Human Life) खतरे में है. देखिए कितने लोग मारे जा चुके हैं? बागेश्वर में कैसे इन दिनों वन्य जीवों का आतंक (Wildlife Terror) बढ़ा हुआ है?

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देहरादून. राजाजी टाइगर रिज़र्व क्षेत्र से लगे ऋषिकेश के लक्ष्मणझूला क्षेत्र में एक साधु को जंगली हाथी द्वारा खौफनाक ढंग से मार डालने की खबर है. हाथी के इस हमले में साधु का एक अन्य साथी बाल बाल बच गया. जंगल से लगे रास्ते में पेड़ के नीचे सोये हुए एक साधु को जंगली हाथी ने पटक-पटक कर मार डाला, जबकि साधु का दूसरा साथी मौके से जान बचाकर भागने में सफल रहा. हालांकि, इस दौरान वो घायल हुआ, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. यही नहीं, बागेश्वर में भी जंगली जानवरों का आतंक लगातार बना हुआ है और पिछले एक हफ्ते में पांच लोग इस हमले का सामला कर चुके हैं.

दरअसल, शिवरात्रि के दिन नीलकंठ महादेव मंदिर में श्रदालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. हरियाणा निवासी जो 50 वर्षीय साधु हाथी के हमले में मारा गया, वह भी नीलकंठ महादेव जाते हुए रात होने के कारण रास्ते में ही पेड़ के नीचे सो गया. इधर, उत्तराखंड में हाथी के हमले का यह पहला मामला नहीं है. 2014 से लेकर अब तक हाथियों के हमले में उत्तराखंड में 68 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि 78 लोग घायल हुए. ये अलग बात है कि साधु राजाजी के एरिया में जंगल में लेटा हुआ था, लेकिन सामान्य तौर पर भी उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले से लोग परेशान हैं.

किस जानवर ने किए कितने शिकार?
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 8 सालों में गुलदार, हाथी, भालू, बाघ, सूअर के हमलों में उत्तराखंड में 450 लोग असमय काल का ग्रास बन गए, तो 2285 लोग इनके हमलों में घायल हो गए. सबसे ज्यादा 162 लोग गुलदार के शिकार बने, तो 686 लोग घायल हुए. बाघ ने 27 लोगों को मौत के घाट उतारा तो, भालू के हमले में भी 22 लोगों ने अपनी जान गंवाई. जंगली सुअर, सांप, मगरमच्छ के हमले में भी 171 लोगों की मौत हुई है.

बागेश्वर में क्या हैं हालात?
सुष्मिता थापा की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक सप्ताह में सूअरों व बंदरों के हमले में पांच लोग घायल हो चुके हैं. हालांकि विभाग ने बीते पांच साल में 61 लाख से अधिक का मुआवज़ा बांटा है, लेकिन मानव जीवन खतरे में बना हुआ है. पिछले पांच सालों के आंकड़े देखें तो तस्वीर साफ होती है. गुलदार के हमलों से 7 मौतें 70 घायल, सर्प दंश से 8 मौतें 15 घायल, भालू के हमले से 3 घायल और सुअर के हमले में 1 मौत व 29 घायल का आंकड़ा जंगली जीवों के आतंक का सबूत है.

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
बागेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी हिमांशु बागरी का कहना है, ‘जंगलों के कम होने की वजह से मानव व वन्य जीव संघर्ष बढ़ता है. पिछले कुछ सालों में इस तरह की घटनाओं में कमी आई है. वन्य जीव से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं. जंगली जानवर गांव तक न आएं इसके लिए जंगलों में जानवरों के लिए पेयजल आदि की व्यवस्था के लिए कार्य किया जा रहा है.’

Tags: Leopard attack, Terror of elephants, Uttarakhand news, Wildlife news in hindi

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