इस बार निकाय चुनावों में आधी आबादी तय करेगी राजनीतिक दलों का भविष्य

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: October 23, 2018, 7:38 PM IST
इस बार निकाय चुनावों में आधी आबादी तय करेगी राजनीतिक दलों का भविष्य
इस बार महिलाएं न सिर्फ दावेदार के तौर पर बल्कि मतदाता के रूप में भी अपनी सशक्त भूमिका निभाने वाली हैं.

महिला एक्टिविस्ट का कहना है कि अधिकतर टिकट आरक्षण की मजबूरी में दिए गए हैं. टिकट पाने वालों में भी अधिकांश वे महिलाएं हैं जिनके परिवार या पति का राजनीतिक रसूख है.

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उत्तराखंड निकाय चुनाव में इस बार आधी आबादी को नज़रंदाज करना सियासी दलों के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकता है. राज्य में जिन 84 निकायों में चुनाव हो रहे हैं उनमें पुरुष और महिला मतदाताओं का आंकड़ा कमोबेश बराबर है. लिहाज़ा इस बार महिलाएं न सिर्फ दावेदार के तौर पर बल्कि मतदाता के रूप में भी अपनी सशक्त भूमिका निभाने वाली हैं.

उत्तराखंड के जिन 84 निकाय क्षेत्रों में करीब 24 लाख मतदाता हैं जिनमें से ग्यारह लाख के आसपास महिला मतदाता हैं. पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर जिले ऐसे हैं जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरूष मतदाताओं की अपेक्षा अधिक है, तो बागेश्वर में कमोबेश बराबर हैं. आधी आबादी की यह संख्या  सियासी दलों का गणित बना या बिगाड़ सकती है. यही कारण है कि टिकट बंटवारे के गुणा भाग में महिलाओं की धमक साफ दिखाई दे रही है.

  • निकाय चुनावों में अध्यक्ष पद के लिए नगर निगम में तीन-तीन, नगर पालिका और नगर पंचायत में  13-13 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.


  • इसके अलावा भाजपा ने 11 तो कांग्रेस ने पांच सामान्य सीटों पर महिला प्रत्याशियों को दावेदार बनाया है.

  • कुल मिलाकर निकायों की 84 सीटों में से भाजपा ने चालीस सीटों पर तो कांग्रेस ने 34 सीटों पर आधी आबादी को प्रतिनिधित्व दिया है.


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लेकिन राज्य आंदोलनकारी कमला पंत सियासी दलों की इस उदारता को एक छलावा बता रहे हैं. उनका मानना है कि अधिकतर टिकट आरक्षण की मजबूरी में दिए गए हैं. टिकट पाने वालों में भी अधिकांश वे  महिलाएं हैं जिनके परिवार या पति का राजनीतिक रसूख है.

देवभूमि में जनसंघर्षों की दिशा में मात्र शक्ति की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है. तमाम किंतु परंतु के बावजूद पहली बार सियासी पटल पर इतने बडे पैमाने पर महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलना मातृशक्ति के मजबूत और जागरूक होने को तो दिखाता ही है. यूं भी 2019 के सेमीफ़ाइनल में आधी आबादी को नाराज़ करने का जोखिम उठाना कोई समझदारी की बात भी नहीं.

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First published: October 23, 2018, 7:17 PM IST
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