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वर्ल्ड हार्ट डे: अनियमित जीवन शैली के कारण ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ी

वर्ल्ड हार्ट डे: अनियमित जीवन शैली के कारण ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ी

देहरादून में डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि हार्ट की बीमारी का बहुत ज्यादा संबंध व्यक्ति के दिनचर्या से जुड़ा हुआ है.

देहरादून में डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि हार्ट की बीमारी का बहुत ज्यादा संबंध व्यक्ति के दिनचर्या से जुड़ा हुआ है.

पौष्टिक आहार, सही जीवन शैली और समय समय पर जांच करवाने से इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पता लगाकर उपचार किया जा सकता है.

    तेजी से बदलती जीवन शैली और अनियमित खानपान के कारण देश में हदय रोगियों की तादाद दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. बीते कुछ वर्षों में अन्य रोगों की तुलना में हृदय रोगियों की अधिक मौतें हुई हैं. 29 सितंबर विश्व हदय दिवस के मौके पर सभी डॉक्टर्स लोगों के हृदय रोग के प्रति जागरूक होने को ही महत्वपूर्ण मान रहे हैं. दिल की बीमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी होने और उससे बचने के लिए अपनाये गये उपायों को ही स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी माना जा रहा है.

    बता दें कि हदय की बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाता है. चिकित्सकों की माने तो हार्ट अटैक झेल चुके लोगों को और अधिक सावधानी से अपनी जीवन शैली में बदलाव करना चाहिए. कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि लोग कई बार इसके लक्षणों की अनदेखी कर देते हैं. ऐसे में इसके परिणाम जानलेवा स्थिति तक पहुंच जाते हैं. उनका कहना है कि पौष्टिक आहार, सही जीवन शैली और समय समय पर जांच करवाने से इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पता लगाकर उपचार किया जा सकता है.

    देहरादून में डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि हार्ट की बीमारी का बहुत ज्यादा संबंध व्यक्ति के दिनचर्या से जुड़ा हुआ है. देश में जिस तेजी से इंडस्ट्रीयलाइजेशन हो रहा लोगों की जीवन शैली भी उसी अनुसार बदलती जा रही है. ऐसे में इस तरह की बीमारियों का बढ़ना स्वभाविक है. उन्होंने कहा कि हृदय की बीमारी का रिश्ता मधुमेह से भी है. आज देश में मधुमेह की बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है. बताया जा रहा है कि 2030 तक हिंदुस्तान मधुमेह की बीमारियों के मामले में विश्व की राजधानी बन जाएगा. उन्होंने कहा कि मधुमेह की बीमारी के बढ़ने के साथ ही हृदय रोग की बीमारी भी बहुत तेजी से बढ़ रही है. ये बीमारियां युवा वर्ग में भी देखने को मिल रही है. हर प्रदेश में औसतन 5 प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं.

    डॉ. योगेंद्र सिंह ने कहा कि इन बीमारियों से बचने के लिए खुद की जीवन शैली सही रखने की आवश्यकता है. साथ ही बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और पान से दूर रहने की जरूरत है.

    (देहरादून से सोनू सिंह की रिपोर्ट)

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    Tags: Uttarakhand news

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