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यूपी की 'शूटर दादी' की राह पर देहरादून में महिलाएं, 40+ की उम्र में लगा रहीं निशाना
Dehradun News in Hindi

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: March 2, 2020, 4:51 PM IST
यूपी की 'शूटर दादी' की राह पर देहरादून में महिलाएं, 40+ की उम्र में लगा रहीं निशाना
हरियाणा और लखनऊ से भी महिलाएं शूटिंग सीखने दून आ रही हैं.

फैमिली प्रॉब्लम के चलते जो महिलाएं अपने शौक पूरे नहीं कर पाईं वो अब शूटिंग (Shooting) के अपने शौक को पूरा कर रही हैं.

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देहरादून. देहरादून (Dehradun) की महिलाएं उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की 'शूटर दादी' की राह पर चल पड़ी हैं. उत्तर प्रदेश की 'शूटर दादी' से दुनिया वाकिफ है. 65 साल की उम्र में बागपत की चंद्रो तोमर (Chandro Tomar) ने हाथ में बंदूक थामी और कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप (Shooting Championships) में मेडल अपने नाम कर महिला शक्ति की एक अनूठी मिसाल कायम की.

हरियाणा और लखनऊ से भी शूटिंग सीखने पहुंची हैं महिलाएं
उत्तराखंड की महिलाएं भी अब चंद्रो तोमर की राह पर है. फैमिली प्रॉब्लम के चलते जो महिलाएं अपने शौक पूरे नहीं कर पाईं वो अब शूटिंग के अपने शौक को पूरा कर रही है. देहरादून के शूटिंग अकादमी में इन दिनों ऐसा ही नजारा दिख रहा है. हरियाणा और लखनऊ से भी महिलाएं शूटिंग सीखने दून आ रही हैं.

47 साल की मोनिका गोयल कहती हैं कि मेरा बेटा नेशनल लेवल शूटर है और उसे देखकर ही मुझे प्रेरणा मिली. मेरा बचपन से शौक था कि मैं शूटिंग करूं लेकिन नहीं कर पाई. जब मैंने 85 साल की चंद्रो तोमर के जज्बे को देखा तो मुझे भी प्रेरणा मिली. अब मैं भी शूटिंग अकादमी में पिस्टल शूटिंग सीख रही हूं.




45 साल की वंदना की कहानी भी ऐसी ही है, वो लखनऊ से 4 महीने के लिए राइफल शूटिंग सीखने दून आई हैं. वंदना बताती हैं कि शादी के बाद एनसीसी छोड़नी पड़ी. जब मेरी बेटी को मेरे शौक के बारे में पता चला तो उन्होंने मेरा शूटिंग अकादमी में एडमिशन कराया. अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयार हूं.



हरियाणा की डॉ प्रेरणा मलिक पेशे से गायनोक्लोजिस्ट हैं. उनका भी बचपन से शूटिंग सीखने का शौक था लेकिन पढ़ाई के चलते अपने शौक पर ध्यान नहीं दे पाई. अब बचपन के शौक को पूरा कर रही है.

देहरादून में शूटिंग अकादमी चला रहे मंयक मारवाह कहते हैं कि उनके पास पिछले 1 साल में 40 पार की महिलाओं के एडमिशन बढ़े हैं. शूटिंग में उम्र की सीमा नहीं होती. यही वजह है कि महिलाएं सेटेल्ड होने के बाद भी इस खेल में दिलचस्पी दिखा रही हैं. गर्मियों की छुट्टियों के समय तो एडमिशन ज्यादा होते हैं.

बहरहाल, समय के साथ साथ लोगों की सोच का बदलना और अपने शौक को पूरा करने की ललक नारी शक्ति की एक नई मिसाल के तौर पर इन दिनों देहरादून में भी देखने को मिल रही है.

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First published: March 2, 2020, 4:27 PM IST
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