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क्या विवादित उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी ले पाएगी 13 प्राइवेट आयुर्वेद कॉलेजों पर एक्शन ?

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: November 23, 2019, 6:23 PM IST
क्या विवादित उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी ले पाएगी 13 प्राइवेट आयुर्वेद कॉलेजों पर एक्शन ?
यूनिवर्सिटी प्रशासन की परीक्षा है कि वो कॉलेजों पर नकेल कस पाता है या नहीं.

उत्तराखंड में कुल 16 आयुर्वेद कॉलेज (Ayurved College) हैं जिनमें आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती है, पर हैरानी ये है कि 13 प्राइवेट कॉलेज शिक्षा देने से ज्यादा विवादों में घिरे रहते हैं. ये कॉलेज कमाई के नाम पर मोटी फीस वसूलने में तो आगे रहते हैं, लेकिन 53 दिन के आंदोलन में किसी मैनजमेंट ने अपने स्टूडेंट्स से बात तक नहीं की.

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देहरादून. आगामी 22 दिसंबर 2019 तक 13 आयुर्वेद कॉलेजों (Ayurved College) को विद्यार्थियों से ज्यादा वसूली गई फीस (Extra Fees) वापस करनी है, पर सवाल है कि कॉलेज ऐसा करेंगे या नहीं ? इससे भी बड़ा सवाल आयुर्वेद यूनिवर्सिटी को लेकर है जिसे इस फैसले को लागू करवाना है. आयुष सचिव की तरफ से यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को कहा गया है कि वो आदेश के मुताबिक कार्रवाई करें और कॉलेजों को फीस वापस करने को कहें. रजिस्ट्रार को कहा गया कि कॉलेजों ने आदेश माना या नहीं इस बात की जानकारी भी 22 दिसंबर तक शासन को दें. मतलब ये कि कॉलेजों की जेब से वसूली गई एक्स्ट्रा फीस निकालने की जिम्मेदारी किसी और की नहीं बल्कि उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी (Uttarakhand Ayurved University) की है. वहीं आदेश में ये भी साफ है कि जो कॉलेज 22 दिसंबर तक आदेश का पालन नहीं करेगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

आयुर्वेद यूनिवर्सिटी से ही एफिलिएटेड हैं कॉलेज

उत्तराखंड में कुल 16 आयुर्वेद कॉलेज हैं जिनमें आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती है, पर हैरानी ये है कि 13 प्राइवेट कॉलेज शिक्षा देने से ज्यादा विवादों में घिरे रहते हैं. ये कॉलेज कमाई के नाम पर मोटी फीस वसूलने में तो आगे रहते हैं, लेकिन 53 दिन के आंदोलन में किसी मैनजमेंट ने अपने स्टूडेंट्स से बात तक नहीं की. ऐसे में सवाल है कि एफिलिएशन देने वाली यूनिवर्सिटी का रोल क्या है, जिसे कॉलेजों की खुलेआम मनमानी नज़र नहीं आती. कुल मिलाकर इस बार फीस को लेकर शासन ने जो आदेश दिया
है वो यूनिवर्सिटी प्रशासन की परीक्षा है कि वो कॉलेजों पर नकेल कस पाता है या नहीं.

जिस यूनिवर्सिटी को आदेश पर एक्शन की जिम्मेदारी दी गई है, वो अपने स्टाफ की वजह से हमेशा विवादों और सवालों में घिरी रही है.


विवादों से घिरा रहा आयुर्वेद विश्वविद्यालय

जिस यूनिवर्सिटी को आदेश पर एक्शन की जिम्मेदारी दी गई है, वो अपने स्टाफ की वजह से हमेशा विवादों और सवालों में घिरी रही है. यहां कभी कोर्स को लेकर बवाल हुआ तो कभी रजिस्ट्रार की पोस्ट को लेकर. इसी यूनिवर्सिटी के एक रजिस्ट्रार को दिसंबर में जेल में एक साल हो जाएगा. कुल मिलाकर यूनिवर्सिटी के अंदर कुर्सी कब्जाने की बड़ी होड़ रही है, लेकिन किसी ने कभी आयुर्वेद को बढ़ावा देने के बारे में नहीं सोचा. ऐसे में विवादों में रहने वाली यूनिवर्सिटी के कुलपति और रजिस्ट्रार क्या बगैर किसी
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दबाव के काम कर पाएंगे. ये बड़ा सवाल है ?

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First published: November 23, 2019, 6:23 PM IST
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