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उलझता जा रहा है सात हजार बीघा जमीन की जांच का मामला

उलझता जा रहा है सात हजार बीघा जमीन की जांच का मामला

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जहां भूमाफिया सरकारी और खाली पड़ी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे कर रहे हैं. वहीं, लाखों करोड़ों रुपए की अंगेलिया हाउसिंग सोसायटी की जमीन की जांच का मामला शासन की फाइल से बाहर नहीं निकाल पा रहा हैं.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जहां भूमाफिया सरकारी और खाली पड़ी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे कर रहे हैं. वहीं, लाखों करोड़ों रुपए की अंगेलिया हाउसिंग सोसायटी की जमीन की जांच का मामला शासन की फाइल से बाहर नहीं निकाल पा रहा हैं.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जहां भूमाफिया सरकारी और खाली पड़ी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे कर रहे हैं. वहीं, लाखों करोड़ों रुपए की अंगेलिया हाउसिंग सोसायटी की जमीन की जांच का मामला शासन की फाइल से बाहर नहीं निकाल पा रहा हैं.

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    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जहां भूमाफिया सरकारी और खाली पड़ी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे कर रहे हैं. वहीं, लाखों करोड़ों रुपए की अंगेलिया हाउसिंग सोसायटी की जमीन की जांच का मामला शासन की फाइल से बाहर नहीं निकाल पा रहा हैं.

    राजधानी देहरादून के जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर गलजबाडी मौजूद है. हरे भरे जंगलों की ज़मीन पर अंगेलिया हाउसिंग सोसायटी का कब्जा है. अब तक सोसायटी के कई शेयर होल्डर सामने आ चुके हैं. सात हजार बीघे में बेशकीमती जमीन फैली है.

    दरअसल, यह मामला 1964 से चला आ रहा है. लेकिन 90 के दशक में इस जमीन पर भूमाफिया की नजर पड़ी और मुहंमांगे दामों पर बेचाना शुरू कर दिया. इस मामले की फाइलें शासन से लेकर जिला प्रशासन तक चक्कर काटती रही है, जब अधिकारियों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की तो म़ृतक के अधिवक्ता राजेश सूरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच कराने की मांग की. लेकिन पिछले साल उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई.

    अब उनकी बहन इस मामले की पैरवी कर रही है कि कम से कम शासन इस मामले की एसआईटी गठित करा दें, लेकिन अधिकारी फाइलों की समीक्षा करने की बात कर रहे है.
    आईजी संजय गुंज्याल का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है. एसआईटी अब की हुई जांच की फाइलों की समीक्षा कर रही है.

    इस जमीन को लगातार भूमाफिया बेच रहे हैं, लेकिन अधिकारी इस मामले की अनदेखी कर रही है. स्थानीय लोग में मामले की जांच चाहते हैं जिससे सच्‍चाई का पता चल सके, लेकिन हैरत की बात है कि अधिकारी सरकार को भी गुमराह करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं. जांच कमेटी को इधर-उधर घुमाकर वक्त काट रहे हैं.

    शिकायतकर्ता रीटा सूरी का कहना है कि वे चाहती हैं कि सरकार इस मामले की जांच कराए, जिससे पूरे मामले की सही तरीके से जांच हो सके और सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने वाले के खिलाफ हो सकें. लेकिन उनका कहना है कि इस मामले की में अधिकारी कोई पहल नहीं कर रहे हैं, जिससे लम्बे समय से मामला शासन की फाइलों में उलझ कर रह गया है.

    वर्ष 2000 से इस मामले की जांच की कई कमेटी का गठन का हो चुका है, लेकिन किसी कमेटी ने मामले की जांच नहीं की. बेहतर होता कि सरकार इस मामले की जांच कराती, जिससे सरकार जमीन पर अवैध कब्जे और हरे-भरे जंगलों के कटाने से रोका जा सकता.

    Tags: Uttarakhand news

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