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डिजिटल इंडिया के दौर में 70 मतदान केंद्र पर नहीं है मोबाइल और इंटरनेट की कनेक्टिविटी

डिजिटल इंडिया के दौर में 70 मतदान केंद्र पर नहीं है मोबाइल और इंटरनेट की कनेक्टिविटी

डिजीटल क्रांति के इस दौर में भी यहां दर्जनों पोलिंग स्टेशन ऐसे हैं, जहां संचार के नाम पर एक अदद लैंडलाइन तक नहीं है.

डिजीटल क्रांति के इस दौर में भी यहां दर्जनों पोलिंग स्टेशन ऐसे हैं, जहां संचार के नाम पर एक अदद लैंडलाइन तक नहीं है.

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में चुनाव करवाना किसी चुनौती से कम नहीं रहता. खासकर तब जब मतदान केन्द्रों तक संचार का कोई जरिया नहीं हो. चीन और नेपाल से सटे पिथौरागढ़ जिले में संचार सेवाओं की बदहाली लोकतंत्र के पर्व में कई बाधाएं खड़ी करती है. ऐसे में मतदान प्रतिशत जानना हो या फिर कानून व्यवस्था की स्थिति - दोनों में ही प्रशासन के पास कोई चारा नहीं रहता है. जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष चौहान ने बताया कि जिले की चारों विधानसभाओं में ऐसे 70 बूथ हैं, जहां किसी प्रकार की कनेक्टिविटी नहीं है.

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पिथौरागढ़. आज देश तेजी से डिजिटिलीकरण की तरफ बढ़ रहा है. डिजिटल माध्यमों से सूचना का आदान प्रदान करना पहले से बेहद ही आसान हो चुका है. आज के दौर में जब पूरी दुनिया संचार के साधनों से दौड़ रही है. उसी दौर में इस देश में एक जिला ऐसा भी है, जहां के दर्जनों पोलिंग स्टेशन संचार सुविधा से कोसों दूर हैं. चीन और नेपाल से सटे पिथौरागढ़ जिले में संचार सेवाओं की बद्हाली लोकतंत्र के पर्व में कई बाधाएं खड़ी करती है. ऐसे में मतदान प्रतिशत जानना हो या फिर कानून व्यवस्था की स्थिति दोनों में ही प्रशासन के पास कोई चारा नहीं रहता है. जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष चौहान ने बताया कि जिले की चारों विधानसभाओं में ऐसे 70 बूथ हैं, जहां किसी प्रकार की कनेक्टिविटी नहीं है.

चीन-नेपाल बॉर्डर से सटी धारचूला विधानसभा में है संचार विहीन बूथ

यहां धारचूला विधानसभा में सबसे अधिक पोलिंग स्टेशन संचार से कटे हैं. धारचूला में 35 पोलिंग स्टेशन ऐसे हैं, जहां न तो मोबाइल के सिंग्नल हैं और न ही लैंडलाइन. कुछ ऐसा ही हाल गंगोलीहाट विधानसभा का भी है. गंगोलीहाट में 28 बूथ ऐसे हैं, जहां संचार सेवाओं का कोई नामोनिशान नहीं है, जबकि डीडीहाट विधानसभा ऐसे 4 बूथ हैं. वहीं मुख्यालय की पिथौरागढ़ विधानसभा में भी 3 बूथ संचार सेवा से पूरी तरह कटे हैं. एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान सभी संचार से कटे मतदान केन्द्रों को पुलिस के वायरलैस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि सूचनाएं कंट्रोल रूम तक पहुंच सकें.

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बॉर्डर जिले में संचार की ये हालत ये दर्शाने के लिए भी काफी है कि देश भले ही आगे बढ़ रहा हो, लेकिन दुर्गम इलाकों की सुध आज भी किसी को नही है. यही वजह है कि हर चुनाव में प्रशासन को खासी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं.

Tags: Digital India, Uttarakhand news

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